गंगा सप्‍तमी जानिए ऋषि की कहानी जिन्‍होंने अपने कान से गंगा को धरती पर छोड़ा

2019-05-12T16:04:55Z

गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान अन्नवस्त्रादि का दान जपतपउपासना और उपवास किया जाय तो सारे पाप दूर होते हैं

गंगा उत्पत्ति का दिन श्रीगंगासप्तमी
वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन महर्षि जह्नु ने अपने दाहिने कान से गंगा को पृथ्वी पर छोड़ा था। अत: यह गंगा उत्पत्ति का दिन है। ध्येय है कि गंगा के प्रवाह एवं कोलाहल से क्रुद्ध हो महर्षि जह्नु ने अपने तपबल से उन्हे पी लिया। बाद में उन्हे मुक्त कर दिया। तब से गंगा का नाम जाह्नवी पड़ा। गंगा सप्तमी मध्याह्न ग्राह्या होने से इस वर्ष शनिवार 11 मई को पड़ रही है। श्रीमद्भागवत महापुराण मे गंगा की महिमा बताते हुए शुक्रदेव जी परीक्षित् से कहते हैं कि जब गंगाजल से शरीर की राख का स्पर्श हो जाने से सगर के पुत्रों को स्वर्ग की प्राप्ति हो गई,तब जो लोग श्रद्धा के साथ नियम लेकर श्रीगंगाजी का सेवन करते हैं उनके सम्बन्ध में तो कहना ही क्या है, क्योंकि गंगा जी भगवान के उन चरणकमलों से निकली हैं, जिनका श्रद्धा के साथ चिन्तन करके बड़े -बड़े मुनि निर्मल हो जाते हैं और तीनो गुणों के कठिन बन्धन को काटकर तुरंत भगवत्स्वरूप बन जाते हैं। फिर गंगा जी संसार का बन्धन काट दें इसमें कौन बड़ी बात है। अतएव इस दिन गंगा आदि का स्नान, अन्न-वस्त्रादि का दान, जप-तप-उपासना और उपवास किया जाय तो सारे पाप दूर होते हैं।

भारतीय संस्कृति और सभ्यता को बनाया जीवन्त
भारतीय संस्कृति और सभ्यता को जीवन्त बनाने में यदि किसी का सर्वाधिक योगदान है तो वह हैं गंगा नदी। यह गंगा नदी न केवल हमारे ही देश की सबसे पवित्र नदी हैं अपितु विश्व की सर्वश्रेष्ठ नदियों में अपने विशिष्ट गुणों के कारण सर्वप्रथम स्थान पर है। प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति की चर्चा करते हुए आज भी हम अपने गौरवपूर्ण अतीत को स्मरण करते हैं, उस सभ्यता को सर्वलोकोपकारी बनाने में गंगा जी की लहरों ने ही मानव हृदय को मंगलमयी प्रेरणा दी थी। हमारे इस विशाल देश में गंगा की निर्मल धारा प्राचीन काल से ही अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हिन्दुओं के लिए तो यह धरती पर बहकर भी आकाशवासी देवताओं की नदी है और इस लोक की सुख समृद्धियों की विधात्री होकर भी परलोक का सम्पूर्ण लेखा जोखा सँवारने वाली हैं। गंगा जी केवल शारीरिक एवं भौतिक सन्तापों को ही शान्त नहीं करती अपितु आन्तरिक एवं आध्यात्मिक शान्ति को भी प्रदान करती हैं।

सप्ताह के व्रत-त्योहार: 7 मई को अक्षय तृतीया, इस दिन शुरु होगा रमजान का महीना

गंगा सप्तमी : जब गंगा के गुरुर को भगवान शंकर ने तोड़ा, जटाओं से निकली तो बही मुक्ति की धारा
मृत्यू के समय एक बूंद गंगा जल मानव जीवन सफल कर देता है
अखिल ब्रह्माण्ड व्यापक जग के विधाता पोषक एवं संहारक ब्रह्मा एवं शंकर जी तथा विष्णु के द्रव रूप में भागीरथी हिन्दूओं के मानस पटल पर ऐसा प्रभाव डालती हैं कि कोई भी हिन्दू गंगा जी को न तो नदी के रूप में देखता है और न किसी के मुख से यह सुनना चाहता है कि गंगा जी नदी है। उसकी तो यह अन्तिम इच्छा होती है कि मृत्यु के समय उसके मुख में एक बूँद भी गंगा जल चला जाय तो उसका मानव जीवन सफल हो जायेगा। अत: इस दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत, और उपवास आदि करने का बहुत ही महत्व है। पहले इस दिन बनारस में शहनाई- दंगल होता था।

ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र



This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.