एफआरआई में चमगादड़ खा गए आमलीची

2019-07-14T06:00:06Z

- चमगादड़ों के आतंक के चलते भागे ठेकेदार

- एफआरआई में आम-लीची का कारोबार मुश्किल

देहरादून।

इस बार एफआरआई में चमगादड़ो का ऐसा आतंक रहा कि आम-लीची की फसल हाथ नहीं आई। जिन ठेकेदारों ने आम-लीची के बगीचों का ठेका लिया था, वे भी चमगादड़ों के प्रकोप के चलते भाग निकले। न तो उन्होंने बगीचे की रखवाली की और न ही रेंज ऑफिस की ओर से जाने वाले लेटर्स का रिप्लाई किया। ऐसे में इस बार यहां गिने-चुने आम-लीची हुए, वो भी चमगादड़ों ने खा लिए।

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ये रही स्थिति

एफआरआई के रेंज ऑफिस की ओर से इस साल अप्रैल में आम-लीची के बगीचों का ऑक्सन किया गया। जिसके बाद ठेकेदार ने 90 हजार रुपये विभाग में जमा कराकर ठेका तो ले लिया लेकिन उसके बाद से वो वहां नहीं आया। जानकारी लेने पर पता चला कि पेड़ो पर लटके चमगादड़ो को देख उसे अंदाजा हो गया था कि फ्रूट्स बचेंगे नहीं। ऐसे में न तो उसने बाकी के आधे पैसे दिए और न ही वहां रखवाली के लिए पहुंचा। हालांकि इस संबंध में उन्हें कई बार विभाग की ओर से रिमाइंडर भेजे गए। बावजूद इसके उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं किया।

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ऐसे भगा रहे थे चमगादड़

फिर भी विभाग की ओर से चमगादड़ भगाने की कुछ ऐसी व्यवस्था की गई थी कि पेड़ों के साथ पतला धागा बांधा गया था। जो कि हवा से हिलता तो चमगादड़ इधर-उधर हो जाते। हालांकि ये तरीका ज्यादा कारगर नहीं हो सका और फ्रूट्स नहीं बच सके। वहीं ऐसे फूट्स जो कि चमगादड़ ने खाएं हो, उन्हें भी वहां से हटा दिया गया ताकि कोई उन्हें न खा ले। चमगादड़ के खाए फ्रूट को फ्रूट बैट कहा जाता है। जो कि अपनी झूठन के साथ खतरनाक वायरस फूट्स में छोड़ देते हैं।

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पिछले साल ठीक था कारोबार

पिछले साल तक की बात करें तो यहां आम-लीची के बगीचों का ऑक्सन एक लाख 44 हजार में किया गया था। जो कि पूरा ठेकेदार ने जमा भी किया और पेड़ों का बचाव भी किया। हालांकि तब तक चमगादड़ों का आतंक भी एफआरआई में इतना नहीं था। ऐसे में फूट्स बचा लिए गए थे।

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सांडों ने भी बढ़ाई परेशानी

एफआरआई परिसर में इन दिनों सांडो ने भी दिक्कत बढ़ाई हुई है। थर्सडे को फॉरेस्ट गार्डो ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से शिकायत की। बताया कि जहां से भी थोड़ी जगह मिलती है। सांड अंदर घुस आते हैं। हालांकि अधिकारियों ने इस संबंध में फेंसिंग कराए जाने के निर्देश दिए।

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इस बार चमगादड़ों की वजह से आम-लीची की फसल नहीं हो पाई। ऑक्सन वाले भी मुड़कर वापस नहीं आए। ऐसे में यहां देखरेख भी नहीं हो पाई। वहीं सांड परिसर में न प्रवेश कर सकें इसके लिए फेंसिग प्रॉपर करवाई जा रही है।

एसआर रेड्डी, असिस्टेंट सिल्विकल्चरिस्ट, एफआरआई

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एनआईईपीवीडी में भी कम रहा कारोबार

राजपुर रोड स्थित एनआईईपीवीडी परिसर में भी इस बार पिछले साल से कम कारोबार रहा। दरअसल यहां आम-लीची का ऑक्सन इस बार 81 हजार में हुआ जो कि पिछले साल 95 हजार में हुआ था। यहां की सेक्शन ऑफिसर पर्चेज सविता आनंद ने बताया कि हालांकि कैंपस के भीतर के स्टाफ को तीस रुपये किलो लीची, सात और दस रुपये किलो आम भी इसमें से दिए गए।


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