भारतीय राजनीति के 4 किस्‍से जब परिवार और पार्टी में पड़ी दरार

उत्‍तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी की बड़ी हार की वजह उनके परिवार के बीच की दरार मानी जा रही थी। आज भी ये कलह खत्‍म नहीं हुई है जिसके चलते लग रहा है कि मुलायम सिंह यादव के सहारे अपनी नयी बिसात बिछाने के प्रयास में लगे शिवपाल यादव अपने भतीजे उत्‍तर प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को पूरी तरह खत्‍म कर देने के प्रयास में हैं। वैसे राजनीतिक परिवारों में ये कलह का पहला नजारा नहीं है इससे पहले भी भारत की कुछ बड़ी पॉलिटिकल फेमिली के अंदरूनी विवाद ने कई बार देश के राजनीतिक माहौल को अलग दिशा और दशा दी है।

Updated Date: Mon, 25 Sep 2017 03:07 PM (IST)

 

 

गांधी परिवार में मेनका का रवैया
देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार माने जाने वाले गांधी परिवार में जबरदस्त कलह देखने को मिली जब संजय गांधी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मेनका गांधी ने बगावत की और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चली गईं। जिसका नतीजा ये हुआ कि मेनका को गांधी परिवार से अलग होना पड़ा और वो अपने परिवार की राजनीतिक दिशा से बिलकुल अलग चली गईं। इन दिनों मेनका सत्ताधारी पार्टी भाजपा की सदस्य हैं और भारत की महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं।   

सिंधिया परिवार में भाई बहन का झगड़ा
हालाकि ये विवाद नितांत पारिवारिक था और संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़ा था, लेकिन सिंधिया परिवार का ये विवाद राजनीतिक दलों के सर्पोट से चलता रहा है और आज भी कायम है। सिंधिया राजवंश देश के बड़े राजसी परिवारों में से एक रहा है। जाहिर है कि उसकी संपत्ति भी उतनी ही बड़ी है। उसी पर अपना अधिकार जताने के लिए परिवार में कलह रही और जहां बहनों जिसमें राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हैं, भारतीय जनता पार्टी का साथ लिया तो वहीं भाई माधव राव सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी के साथ चलना उचित समझा। माधव राव की तरह उनके बेटे ज्योतिरादित्य भी कांग्रेस पार्टी के सदस्य और वर्तमान सांसद हैं। 

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महत्वाकांक्षाओं की जंग का शिकार ठाकरे परिवार 
महाराष्ट्र की राजनीति में बाला साहेब ठाकरे और शिव सेना का नाम बहुत बड़ा है और दोनों ही स्तर पर उनका वर्चस्व हमेशा कायम रहा। बाला साहेब लंबे अर्से तक अपने परिवार को एक सूत्र में बांधे रहे। समसया तब पैदा हुई जब उनके परिवार में अतिमहत्वाकांक्षी भतीजे राज ठाकरे ने बढ़त बनानी शुरू की। राज ना सिर्फ महत्वाकांक्षी थे बल्कि बाला साहेब की तरह उग्र और आक्रामक व्यक्तित्व वाले भी थे। जाहिर है राज बाला साहेब के बेटे उद्धव पर भारी पड़ने लगे। उनकी लोकप्रियता और तेजी से आगे बढ़ने की प्रवृत्ति ने उद्धव को असुरक्षित बना दिया और उन्होंने बाला साहेब से राज को पीछे रखने के लिए कहा, पर यह बात राज को हजम नहीं हुई और उन्होंने विद्रोह कर दिया। इस तरह महाराष्ट्र की राजनीति में नई पार्टी और नया नेतृत्व उभरा राज ठाकरे की अलग पार्टी महाराष्ट्र नव र्निमाण सेना। 

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नई पार्टी की ओर शिवपाल 
ऐसा ही कुछ अब समाजवादी पार्टी में होने की संभावना दिखाई दे रही है। लोहिया को आर्दश मानते हुए जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी को खड़ा किया था तब सोचा भी नहीं होगा एक दिन वे खुद ही इससे अलग हो जायेंगे और नयी पार्टी बनाने के लिए मजबूर होंगे। अब कुछ ऐसा हीनजारा सामने आ रहा है। जब मुलायम के भाई शिवपाल अपने भतीजे अखिलेश का विरोध करके उन्हें पार्टी से ना तो निकलवा पाये नाही पार्टी पर कब्जा हासिल कर पाये। तो अब मुलायम सिंह को आगे कर के नयी पार्टी बनाने के जुगाड़ में हैं। देखना ये है कि बेटे को छोड भाई का साथ देने को तैयार मुलायम इस बार कितने कामयाब होते हैं।  

 

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Posted By: Molly Seth
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