लोगों के कल्याण के लिए भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम

Updated Date: Thu, 09 Apr 2015 07:01 AM (IST)

- इसरो के पूर्व चेयरमैन ने कहा, टीचर की बदौलत बना अंतरिक्ष विज्ञानी

JAMSHEDPUR: हो सकता है अगले वर्ष में मंगल ग्रह पर मानव जीवन की उम्मीद सच्चाई में बदल सके। वहां मानव के जाने व रहने की बात साकार हो। इन सबसे अलग भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम का उद्देश्य मानव कल्याण का है। यह कहना था भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के पूर्व चेयरमैन डॉ। एस राधाकृष्णन का। टाटा एजुकेशन एक्सीलेंस प्रोग्राम (टीप) के दसवें संस्करण में बतौर चीफ गेस्ट अपने स्पीच में उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष कार्यक्रम में 90 प्रतिशत प्रयास किसानों की मदद के लिए है। भारतीय जनता के कल्याण का उद्देश्य इसमें निहित है। यह उसी भारतीय परंपरा का हिस्सा है जिसमें समाज की बेहतरी की सोच छिपी होती है।

टीम भावना सफलता की कुंजी

डॉ। राधाकृष्णन ने कहा कि टीम एक्सीलेंस सफलता की कुंजी होती है। यह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी साबित हुआ है। उन्होंने शाहरूख खान अभिनीत फिल्म 'चक दे' का उदाहरण देते हुए कहा कि किस तरह हॉकी खिलाडि़यों ने मेहनत व टीम भावना के साथ खेलकर विजेता का दर्जा हासिल किया। भारत के महत्वाकांक्षी मंगल अभियान में शामिल वैज्ञानिकों की औसत आयु फ्0 वर्ष से भी कम थी जिन्होंने दिन-रात टीम भावना के साथ काम कर एक और एक ग्यारह की कहावत को चरिताथर्1 किया।

युवाओं के लिए संदेश, समाज को लौटाएं

डॉ। एस राधाकृष्णन ने युवाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि वे पढ़-लिखकर जिस ऊंचाई तक पहुंचे, इस बात को हमेशा ध्यान रखें कि समाज की भलाई में क्या योगदान दे सकते हैं। हमेशा लोगों की भलाई के बारे में सोचें और लौटाने का भाव रखें।

बेमिसाल होते हैं टीचर

अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ। एस राधाकृष्णन ने टीचर के पेशे को अतुलनीय करार देते हुए कहा कि यह टीचर से मिला मार्गदर्शन ही था जिसकी बदौलत वे अंतरिक्ष विज्ञानी बने। उन्होंने कहा कि टीचर के पेशे में ईष्र्या की जगह नहीं होती। इस पेशे की तुलना किसी अन्य पेशे के साथ नहीं की जा सकती। एक टीचर के लिए समाज से मिलनेवाला सम्मान ही पुरस्कार होता है। उन्होंने कहा कि उनकी माता और दादा-दादी भी टीचर थे।

Posted By: Inextlive
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