बंदरों के आतंक के आगे 'सरकार' सरेंडर

2020-01-17T05:30:56Z

- नगर निगम और वन विभाग ने ही बंदर पकड़ने से किया इनकार

- आईजीआरएस पोर्टल पर दो बार कंप्लेन करने पर भी नहीं मिली राहत

केस:-1: बंदरों के डर से छत से गिरी युवती की मौत

14 जनवरी 2020 को रजऊ परसपुर निवासी मिथलेश घर की छत पर कपड़े सुखाने के लिए गई थी। तभी छत पर बैठे बंदरों के झूंड ने हमला कर दिया। जिससे वह छत से नीचे आ गिरी और घायल हो गई। परिजन यल हालत में मिथलेश को हॉस्पिटल ले गए। जहां पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

केस::-2

29 मार्च 2019 को शहर के शाहबाद मोहल्ला निवासी जिया उर्ररहमान उर्फ बब्लू घर की छत पर कबूतरों को दाना डालने के लिए गए थे। बब्लू नगर निगम में क्लर्क थे। जैसे ही वह छत पर पहुंचे तभी ने हमला कर दिया। बंदरों से बचने के लिए भागे तो वह छत से आंगन में जा गिरें। जिससे वह घायल हो गए। परिजन उन्हें हॉस्पिटल ले गए जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

बरेली : शहर में अभी हाल ही में बंदरों के हमले में दो लोगों की मौत हो गई जबकि डेली करीब एक दर्जन लोग घायल हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकारी अमला बेफिक्र है। हकीकत यह है कि बंदरों के आतंक के आगे सरकारी डिपार्टमेंट ने सरेंडर कर दिया है। यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि इसका खुलासा आईजीआरएस पोर्टल में की गई कंप्लेन से हुआ है। जिसमें वन विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बंदर पकड़ना उनका काम नहीं, नगर निगम पकड़ेगा। वहीं नगर निगम ने टेंडर न लेने का बहाना बना दिया। जिससे बरेलियंस बंदरों को आतंक सहने को मजबूर हैं।

नगर निगम का बताया काम

अगस्त 2019 में शहर के रोहली टोला निवासी अमन सिंह ने आईजीआरएस पोर्टल पर कंप्लेन की थी। जिसमें उन्होंने कहा कि वार्ड संख्या 53 में बंदरों का आंतक ज्यादा है, इन्हें पकड़वाया जाए। वहीं इसकी शिकायत वन विभाग से भी की। जिस पर वन विभाग ने जवाब दिया कि इसके लिए न तो उनके पास बजट है और न ही यह काम उनका है। यह जिम्मेदारी नगर निगम की है।

अभी पकड़े जा रहे बंदर

परेशान होकर अमन सिंह ने फिर 17 दिसम्बर 2019 को नगर निगम में शिकायत की, जिस पर नगर निगम ने आख्या रिपोर्ट में रिप्लाई दिया कि नगर निगम में अभी कोई बंदर पकड़ने के लिए अभियान नहीं चलाया जा रहा है, जब अभियान चलाया जाएगा तो उनकी समस्या दूर की जाएगी।

किसी ने नहीं लिया टेंडर

नगर निगम ने 2019 में बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर मांगे गए थे लेकिन इस टेंडर के लिए किसी एजेंसी ने अप्लाई नहीं किया। यही कारण रहा कि नगर निगम की ओर से बंदरों को पकड़वाने के लिए अभियान नहीं चल सका।

घरों में कैद रहते बच्चे

बंदरों से बचने के लिए अलग-अलग तरह के तरीके ढूंढे जा रहे हैं। किसी ने छत पर जाल लगा लिया है, तो किसी ने छज्जे को कवर किया है। बंदर सड़कों और गलियों में झुंड बनाकर घूमते हैं। इससे पैदल चलने वालों को काफी मुश्किल हो रही है और यह मुश्किल हल होती भी नहीं दिख रही है।

इन एरिया में आतंक ज्यादा

राजेन्द्र नगर, संजय नगर, बिहारीपुर, मलूकपुर, गांधी नगर, जखीरा, किला, कोतवाली, सीबीगंज, रेलवे जंक्शन, कलेक्ट्रेट, तहसील सदर, सुभाषगनर, शांति विहार, बारादरी, कुतुबखाना, सिटी रेलवे स्टेशन, मढ़ीनाथ, नगर निगम कार्यालय परिसर, सिविल लाइंस, रामपुर गार्डन, गांधी उद्यान, पुराना रोडवेज, पुराना शहर, कांकर टोला, दुर्गा नगर, कांकर टोला।

साल 2019 में बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया निकाली गई थी। लेकिन कोई टेंडर नहीं आया। जिस कारण बंदरों के पकड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।

संजीव प्रधान, पर्यावरण अभियंता नगर निगम

- बंदर पकड़वाने का काम नगर निगम का है। वन विभाग के पास बंदर आदि पकड़वाने के लिए कोई बजट भी अलग से इश्यू नहीं होता है, इसीलिए बंदरों को पकड़वाने का काम नगर निगम का ही है।

भारत लाल, डीएफओ

- शहर में बंदरों के आंतक से नगर निगम कर्मी की जान तक चली गई। लेकिन इसके बाद भी बंदरों को पकड़वाने के लिए नगर निगम के पास कोई प्लान ही नहीं है। ऐसे में बरेलियंस परेशान हो रहे हैं।

प्रीती

नगर निगम को चाहिए कि बंदरों को पकड़वाकर शहर से बाहर जंगल में छुड़वाएं, ताकि बरेलियंस को राहत मिल सके। बंदरों का आतंक इतना ज्यादा हो गया है कि छत पर भी लोगों को जाने से डर लगता है।

सुमित


Posted By: Inextlive

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