हैकर्स का खेल मांग रहे डिटेल

2018-12-01T06:00:49Z

एसबीआई के डेबिट कार्ड बदलने का फायदा उठा रहे हैकर्स

साइबर सेल का अलर्ट, ऐसी कॉल से रहें सावधान

Meerut । सावधान, अगर आपके पास एसबीआई के डेबिट कार्ड बदलने के लिए फोन या ईमेल पर ऑनलाइन फार्म भरने के लिए कॉल आए तो समझ लीजिए, हैकर्स की आपके अकाउंट पर नजर है। यही नहीं, फॉर्म भरते ही कुछ ही सेकेंड पर आपका अकाउंट खाली हाे जाएगा।

न दें कोई इनफॉर्मेशन

एसपी क्राइम डॉ। बीपी अशोक ने बताया कि साइबर हैकरों ने अब नया तरीका निकाला है। बैंक के डेबिट कार्ड बनाने के नाम पर वे ग्राहकों को ठग रहे हैं। इसके लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है। लोगों से अपील है कि बैंक के नाम पर आने वाली ऐसी किसी भी कॉल पर भरोसा न करें और पर्सनल जानकारी शेयर न करें,कॉल संदिग्ध लगने पर पुलिस को सूचित करें।

बैंक नहीं मांगते ओटीपी

एसबीआई के रीजनल मैनेजर शीलधर ने बताया कि बैंक ग्राहकों को एसएमएस द्वारा उनके मोबाइल नंबर व उनकी ईमेल पर सूचनाएं देते हैं। ग्राहक बैंक के डेबिट कार्ड, ओटीपी नंबर किसी को शेयर न करे। बैंक किसी भी ग्राहक को फोन करके उनके ओटीपी की जानकारी नहीं मांगता है।

बन रहे नए कार्ड

गौरतलब है कि एसबीआई यानि भारतीय स्टेट बैंक पिछले बीते दो महीनों से ग्राहकों के पुराने डेबिट कार्ड बदलकर नए डेबिट कार्ड इश्यू कर रहा है, लेकिन ये एटीएम कार्ड सीधे ग्राहकों के एड्रेस पर पहुंचाए जा रहे हैं। बस इसी योजना का फायदा साइबर हैकर्स उठा रहे हैं। और लोगों से फोनकर करके जानकारी हासिल कर रहे हैं।

ऑनलाइन फॉर्म का झांसा

साइबर हैकरों ने बैंकों में सेंधमारी करके बैंक ग्राहकों के नंबर व ई मेल आईडी खंगाली है। इसके बाद उन नंबरों पर हैकर्स, व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिए ऑनलाइन डेबिट कार्ड बनवाने का झांसा देते हैं। उस फॉर्म पर उनके पुराने एटीएम की डिटेल भरवाने के लिए कहा जाता है। इसके बाद जैसे ही ग्राहक इस तरह के ऑनलाइन फॉर्म पर डिटेल भरते हैं तो हैकर्स एटीएम कार्ड एक्टिवेट करने के बहाने ओटीपी भी पूछ लेते हैं। इसके बाद हैकर्स अकाउंट में चपत लगा देते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

बैंक की ओर से किसी भी अकाउंट होल्डर को फोन नहीं किया जाता है।

समय-समय पर पिन नंबर को चेंज करते रहें

लकी ड्रॉ का विनर बताकर भी क्रिमिनल फोन कर सकते हैं।

इस तरीके से आने वाली कॉल्स को रिसीव करने से बचें

मोबाइल पर ओटीपी आने पर किसी को शेयर न करे।

सेलफोन में किसी प्रकार के ऐप को डाउनलोड करने से पहले ट‌र्म्स एंड कंडीशन को पढ़ लें।

ये सावधानी जरूरी

अगर आपका खाता फोन से लिंक है तो फोन में लॉक लगा दें

जिस स्मार्ट फोन से मोबाइल बैंकिंग करते हैं उसका सिम बंद होता है तो सर्विस प्रोवाइडर को इसकी जानकारी दें।

ई वॉलेट से खाता लिंक्ड है तो मोबाइल में ऐप लॉक जरूर रखें और पासवर्ड भी बदलते रहें

फोन पर अकाउंट नंबर, पिन या सीवीवी नंबर पूछने वालों से सावधान रहें।

ये हैं चर्चित केस

9 नवंबर - 2018

सांसद राजेंद्र अग्रवाल को एक साइबर ठग ने फोन करके उनसे एटीएम कार्ड की डिटेल मांगी। कॉल संदिग्ध लगने पर सांसद ने मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

7 सितंबर 2017

साइबर सेल में एब्लेज इंफो सॉल्यूशन कंपनी के खिलाफ 37 अरब का ऑनलाइन ठगी का मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें कंपनी मालिक व मेरठ निवासी अनुराग गर्ग को पुलिस पकड़ चुकी है। इसके साथ पांच अन्य आरोपी भी जेल में है, जिसमें 180 लोगों ने मुकदमा दर्ज कराया था।

29 नवंबर 2017

हैकर्स ने तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी का भी फर्जी फेसबुक पर पेज बना दिया था। साइबर सेल में मुकदमा दर्ज हुआ था। अभी भी इस मामले की जांच पेंडिग में है।

2 अक्टूबर 2017

दो अक्टूबर को एसएसपी के पीआरओ ग्रुप में एक युवक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आपत्तिजनक वीडियो सेंड कर दिया था, जिसमें तत्कालीन एसएसपी मंजिल ने आरोपी युवक के खिलाफ साइबर सेल में मुकदमा दर्ज कराया था।


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