5 आसान तरीके, धरती को रखे clean and green

Updated Date: Fri, 05 Jun 2015 03:17 PM (IST)

इस वर्ल्‍ड एनवायरमेंट डे पर आइए आसपास स्‍वच्‍छता को कायम रखने के लिए सबसे पहले किसी भी बड़े वादे को जरा खुद से दूर रख देते हैं। इसके बजाए फोकस करते हैं अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पांच छोटे लेकिन महत्‍वपूर्ण ऐसे बदलावों पर जो आसपास के प्रदूषण को कम करता है और वातावरण को स्‍वच्‍छ रखने में हमारी मदद करता है।

1- ये खाद ड्रम हैं बेहद कमाल
मुंबई के बांद्रा इलाके में कुछ परिवारों ने आपस में मिलकर वेस्ट मैनेजमेंट और अपसाइकलिंग स्टोर का एक खास जुगाड़ निकाला है। इन परिवारों ने खुद ही कुछ ड्रमों का इंतजाम किया। ये ड्रम कोई आम कूड़े वाले ड्रम नहीं है। ये हैं खास खाद ड्रम। इन ड्रमों को बिल्डिंग कम्पाउंड में ही लगवाया गया। ड्रमों में घरों से निकलने वाले गीले और सूख्ो दोनों तरह के कूड़े डालने थे। गीले कूड़े को अलग ड्रम में और सूखे कूड़े को अलग ड्रम में। इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहरायया जाता है। महीने के आखिर में आपको ड्रमों में इकट्ठा कूड़ा खाद बनकर मिलेगा। अब कूड़े से बनी इस खाद को घरों में पेड़-पौधे उगाने के काम लाया जाता है। ये ड्रम 100 लीटर के होते हैं, जिनका इस्तेमाल 10 से 12 परिवार करते हैं।
ये प्रक्रिया चलाई जाती है : Dirt, Belvedere building,18, Rebello Road, opposite Supari Talao ground, Bandra (W) में।
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2- इन बायोगार्बेजल प्लास्टिक बैग का करें इस्तेमाल
बृहन्मुंबई नगर निगम की ओर से जारी की गई 2014 एन्वायरमेंट स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में हर रोज प्लास्टिक का करीब 700 MT कचरा कूड़ेघरों में फेंका जाता है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि लाख कोशिशों के बाद भी प्लास्टिक बैग्स पर पूरी तरह से बैन नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में मुंबई में इन प्लास्टिक बैग्स के कचरे को भी खाद में बदला जाता है। शहर की ही एक कंपनी Lucro अपने खास प्लास्टिक बैग्स के कचरे को खाद में बदलने का काम Eco Pro ब्रांड के अंतर्गत करती है।

कैसे करें इस्तेमाल : इन नट्स वाले साबुन को मलमल के बैग में रखें। जब भी कपड़ों को धोना हो तो इसे निकाल कर इस्तेमाल करें और वापस इसी में रख दें।

कीमत : नट सोप की कीमत 120 से 140 रुपये प्रति किलो है। रीठा पाउडर की इटरनल इंडिया की ओर से 290 से 400 रुपये प्रति ग्राम।
इसके लिए आप लॉग इन कर सकते हैं : Krya.in (reetha powder)
4 - ई-वेस्ट को जिम्मेदारी के साथ री-साइकिल करवाएं
री-साइकिल ही क्यों। हममें से कइयों के लिए री-साइकिल का मतलब होता है चीजों को पूरी तरह से खत्म कर देना। इनमें बॉटल्स, अखबार और बिजली के कई सामान आते हैं। री-साइकिल का पूरी तरह से ये मतलब नहीं है। पुराने इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल आइटम जैसे PC, लैपटॉप, टीवी, मौनिटर्स और अलग-अलग तरह के गैजेट्स। इन सबको ई-वेस्ट कहते हैं। इन चीजों को अगर सही से डिस्पोज नहीं किया गया, तो ये हमारे स्वास्थ्य और वातावरण्ा के लिए काफी खतरनाक होते हैं। कुछ ऐसे आइटम जैसे CRT मॉनिटर्स और बैट्रीस में टॉक्सिक और पारा, सीसा, कैडमियम और क्रोमियम जैसे खतरनाक पदार्थ होते हैं। ये धरती के नीचे पानी, वातावरण और इंसानों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करने में असरकारक होते हैं। यूनाइटेड नेशन्स एन्वायरमेंट प्रोग्राम की ओर से हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे ज्यादा ई-वेस्ट इकट्ठा करने वाले देशों की श्रेणी में पांचवे नंबर पर आता है। एक अन्य रिपोर्ट में भारत के अंदर मुंबई में सबसे ज्यादा ई-वेस्ट होता है. ऐसे में अब अगर आपके पास कोई खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान हो, तो अपनी जिम्मेदारी समझिए और उसे री-साइकिल करवाइए।     
कैसे करें री-साइकिल
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के कुछ कॉम्पोनेंट्स ऐसे होते हैं, जिन्हें आसानी री-साइकिल किया जा सकता है, अगर उन्हें सही व्यक्ति के हाथ में दे दें। इसके लिए लाइसेंस धारी ई-वेस्ट डिस्मेंटलर या री-साइकलर से सम्पर्क किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर कर्मा री-साइकलिंग को। इन खराब चीजों को इन्हें देकर इसके बदले आपको भुगतान भी किया जाएगा। इसके अलावा आप मैन्यूफैक्चरर से आप अपने डिवाइस को सही करके वापस देने को भी कह सकते हैं।

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Posted By: Ruchi D Sharma
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