बारिश के बाद अब डराने लगे जर्जर पोल

2019-07-18T06:00:28Z

बिजली के विलेन

- कभी भी गिर सकते हैं ये जर्जर पोल

- बिजली निगम के तमाम प्रयास के बाद भी नहीं बदले गए बिजली के पोल

GORAKHPUR: शहर में भीषण बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। आए दिन किसी न किसी वजह से लोगों को बिजली कटौती से दो-चार होना पड़ता है। मगर प्रॉब्लम जिम्मेदारों तक पहुंचने के बाद भी सॉल्युशन नहीं मिल पाता। इसकी कुछ वजह है, जिनकी अनदेखी लोगों के चैनो-सुकून पर भारी पड़ रही है। इस सीरीज में अगर कोई सबसे बड़ा विलेन है, वह है जर्जर पोल। हल्की सी आंधी में भी यह लोगों को घंटों का दर्द दे देते हैं, लेकिन सबकुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार कोई ठोस कदम नहीं उठाते।

जान के लिए भी खतरा

इसे विभाग की लापरवाही कहा जाए या फिर अनसुनी। शहर के कई ऐसे इलाके हैं, जहां बिजली के जर्जर पोल आम लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। बिजली के लोहे वाले पाले नीचे से खोखले हो गए हैं। तेज हवा या आंधी चलने पर वे कुछ गिर चुके हैं और बड़ी तादाद में यह पोल गिरने के कगार पर हैं। यह कभी भी घंटों के लिए लोगों को परेशान करने के लिए काफी हैं। ऐसे ही बिजली के पोल असुरन चौराहे के थोड़े आगे, विश्वविद्यालय चौराहा, बेतियहाता आदि विभिन्न इलाके के पास भी हैं। इलाके के लोगों ने इस बावत जिम्मेदार अफसरों से कई बार शिकायत हुई। विभाग के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना भी किया, लेकिन अब जक ऐसे जीर्ण-शीर्ण बिजली पोल के सुधार नहीं हो पाया है।

शहर में आठ हजार जर्जर पोल

शहर में यूं तो बिजली के पोल रोशनी के लिए लगाए गए हैं। लेकिन करीब आठ हजार जर्जर पोल लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। अगर किसी दुर्घटना में यह पोल गिर गए तो कई घरों में अंधेरा तो छा ही जाएगा, वहीं कई लोगों की जान भी जा सकती है। हैरानी की बात यह है कि शहर के कुल 80 हजार पोल में करीब 30 हजार पोल एक साल पहले ही जर्जर करार दिए जा चुके हैं, इन्हें बदलने का प्रस्ताव एक साल पहले ही भेजा गया, लेकिन मात्र 22 हजार पोल बदले जा सके। अभी भी आठ हजार पोल शहर की गलियों में आने-जाने वाले लोगों को डरा रहे हैं।

जुगाड़ से खड़े हैं पोल

इस बार में एक जूनियर इंजीनियर का कहना है कि कोई भी पोल अगर जंग लगने के कारण नीचे से कमजोर हो जाता है, तो उसकों एक बार मरम्मत करके सपोर्टर लगाने का नियम है। लेकिन कई पोल ऐसे हैं, जिनमें दो-तीन बार सपोर्टर लगाया गया है और वह अब पूरी तरह से झड़ चुके हैं। इसके अलावा पोल लगाते समय चार फीट तक सीमेंटेड करना होता है, लेकिन यह काम सिर्फ मुख्य सड़कों पर ही किया जा रहा है। अंदर की गलियों में चेंबर नहीं बनता है। जुगाड़ तकनीक से जैसे-तैसे पोल जमीन पर खड़े तो हैं लेकिन यह बिजली के तारों का बोझ कब तक संभाल पाएंगे, कहना मुश्किल हैं।

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पोल की उम्र

एसटीपी (स्टील टूब्यलर पोल) -15 से 20 साल

रेल पोल--50 साल

ईसीसी पोल--70 से 80 साल

(गोरखपुर में सबसे अधिक पोल एसटीपी वाले है)

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यह केवल शहर के कई इलाकों का मामला है। शहर के कई इलाकों में बिजली के बदहाल पोलों की स्थिति देखी जा सकती है। विभाग सुध लेने का नाम नहीं ले रहा है।

बृजेश शुक्ला, गोरखनाथ

इलाके में बिजली के जीर्ण-शीर्ण पोल की वजह से कई बार बिजली कटौती हो जाती है। कई बार शिकायत की जा चुकी है। लेकिन विभाग सुनने को तैयार नहीं है।

अरविंद पांडेय, शास्त्री नगर

बच्चों को खेलने में डर लगता है। कब बिजली का पोल गिर जाए, पोल के अगल-बगल से भी गुजरने में हर वक्त डर का माहौल बना रहता है।

पवन शर्मा, दीवान बाजार

कुछ पोल स्काडा योजना के तहत बदले गए हैं। कुछ पोल तकनीकी कारणों से इस योजना में शामिल नहीं किए गए हैं। यदि जर्जर पोल हैं तो उन्हें चिन्हित कर जल्द ही बदला जाएगा।

उमेश चंद वर्मा, एसई, महानगर विद्युत वितरण निगम


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