Greenery In Danger Zone

2012-06-17T18:12:07Z

PATNA शहर की ग्रीनरी डेंजरस प्वाइंट को क्रॉस कर चुकी है जहां देखो वहीं पेड़ काटे जा रहे हैं जहां कल तक हरीभरी 'बगिया' लगी थी वहां आलीशान 'बंगले' बनाए जा रहे हैं

अपार्टमेंट कल्चर और हाईटेक होने की हसरत ने 'जिंदगी' को खतरे में डाल दिया है. हां, रह-रह कर इस ग्रीनरी को बचाने की मुहिम शुरू की जाती है और ऐसे अभियान में लगाए जाते हैं यूकिलिप्टस के पौधे, जिसका कोई फायदा नहीं. अगर आपसे पूछें कि पेड़ के बिना जिंदगी चल सकती है, तो आप तुरंत बोलेंगे बिलकुल नहीं. पर, अगर हम आपसे ये पूछें कि आपने कभी पेड़ लगाया है, तो आपके पास ढेर सारे जवाब होंगे. टाइम नहीं मिला, जगह नहीं मिली, वगैरह-वगैरह. यह समझ से परे है कि जब सबको पता है कि ग्रीनरी के बिना लाइफ इंपॉसिबल है, तो फिर लगातार पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं? जिस पौधे को पेड़ बनने में 20 से 50 साल लग जाते हैं, उन्हें एक दिन में गिरा दिया जाता है. फलदार और छायादार पेड़ को भी नहीं बख्शा जा रहा है. इसके खिलाफ कोई आवाज बुलंद क्यों नहीं करता? क्यों नहीं, पेड़े काटे जाने के खिलाफ जगह-जगह धरना-प्रदर्शन होते हैं?

दूधिया मालदह को तरसेंगे 
दीघा में दूधिया मालदह के हजारों पेड़ थे, पर अब इसमें से आधे भी नहीं बचे हैं. यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो नेक्स्ट जेनरेशन दूधिया मालदह के लिए तरसेगा. आम के बगीचे में कचरा भरा जा रहा है और फिर हरे-भरे पेड़ काटे जा रहा हैं.

कटे पेड़ से दिखेगी 'प्रकृति'
पार्क के नाम पर भी शहर में पेड़ काटे जा रहे हैं. यह कैसा मजाक है? एक तरफ तो गवर्नमेंट पार्क बनवा रही है, वहीं दूसरी ओर पेड़ काटे जा रहे हैं. कंकड़बाग एरिया स्थित एक पार्क के इस पेड़ को ही लीजिए. एक बड़े पेड़ को काटकर इसे प्रदर्शनी के तौर डेवलप किया गया है. 

पेड़ पर बन रहे अपार्टमेंट!
पटना कंक्रीट के शहर में तब्दील होते जा रहा है. यहां सबसे अधिक अपार्टमेंट के लिए पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है. शहर में जमीन काफी महंगी हो गई है. अपार्टमेंट से बेहतर रिटर्न को देखते हुए लोग पेड़ को भी नहीं बख्श रहे हैं. लोग अपने हाथों ही पेड़ काटकर फ्यूचर बर्बाद कर रहे हैं. 

बगीचा बन गया कचरा डंपिंग यार्ड
दीघा के दूधिया मालदह आम के बगीचे को पहले कचरा डंपिंग यार्ड बना दिया गया है. यहां शहर के सारे कचरे डाले जा रहे हैं, फिर आम के पेड़ को काट दिया जाता है. प्राइवेट जमीन होने के कारण कोई भी कुछ नहीं बोल पाता, पर क्या इन बागीचों में कचरा डालना जायज है?

वो 'घर' आपका नहीं
थोड़ा एफर्ट लगाकर आप पेड़ बचा सकते हैं. इसके लिए ऐसा नहीं है कि अपार्टमेंट बने ही नहीं. हां, नक्शे में हेर-फेर कर बड़े-बड़े पेड़ को बचाया जा सकता है. आपसे एक गुजारिश है कि सड़क के किनारे पेड़ कटता देखें, तो उसका विरोध करें. अपार्टमेंट में पेड़-पौधे ना हो, तो वहां फ्लैट नहीं खरीदे. बिल्डर्स अपने आप पेड़ लगवाने लगेंगे.

आप भी कुछ करिये
एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर जू में करीब तीन हजार पेड़ काटने का फरमान जारी किया गया था. तरुमित्रा के बच्चों ने कट रहे पेड़ को बचा लिया. उन बच्चों ने पेड़ काटने वाले को किसी तरह भगा दिया. जहां नहीं भाग रहे थे, तो बच्चे पेड़ पर चढ़ जा रहे थे. उनका एक ही नारा था, पहले हमें मारो, फिर पेड़ को. इस तरह बड़ी संख्या में पेड़ को बचा लिया गया. जब बच्चे ऐसा कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?

प्राइवेट जमीन में पेड़ काटने पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है, पर कटे पेड़ के ट्रांसपोर्टेशन के लिए हमसे परमिशन लेनी होगी. सरकारी जमीन में पेड़ काटने पर रिलेटेड डिपार्टमेंट जिम्मेवार होता है. उनके खिलाफ मुकदमा भी चल सकता है.
संजय कुमार सिन्हा, डीएफओ.



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