सेवायोजन का 'समायोजन'

2019-02-07T06:00:33Z

- स्थायी निवासी ही दें सकेंगे समूह ग की परीक्षा, राज्य के बेरोजगारों को मिली बड़ी राहत

- बुधवार को सचिवालय में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक

DEHRADUN: राज्य सरकार ने समूह-ग के सीधी भर्ती के पदों पर राज्य के स्थायी निवासियों को वरीयता देने का निर्णय लिया है। सरकारी सेवाओं में समूह-ग की सीधी भर्तियों में सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण की शर्त हटा दी गई है। सेवायोजन का समायोजन होने से बेरोजगार युवाओं को बड़ी राहत मिली है। अब समूह ग के लिए वही युवा पात्र होंगे, जिन्होंने हाईस्कूल और इंटर या इनके समकक्ष स्तर की शिक्षा राज्य के मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थानों से ली है।

युवा बेरोजगारों को राहत

बुधवार को सचिवालय में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। जिसमें युवाओं, किसानों और कारोबारियों को सरकार ने तोहफा दिया। बैठक में तकरीबन 17 बिंदुओं पर निर्णय लिए गए। विधानसभा के बजट सत्र की अधिसूचना जारी होने की वजह से फैसलों की ब्रीफिंग नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल ने सरकारी सेवाओं में समूह-ग की सीधी भर्ती में राज्य के स्थायी निवासी युवाओं को वरीयता देने को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परिधि के अंतर्गत तथा बाहर समूह-ग के सीधी भर्ती के पदों के लिए अनिवार्य-वांछनीय (तृतीय संशोधन) नियमावली को मंजूरी दी। राज्य सरकार ने स्थानीय युवाओं को समूह-ग भर्ती में वरीयता देने को सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण का प्रावधान किया था। हाईकोर्ट ने इस प्रावधान को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश से सरकार की दुविधा बढ़ी हुई थी। रोजगार के मौके में कमी के विरोध को लेकर गठित अलग राज्य उत्तराखंड में युवा उक्त प्रावधान हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। सरकार ने इस संबंध में पलायन आयोग से भी सुझाव मांगा था। आयोग ने पलायन से खाली हो रहे गांवों का उल्लेख करते हुए राज्य के युवाओं के लिए आजीविका के स्रोत और गुणवत्तापरक शिक्षा की कमी को रेखांकित करते हुए रोजगार के मौके सृजित किए जाने की सिफारिश की थी।


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