जब पहली बार लगे 6 गेंदों पर 6 छक्के जानें क्रिकेट में कैसे हुआ था 'छक्के' का आविष्कार

2019-03-16T10:36:46Z

इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली बार लगातार छह गेंदों पर छह छक्के लगाने का कारनामा आज ही हुआ था। 16 मार्च 2007 को वर्ल्ड कप मैच में साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज हर्शल गिब्स ने नीदरलैंड के खिलाफ ये रिकाॅर्ड बनाया था।

कानपुर। क्रिकेट में लगातार छह गेंदों पर छह छक्के बहुत कम बल्लेबाजों ने लगाए हैं। मगर पहली बार ये कारनामा आज से 12 साल पहले वार्नर पार्क में हुआ था जोकि सबसे छोटा क्रिकेट ग्राउंड माना जाता है। ये मैच साउथ अफ्रीका बनाम नीदरलैंड के बीच खेला गया। जिसमें अफ्रीकी बल्लेबाज हर्शल गिब्स ने नीदरलैंड के पार्ट-टाइम लेग स्पिनर डाॅन वेन बुंगे के एक ओवर में लगातार छह छक्के मारे थे। इसी के साथ गिब्स इंटरनेशनल क्रिकेट में छह गेंदों में छह छक्के मारने वाले पहले बल्लेबाज बने। गिब्स के अलावा सिक्सर किंग नाम से मशहूर भारत के बाएं हाथ के बल्लेबाज युवराज सिंह ने टी-20 इंटरनेशनल में इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में लगातार छह छक्के मारे हैं।

किसने लगाया था पहला इंटरनेशनल सिक्स
वनडे और टी-20 की तुलना में टेस्ट क्रिकेट में चौके-छक्के कम ही देखने को मिलते हैं। क्रिकेट के इस बड़े फार्मेंट में पहला छक्का साल 1898 में एडीलेड ओवल में लगा था। यह मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड के बीच खेला गया था। टेस्ट में पहला सिक्स लगाने वाले बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के जो डार्लिंग हैं। क्रिकइन्फो पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए डार्लिंग के शानदार 178 रन की बदौलत पहली पारी में 573 रन बनाए थे। कंगारु टीम की यह इनिंग पूरी तरह से डार्लिंग के इर्द-गिर्द घूमती रही। डार्लिंग ने इस शतकीय पारी में 26 चौके और तीन छक्के लगाए थे और टेस्ट क्रिकेट में फैंस को पहला सिक्स देखने को मिला।
मैदान के बाहर पहुंचानी पड़ती थी गेंद
19वीं सदी में क्रिकेट में छक्का लगाना आसान नहीं था। उस वक्त बल्लेबाज को छक्का तभी मिलता था जब वह गेंद को मैदान के बाहर पहुंचाए। डार्लिंग ने यह कारनामा मैच में तीन बार किया और उनके खाते में तीन सिक्स आए। इससे पहले टेस्ट क्रिकेट में कभी भी बल्लेबाज के बल्ले से छक्का नहीं निकला था। हालांकि कई मौकों पर अंपायर ने छह रन दिए थे, तब ओवरथ्रो के जरिए ये रन बल्लेबाजी टीम के खाते में आए थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि उस वक्त गेंद को बाउंड्री लाइन के पार पहुंचाने पर सिर्फ पांच रन मिलते थे। छह रन के लिए बल्लेबाज को गेंद मैदान के बाहर भेजनी पड़ती थी।
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