4 करोड़ खर्च कर 2008 में हॉकी का एस्टोटर्फ स्टेडियम बना पर इंटरनेशनल प्लेयर 1 न मिला

2018-11-28T06:00:48Z

- सभी संसाधनों से लैस स्टेडियम में मात्र 10 प्लेयर, प्रॉपर प्रैक्टिस तक नहीं हो पा रही

- एस्टोटर्फ उखाड़ कर चीलें कर रहीं स्टेडियम को बर्बाद

- पांच साल पहले अतुल कुमार नेशनल कैंप में शामिल हुए थे

>BAREILLY :

उड़ीसा में वेडनेसडे से शुरू हो रहे

हॉकी व‌र्ल्ड कप से इस बार देश को अपनी टीम से बहुत सी उम्मीदें हैं। लेकिन एक सवाल लोगों के मन में हमेशा कौंधता है। आखिर क्रिकेट के मुकाबले हॉकी पिछड़ क्यों गई? इसका जीता जागता उदाहरण

कैंट स्थित मेजर ध्यानचंद साई स्टेडियम है। एस्टोटर्फ से लेकर हॉकी के सभी संसाधनों से लैस यहां के हॉकी स्टेडियम में टीम ही पूरी नहीं है। ऐसे में प्रॉपर प्रैक्टिस नहीं हो पा रही है। खिलाड़ी किसी टूर्नामेंट में भाग लेने नहीं जा पा रहे हैं। जुलाई 2018 में बनकर तैयार हो जाने वाले हॉस्टल अब तक हैंडओवर नहीं हो पाया है।

यही सब कारण हैं कि

चार करोड़ रुपए की लागत से 2008 में बना साई का एस्टोटर्फ हॉकी स्टेडियम अब तक एक भी अंतरराष्ट्रीय प्लेयर पैदा नहीं कर सका है। बस अतुल कुमार नाम के एक हॉकी प्लेयर ने 2013 में नेशनल कैंप ज्वाइन किया था। तब से अब तक कोई भी प्लेयर नेशनल कैप तक नहीं पहुंचा।

हॉकी की दुर्दशा के लिए यह कारण हैं जिम्मेदार

टीम ही पूरी नहीं

हॉकी के लिए हर संसाधन से लैस इस एस्टोटर्फ स्टेडियम की टीम में पिछले एक साल से पूरे प्लेयर तक नहीं है। टीम में मात्र 10 प्लेयर ही हैं जबकि होने 11 चाहिए। वहीं किसी टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए टीम में कम से कम 16 खिलाडि़यों का होना बहुत जरूरी है। ऐसी आधी-अधूरी टीम के साथ प्रैक्टिस भी अधूरी रहती है। स्टेडियम इंचार्ज और कोच मिथिलेश राणा का कहना है कि टीम पूरी करने के लिए 22 प्लेयर्स लखनऊ से मांगे गए हैं।

हॉस्टल में कमरे कम

मिथलेश राणा ने बताया कि स्टेडियम में अभी एक ही हॉस्टल है और उसमें 32 प्लेयर्स के रहने की ही व्यवस्था है। अभी यहां 14 प्लेयर सेपक टकरा, 7 एथलीट और 10 प्लेयर हॉकी के रह रहे हैं। अगर लखनऊ से हॉकी के दूसरे खिलाड़ी आ भी गए तो उन्हें रखने के लिए हॉस्टल में व्यवस्था तक नहीं है। यही कारण है कि हॉकी की टीम पूरी नहीं हो पा रही है। दूसरे हॉस्टल के बनकर तैयार होने तक टीम पूरी होने की संभावना भी नहीं है।

नए हॉस्टल हैंडओवर होने में हाे गया डिले

खिलाडि़यों का कहना है कि हॉस्टल की क्षमता कम होने के कारण दूसरा हॉस्टल बनाया जा रहा है। इसे जुलाई 2018 में हैंडओवर होना था लेकिन अभी तक हॉस्टल का काम पूरा नहीं हो सका। अभी भी फिनिशिंग का काम चल रहा है। अब दिसम्बर में हॉस्टल हैंड ओवर होने की संभावना है। नया हॉस्टल 50 बेड का बनाया जा रहा है।

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दुदर्शा की कहानी,

खिलाडि़यों की जुबानी

टीम पूरी हो तभी प्रॉपर प्रैक्टिस

अप्रैल से शुरू हुए प्रैक्टिस सेशन से अब तक टीम में मात्र 10 प्लेयर ही हैं। टीम पूरी हो तभी प्रैक्टिस हो सकती है। हम लोगों के लिए हर माह यही बताया जाता है कि और प्लेयर आ जाएंगे।

पवन

लोकल प्लेयर भी नहीं मिल रहे

हॉस्टल में 30 खिलाडि़यों के रहने की व्यवस्था है। इसमें केवल 10 ही प्लेयर हॉकी के है। बाकी दूसरे गेम्स के हैं। हॉस्टल में हॉकी के जो भी प्लेयर हैं, वह सभी बाहर के हैं। अगर शहर के कुछ प्लेयर हों तो भी टीम पूरी हो जाती। लेकिन शहर से भी हॉकी के प्लेयर नहीं आ रहे हैं। इससे और अधिक प्रॉब्लम है।

अतुल, हॉकी प्लेयर

चीलें उखाड़ देती हैं एस्टोटर्फ

हम शाम चार बजे से प्रैक्टिस करने के लिए आते हैं तो वहां पर पहले तो एस्टोटर्फ उखड़ी मिलती है। कीड़े खोजने के चक्कर में चीलें एस्टोटर्फ को उखाड़ देती है। इसको बचाने के लिए कुछ प्रबंध होना चािहए।

राजा

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- हॉस्टल में रहने वाले 10 हॉकी प्लेयर ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। टीम पूरी नहीं होने पर 22 प्लेयर्स लखनऊ से मांगे थे जो मिल भी गए हैं। हॉस्टल हैंडओवर होते ही प्लेयर आ जाएंगे।

मिथलेश राणा, हॉकी कोच


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