जीपीएस 'फेल' और फिर शुरू 'खेल'

2019-02-22T06:00:21Z

आई एक्सक्लूसिव

-एक साल में ही बंद हो गया 80 कूड़ा गाडि़यों में लगा जीपीएस सिस्टम

-डीजल चोरी रोकने के लिए लगा था जीपीएस, मॉनिटरिंग भी हुई बंद

-30 करोड़ रखा गया डीजल का बजट, इस बार खर्च हुआ 19 करोड़

KANPUR@inext.co.in

KANPUR : शहर में सफाई व्यवस्था की लचर स्थिति अब भी बरकरार है, लेकिन खर्च के आंकड़ों में लगातार बढ़ोत्तरी जारी है। नगर निगम द्वारा संचालित कूड़ा वाहनों में डीजल का खेल जगजाहिर है। इस पर लगाम कसने के लिए 80 कूड़ा वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगाया गया था। इसकी वजह से लगभग 2 करोड़ रुपए के डीजल की बचत हुई थी। लेकिन जीपीएस लगाने वाली कंपनी से करार खत्म होने के बाद रिन्यूवल नहीं किया गया। जिससे डीजल चोरी का खेल फिर से शुरू हो चुका है। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के रीडर्स ने कानपुर कॉलिंग पर शिकायत की, जिसके बाद रिपोर्टर ने मामले की पड़ताल की।

इस तरह होता है खेल

नगर निगम रबिश विभाग के प्रभारी रहमान के मुताबिक शहर के सभी 183 कूड़ा घरों से सुबह कूड़ा उठान किया जाता है। कूड़ा घर अधिक और ट्रक कम होने की वजह से लगभग सभी गाडि़यां 2 से 3 चक्कर भौंती स्थित डंपिंग ग्राउंड कूड़ा डालने जाती हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक ट्रक ड्राइवर डीजल बचाने के लिए ट्रकों में क्षमता से अधिक कूड़ा भरते हैं। हाईवे पर कई स्थानों पर डीजल बचाने के लिए मेहरबान सिंह का पुरवा के आगे चोरी-छिपे कूड़ा फेंक दिया जाता है।

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नहीं शुरू हुई जीपीएस ट्रैकिंग

नवंबर-2017 में तत्कालीन नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने डीजल चोरी रोकने के लिए सभी 80 कूड़ा गाडि़यों में जीपीएस सिस्टम लगवाया था। एक साल के अंदर ही यह खराब कर दिए गए और जी-ट्रैक कंपनी से नवंबर-18 में लाइसेंस भी रिन्यूवल नहीं किया गया। इसके अलावा नई कंपनी एनएनआई सिक्योर जीपीएस ट्रैकिंग सॉल्यूशंस को काम दिया गया, लेकिन कंपनी ने कार्य शुरू ही नहीं किया। इसकी वजह से डीजल चोरी का खेल फिर से शुरू हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक अभी सिर्फ 50 गाडि़यों में जीपीएस लगा है, लेकिन कार्य नहीं कर रहा है।

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अब कोई भी नहीं देख सकता

जब जीपीएस सिस्टम को शुरू किया गया था। कूड़ा गाडि़यों की कोई भी व्यक्ति लोकेशन देख सकता था। इसके लिए नगर निगम की ऑफिशियल वेबसाइट पर वेब लिंक भी दिया गया था। क्लिक करने पर सभी 6 जोन में संचालित कूड़ा गाडि़यों की लोकेशन देखी जा सकती थी। वेबसाइट पर इस लिंक पर सिर्फ ब्लैंक पेज खुलता है।

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एक नजर में डीजल खर्च

निधि 2017-18 2018-19 जनवरी तक 2019-20

एसबीएम 9.42 करोड़ 20 करोड़ 8.42 करोड़ 20 करोड़

नगर निगम निधि 19.81 करोड़ 26 करोड़ 14.48 करोड़ 10 करोड़

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इन कूड़ा गाडि़यों में होता है खर्च

कूड़ा ढोने वाले ट्रक -- 42

नए कूड़ा ट्रक खरीदे गए--12

टाटा एस ट्रक -- 45

नए टाटा एस ट्रक खरीदे गए-- 30

जेसीबी-- 9

लोडर-- 7

बड़े डंपर-- 6

छोटे डंपर-- 11

माइक्रो डंपर-- 4

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सफाई उपकरणों की कुल संख्या

मैकेनिकल उपकरण-- 188

मैनुवल उपकरण-- 7500

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फरवरी तक खराब पड़े

मैकेनिकल उपकरण-- 39

मैनुवल उपकरण-- 10

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स्वच्छ भारत मिशन से 20 करोड़ और नगर निगम निधि से 10 करोड़ का बजट 2019-20 फाइनेंशियल बजट में रखा गया है। नेक्स्ट फाइनेंशियल ईयर में दर्जनों कूड़ा गाडि़यां खरीदी जानी है और डीजल के रेट बढ़ने की वजह से बजट बढ़ाया गया है। कूड़ा गाडि़यों की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। जीपीएस सिस्टम पर कार्य चल रहा है। जल्द ही इसे फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

-डा। अमित सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम।

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जीपीएस सिस्टम क्यों कार्य नहीं कर रहा है। इसमें क्या खराबी है, इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। डीजल चोरी किसी भी स्थिति में नहीं होने दी जाएगी। प्रत्येक कूड़ा गाड़ी की मॉनिटरिंग की जाएगी।

-संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त।


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