'बचपन' को परोसा जा रहा नशा

2014-07-16T07:01:44Z

- नशे के सौदागरों के लिए मुफीद है राजधानी

- नशे के धंधेबाज बच्चों को बना रहे निशाना

- स्कूल और कॉलेज गोइंग छात्र हैं कस्टमर

DEHRADUN : नशे के सौदागरों के लिए दून मुफीद स्थान बनता जा रहा है। इस बात की तस्दीक पुलिस द्वारा पकड़ी गई नशे की बड़ी खेप करती हैं, जिसे दून में सप्लाई किया जाना था। आधा से अधिक नशा स्कूल और कॉलेज गोइंग छात्रों को बेचा जाना था। साफ है कि नशे के धंधेबाज बच्चों को अपना निशाना बना रहे हैं। वे बच्चों को नशीली दवाइयों के साथ चरस, स्मैक, ब्राउनशूगर जैसा हाईप्रोफाइल नशा तक मुहैया करवा रहे हैं। सवाल है कि आखिर बच्चों को कैसे इस दलदल से धंसने से बचाया जा सके? सॉइकोलॉजिस्ट कि माने तो थोड़ी सावधानी रखी जाए तो बच्चों को नशे का आदी होने से बचाया जा सकता है।

बच्चे हैं निशाने पर

दरअसल, एजुकेशन हब के नाम से फेमस दून में उत्तराखंड के अलावा अन्य स्टेट से भी बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। यही बच्चे नशे के धंधेबाजों के निशाने पर हैं। शुरूआत में वे मुफ्त में बच्चों को नशा मुहैया करवाते हैं, लेकिन जब छात्र इसके आदी हो जाते हैं तो फिर धंधेबाजों की तरह बातें करने लगते हैं। नशे के एवज में मोटी रकम वसूलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। कुछ छात्रों को नशे के एवज में धंधा बढ़ाने की जिम्मेदारी तक दी जाती है। यही छात्र धंधे को स्कूल और कॉलेज के अंदर फैलाने का काम करते है। इन्हीं के माध्यम से अन्य छात्र नशे की गिरफ्त में आने लगते हैं। प्लांड वे में नशे का एक पूरा नेक्सेस काम करने लगता है।

सैकड़ों आ चुके गिरफ्त में

ऐसा नहीं है कि पुलिस नशे के इस कारोबार के खिलाफ कार्रवाई न कर रही हो। आंकड़ों पर नजर डालें तो गत वर्ष ख्0क्फ् में नशीली गोलियां, इंजेक्शन, चरस, स्मैक, ब्राउन शूगर, डोडा सहित कई अन्य नशीले पदार्थो के साथ ख्क्0 लोगों को पकड़ा गया। जबकि इस साल अब तक 87 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सभी को एनडीपीएस एक्ट में जेल भेजा जा चुका है, बावजूद नशे का कारोबार थम नहीं रहा है। पुलिस सूत्रों की माने तो राजधानी में नशीला पदार्थ एक चेन के माध्यम से पहुंचता है। पुलिस जिसे पकड़ती है वह नशे का असल सौदागर नहीं, बल्कि धंधे में इस्तेमाल होने वाला एक कैरियर होता है, जो नशे को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करता है।

पेरेंट्स रहे सतर्क

पुलिस की गिरफ्त में नशे के सौदागर यह स्वीकार चुके हैं कि नशीले पदार्थो के अधिकांश ग्राहक स्कूल व कॉलेज गोइंग स्टूडेंट हैं, जिससे साफ होता है कि यूथ नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जो पुलिस के लिए भी चिंता का विषय है। सॉइकोलॉजिस्ट डॉ। वीना कृष्णनन बताती हैं कि यदि कुछ सावधानी बरती जाए तो बच्चों को इस दलदल में फंसने से रोका जा सकते हैं। यह काम पेरेंट्स बखूबी कर सकते हैं। यदि बच्चा पॉकेट मनी अधिक मांगे तो समझ लें कि कुछ गड़बड़ है। इसके अलावा भी बच्चे में तमाम तरह के शारीरिक बदलाव भी आते हैं जो साफ संकेत देती हैं कि बच्चा नशे की गिरफ्त में जा रहा है।

ये हैं खतरे के संकेत

- पैसे की डिमांड करना

- आंखे लाल रहना

- चिडचिड़ापन आना

- किसी से बात न करना

- गुमशुम रहना

- पढ़ाई पर ध्यान न देना

- बात-बात पर लड़ना

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अब तक पकड़ी गई नशे की खेप

साल चरस स्मैक डोडा नशीली गोलियां नशीले इंजेक्शन कैप्सूल ब्राउनशूगर

ख्0क्फ् 9क् किलो क्.भ् किलो 8 किलो ब्,8फ्ख् म्फ्फ् क्ख्,7म्8 ख्77 ग्राम

ख्0क्ब् क्म् किलो ख्.फ्भ् ग्राम --- 90,ब्भ्फ् क्क्फ् --- ----

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यहां से आता है नशा

पुलिस सूत्रों की मानें तो हाईप्रोफाइल नशा स्मैक, ब्राउन शूगर की सप्लाई यूपी से राजधानी में हो रही है। जबकि मोरी ब्लॉक के साथ जौनसार बावर से चरस राजधानी में पहुंच रहा है। नशीली दवाईयां यूपी के बरेली से दून में पहुंच रही है। सारा काम प्लांड वे में चलता है। नशे के असल सौदागर अपने अड्डे पर ही बैठे रहते हैं, वे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चंद पैसों का लालच देकर नशा के देहरादून तक पहुंचाने का जिम्मा देते हैं। कुछ लोग पैसे के लिए यह काम करते हैं तो कुछ नशे की खातिर इसे करने को तैयार हो जाते हैं।

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एसटीएफ भी सतर्क

ऐसा नहीं है कि मात्र पुलिस ही नशे के धंधेबाजों पर अंकुश लगाने का काम रही हो, एसटीएफ भी इस काम में लगी हुई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अब तक एसटीएफ ने नशे की बड़ी खेप के साथ क्ब् लोगों को पकड़ चुकी है। अभियुक्तों से क्8 किलो चरस व क्00 ग्राम स्मैक बरामद की गई है।

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नशे के नेक्सेस को तोड़ने के लिए पुलिस प्रयासरत है। इस बावत सभी सीओ, एसओ व चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं।

-अजय रौतेला, एसएसपी


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