दौराला महायोजना पर हाइकोर्ट की अफसरों को फटकार

2015-04-29T07:02:10Z

-नरेश अग्रवाल की पीआईएल पर विक्रम नाथ की खंडपीठ ने की सुनवाई

-ग्रीन बेल्ट समाप्त करने पर अफसरों से पन्द्रह दिन में मांगा जवाब

Meerut : दौराला महायोजना को लेकर हाइकोर्ट में चल रहे वाद पर मंगलवार को अदालत ने मेरठ विकास प्राधिकरण के अफसरों को कड़ी फटकार लगायी है। ग्रीन वर्ज को लेकर विभागीय शिथिलता पर ऐतराज जताते हुए पन्द्रह दिन में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश गए हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में बिल्डरों की उपस्थिति पर भी कोर्ट ने आपत्ति जतायी।

याचिकाकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश अग्रवाल ने दौराला महायोजना में पूर्व में प्रस्तावित ग्रीन वर्ज पर अफसरों द्वारा मोटी रकम लेकर नक्शे पास करने और अगले प्लान में ग्रीन वर्ज को समाप्त करने को लेकर पीआईएल दाखिल की थी। इसमें प्रमुख सचिव आवास, वीसी एमडीए, कमिश्नर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड, नगर एवं ग्राम नियोजक लखनऊ व संयुक्त नियोजक मेरठ को पार्टी बनाया गया था। मंगलवार को विक्रम नाथ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। नरेश अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार दुबे ने मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने अफसरों पर भ्रष्टाचार समेत जनता के हितों की अनदेखी करने की बात कही। बताया कि इसी मार्ग से रैपिड रेल जानी है, ग्रीन बेल्ट समाप्त कर दिए जाने से पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ेगा।

अदालत ने मामले में अफसरों को फटकार लगायी। कहा कि इतनी बड़ी महायोजना को मजाक बनाकर रखा है, ग्रीन बेल्ट को खत्म कर रहे हो, आखिर क्या कारण है। उन्होंने अफसरों से पन्द्रह दिन में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिए। वहीं इस दौरान बड़ी संख्या में अदालत में बिल्डरों की उपस्थिति पर भी न्यायधीश विक्रम नाथ ने ऐतराज जताया।


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