करोड़ों की हुई ठगी के बिहार से जुड़े तार

2019-08-22T06:00:59Z

RANCHI : डाटा इंट्री के नाम पर बेरोजगारों का करोड़ों रुपये लूटकर फरार हुई स्मोक मल्टीप्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ जांच तेज कर दी गयी है। रांची एसएसपी ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को फ्रॉड कंपनी व उससे जुड़े कर्मचारियों के मोबाइल नम्बरों की डिटेल और सीडीआर निकालने के निर्देश दिये हैं। जिसके बाद पुलिस मोबाइल व विज्ञापन के जरिये जालसाजी की इस बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए बुने गए जाल को सुलझाने में जुट गई है। उसे अब तक दो खास मोबाइल नम्बर 6287090001, 7362096279 उपलब्ध हुए हैं। इन नम्बरों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के लिए छापेमारी जल्द शुरू की जाएगी। इन नम्बरों को इस्तेमाल करने वालों में प्रिया व नसरीन नामक दो युवतियों का नाम भी सामने आया है।

पुलिस बिहार पुलिस के सम्पर्क में

कंपनी के संचालक कुमार सानू उर्फ अंकित ने मकान किराए पर लेने के लिए अपना आधार कार्ड मकान मालिक को दिया था। पुलिस के हाथ वह आधार कार्ड लग गया है जिसमें कुमार सानू का पता बिहार के खगडि़या इलाके का दिया हुआ है। अब पुलिस इस बात की छानबीन कर रही है कि आरोपी कुमार सानू वास्तव में खगडि़या का है या आधार कार्ड भी फर्जी है। इसके लिए रांची पुलिस की एक टीम बिहार पुलिस के सम्पर्क में है और जल्द ही टीम खगडि़या के लिए निकलेगी।

ठगी का सेंटर बन गया झारखंड

बेरोजगारों से ठगी के लिए झारखंड सेफ जोन होने के साथ ही प्रमुख सेंटर भी बनता जा रहा है। कभी बेवसाइट पर झारखंड सरकार में नौकरी का विज्ञापन देकर लाखों युवाओं से (500-1000) रुपये करके झटक लिये जा रहे हैं तो कभी डाटा इंट्री के नाम पर उन्हें नौकरी का झांसा दिया जा रहा है। मेन रोड स्थित स्मोक एजेंसी के द्वारा पिछले तीन माह से लोगों को इस तरह से ठगा जा रहा था। इसकी जानकारी पुलिस को भी दी गयी थी लेकिन उसके बावजूद इस मामले का खुलासा तब हुआ जब लुटे लोग सड़क पर आ उतरे।

पहले भी डाटा इंट्री का खेल

इस घटना से पहले वर्ष 2007 में कांटाटोली स्थित बंगाली मोहल्ला में भी हिमांशु बनर्जी नाम के शख्स ने डाटा इंट्री का काम शुरू किया था। नए गठित राज्य के लिए डाटा इंट्री करायी जा रही है इस रोजगार के आकर्षण में फंसकर लाखों लोगों ने उसके कार्यालय में 1100 रुपये देकर रजिस्ट्रेशन कराया था। दो माह बाद अचानक हिमांशु और उसका पूरा परिवार गायब हो गया। पुलिस को उसका आज तक कोई सुराग नहीं मिला है। उस वक्त भी कयास लगाए जा रहे थे कि 5 करोड़ से ऊपर की ठगी की गयी है।

सूचना के बाद भी पुलिस सुस्त

इस तरह के कई मामलों की पुलिस को पूर्व में सूचना दी जाती है लेकिन कोई कंप्लेन नहीं मिलने का हवाला देकर वह जांच से कतरा जाती है। स्मोक मल्टीप्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के द्वारा की जा रही जालसाजी की सूचना भी हिदपीढ़ी थाने की पुलिस को दी गयी थी लेकिन उसने इस मामले में भी कोई दिलचस्पी ली। नतीजा कई लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फ्रॉड रफूचक्कर हो गए।

क्या कहते हैं लोग

राज्य में बेरोजगारी काफी बढ़ गयी है। इस बीच उम्मीद की कोई किरण दिखाई दे तो लोग सही गलत का फैसला नहीं कर पाते और ठगे जाते हैं।

रितेश श्रीवास्तव

विज्ञापनों पर लगाम लगाने की ठोस व्यवस्था होनी चाहिए। जिसके जो मन में आता है वह छपवा सकता है, जो सही नहीं है। इसके प्रलोभन में आकर ही लोगों का रुपया डूब रहा है।

धनंजय कुमार

वर्जन

पढ़े-लिखे लोगों का इस तरह से झांसे में आ जाना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस को सूचना देकर वेरीफिकेशन करा लेने से काफी हद तक चीजें स्पष्ट हो जाएंगी। अगर थाना स्तर पर कोताही बरती जाती है तो मुझे सूचित करें तुरंत कार्रवाई होगी।

अनीश गुप्ता

एसएसपी रांची


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