मिड डे मील के आंकड़े न देने पर शासन सख्त

2018-12-31T06:00:06Z

5 महीने बीतने के बाद भी नहीं जारी किए डाटा

मिड डे मील विभाग नहीं दे रहा आंकड़े, शासन ने तलब की रिपोर्ट

Meerut। एक तरफ जहां बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलों में मिड डे मील प्रोवाइड करने में आंखें तरेर रहा है। वहीं शासन को योजना के आंकड़े देने में भी पूरी तरह से आनाकानी कर रहा हैं। हालत यह है कि पांच माह बीतने के बाद भी विभाग ने शासन को शत-प्रतिशत रिपोर्ट देने की जहमत नहीं उठा रहा है। मात्र 68 प्रतिशत रिपोर्ट देकर विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस संबंध में शासन ने एक फिर इस संबंध में रिपोर्ट तलब की है।

यह है मामला

सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों मे पढ़ने वाले पहली से आठवीं तक के बच्चों को स्कूल में निशुल्क खाना देने का प्रावधान है। इसकी मॉनिटरिंग शासन लेवल से की जाती है। जिसके मददेनजर विभाग को टीआरजीएमडीएम.एनआईसी। इन पोर्टल पर वार्षिक और मासिक रिपोर्ट देनी होती है। इस रिपोर्ट का विश्लेषण कर केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है। लेकिन जिले में इस पोर्टल पर रेग्यूलर डाटा अपलोड नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि मार्च के बाद डाटा अपलोड ही नहीं किया गया हैं।

अगस्त तक देना था रिकार्ड

मिड डे मील की प्रभारी निदेशक मुमताज अहमद की ओर से सभी जिलों के बीएसए को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए थे, जिसके तहत विभाग को 5 अगस्त तक का समय डाटा अपलोड करने के लिए दिया गया था। लेकिन दिसंबर बीतने को है और विभाग ने पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं किया है। इस संबंध में शासन ने विभाग ने निर्देशों की अवहेलना किए जाने को लेकर जवाब तलबी की है।

रिपोर्ट अपलोड करने के लिए हमारे पास पर्याप्त कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं हैं। बीआरसी पर इंटरनेट की व्यवस्था नहीं हैं, कहीं कंप्यूटर भी नहीं हैं। शासन की ओर से इसका कोई बजट भी नहीं दिया गया है।

वीरेंद्र कुमार, मंडलीय समन्वयक, मिड डे मील


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