सड़कों से हट जाएंगे फिर भी काम बहुत आएंगे

2019-01-06T06:00:08Z

- गोवंशीय पशुओं के गोबर और मूत्र से फिनायल से लेकर बनेगी मॉस्कीटो क्वॉयल

-शहर से लेकर गांवों तक बनाए जाएंगे आश्रय स्थल, सभी विभागों की जिम्मेदारी तय

BAREILLY: शहर से लेकर गांव की सड़कों और खेतों में घूमने वाले छुट्टा गोवंश हट तो जाएंगे इसके बावजूद भी यह बहुत काम आएंगे। इनके मूत्र और गोबर से बनने वाले प्रोडक्ट घरों से मच्छर और कीड़े भगाएंगे। यही नहीं गोबर से खाद भी बनेगी और गैस बनाकर चूल्हे भी जलेंगे। छुट्टा पशुओं की देखरेख उन्हीं के मूत्र और गोबर से बनने वाले उत्पादों से करने का प्लान भी तैयार किया गया है। शासन ने सभी जिलों को गोवंश पशुओं को आश्रय स्थल में रखने की नीति का आदेश भेज दिया है।

2 करोड़ गोवंश हैं प्रदेश में

मुख्य सचिव डा। अनूप चंद्र पांडेय के भेजे पत्र के मुताबिक 19वीं पशुगणना 2012 के अनुसार प्रदेश में करीब दो करोड़ गोवंशीय पशु हैं। मौजूदा समय में खेती के अधिकतर काम मशीन से होने लगे हैं, जिसकी वजह से बैलों का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से लोग इन्हें आवारा छोड़ देते हैं। इसके साथ ही ये निराश्रित गोवंश अनियंत्रित प्रजनन से अनुपयोगी व कम उत्पादकता के गोवंश की उत्पत्ति करते हैं। इससे निराश्रित पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी के चलते आश्रय स्थल खोले जा रहे हैं।

इसलिए बनाए जा रहे हैं आश्रय गृह - निराश्रित व बेसहारा गोवंश को आश्रय उपलब्ध कराना

- आश्रय स्थल पर रखे गए गोवंश के भरण पोषण की व्यवस्था।

- संरक्षित गोवंश को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण, चिकित्सा व्यवस्था व नर गोवंश की नसबंदी कराना

- मादा गोवंश को प्रजनन सुविधा उपलब्ध कराना

इस काम में आएंगे गोवंश

-आश्रय स्थल में गोवंश के गोबर और मूत्र का इस्तेमाल किया जाएगा

-गोबर से गमले बनाकर मार्केट में बेचे जाएंगे

-गोबर से मॉस्कीटो क्वाइल बनाकर बेची जाएगी

-गोबर से बायो गैस तैयार की जाएगी

-गोबर से कंपोस्ट व बर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार की जाएगी

-गोबर और गोमूत्र का जैविक खेती और बागबानी में इस्तेमाल किया जाएगा

-गोबर से कीटनाशक बनाकर बेचे जाएंगे

-गोबर से बने लट्ठों का श्मसान घाट में या फिर सर्दियों में अलाव जलाने में काम में लाया जाएगा

-उद्यमियों को प्रेरित कर बायोगैस या सीएनजी प्लांट लगाने के लिए कहा जाएगा

खुले में छोड़ने वालों को मिलेगा दंड

अभी तक गोवंशीय पशुओं को खुले में छोड़ने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है लेकिन इस नीति के तहत इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस-प्रशासन ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही कर सकते हैं। आश्रय स्थल शहर के अलावा कस्बे व गांवों में भी बनाए जाएंगे। इन आश्रय स्थल में बंद गोवंश की देखरेख के साथ उनकी सुरक्षा भी की जाएगी। किस विभाग को क्या करना है, सभी की जिम्मेदारी फिक्स कर दी गई है।

अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना के लिए सभी स्थानीय निकायों से जमीन तलाशने को कह दिया गया है। सभी जगह स्थान तलाश कर बेसहारा पशुओं को रखने के लिए आश्रय स्थल बनाए जाएंगे।

रणवीर प्रसाद, कमिश्नर


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