रोहिंग्या जेनोसाइड पर बनेगी फिल्म

Updated Date: Thu, 28 May 2020 02:46 PM (IST)

पिछले कुछ सालों में रोहिंग्या लोगों की समस्या और शरणार्थी बनने की बातें खासी चर्चा में रही हैं। कई मानवतावादी संस्थाओं ने भी इनकी समस्या को लेकर आवाज उठाई है। अब बॉलिवुड में भी इस सब्जेक्ट को लेकर फिल्म बनाने की बातें सामने आ रही हैं।

मुंबई (आईएएनएस)। डेब्यूटेंट डायरेक्टर हैदर खान अपनी आगामी हिंदी फिल्म में रोहिंग्या लोगों की परेशानियों और हालात को दिखाएंगे। खबर है कि उन्होंने इस फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट भी तैयार कर ली है।

लिखी ली है कहानी

हैदर ने रोहिंग्या नामक फिल्म की कहानी और पटकथा लिखी है, जिसमें रोहिंग्या लोगों के बारे में अनसुनी कहानियों पर प्रकाश डाला गया है। पिछले कुछ सालों में ये लोग म्यांमार में हिंसा के चलते वो जगह छोड़कर बांग्लादेश में बसने के लिए भाग आए थे। निर्देशक ने ये भी कहा है कि, "यह रोहिंग्या नरसंहार पर पहली फीचर फिल्म है, जो उनकी दुर्दशा पर आधारित है। यह फिल्म इस विषय पर प्रकाश डालने के साथ अनसंग पैरा (स्पेशल फोर्स) की कहानी भी बताएगी। "नोटबुक" मूवी में एक गीत पर काम कर चुके हैदर ने कहा कि, "फिल्म को पूरी तरह से नैचुरल लाइट में शूट किया गया था और अभिनेताओं ने उदास और थके टूटे लोगों के लुक को कैरी किया है। मैं यथार्थवादी फिल्म बनाना चाहता था और उनका दर्द महसूस कराना चाहता था। मेरे अभिनेताओं ने उसमें पूरी सहायता की।" रोहिंग्या फिल्म के लीड करेक्टर "राधे" की भूमिका सांगे शेल्ट्रिम ने प्ले की है और उनके साथ मॉडल तंगिया जमान मेथिला नजर आयेंगी।

क्या है रोहिंग्या मामला

कहते हैं जब 1826 के बाद अंग्रेज पूर्वी बंगाल से लोगों को अराकान लेकर गए तो उनमें हिंदू भी थे और मुस्लिम भी। आम तौर पर इस प्रांत में रहने वाले सभी लोगों को रोहिंग्या कह दिया जाता है। 1982 के बर्मीज सिटिजनशिप लॉ के तहत रोहिंग्याओं को म्यांमार की नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि म्यांमार की सरकार उन्हें अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए मानती है। रोहिंग्या लोगों को स्टेटलेस पीपल कहा जाता है। ये भी माना जाता है कि 1962 से पहले रोहिंग्या समस्या नहीं थी। 1948 में म्यांमार के आजाद होने के बाद वहां के पहले राष्ट्रपति ने रोहिंग्याओं को देश का मूल नागरिक माना था, लेकिन 1962 में सैन्य शासन आने के बाद रोहिंग्याओं की मुश्किलें शुरू हो गईं। रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति दयनीय उस वक्त हुई जब म्यांमार की सरकार ने वहां उनकी नागरिकता खत्म कर दी।

Posted By: Molly Seth
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