अकेलेपन को कैसे दूर करें? क्या है स्वयं में रहने का आनन्द? जानें श्री श्री रविशंकर से

2018-12-14T10:47:01Z

वास्तव में अकेलेपन को अकेले रहकर ही दूर किया जा सकता है। यदि आप आराम से कुछ समय तक अकेले रह सकते हैं तो आपको अकेलापन नहीं सताएगा और जब आपको अकेलापन नहीं सताता है तो आप अपने आसपास खुशियां बिखेर सकेंगे।

धरती का प्रेम उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के रूप में है। हवा को भी आपसे प्रेम है, तभी तो ये सोते समय भी आपके फेफड़ों तक पहुंच कर आपको जीवन प्रदान करती है। ईश्वर को आपसे अगाध और बहुत गहरा प्रेम है। एक बार यदि आपने इसे जान लिया तो आपको अकेलापन कभी भी नहीं लगेगा। किसी दूसरे का साथ आपके अकेलेपन को दूर नहीं कर सकता और यदि कभी इससे अकेलापन मिटता भी है तो बहुत थोड़े समय के लिए। आप किसी के साथ रहते हुए भी अकेला महसूस कर सकते हैं।

अकेलेपन को ऐसे दूर करें

वास्तव में अकेलेपन को अकेले रहकर ही दूर किया जा सकता है। यदि आप आराम से कुछ समय तक अकेले रह सकते हैं तो आपको अकेलापन नहीं सताएगा और जब आपको अकेलापन नहीं सताता है तो आप अपने आस-पास खुशियां बिखेर सकेंगे। लोग पार्टियों और समारोहों के पीछे भागते हैं, परंतु जो लोग उनके पीछे नहीं भागते उनके पीछे उत्सव भाग आता है। यदि आप पार्टी या समारोहों की ओर भागते हैं तब अकेलापन आपके पास आ जाता है और जब आप स्वयं के साथ अकेले में रहते हैं तब आपके चारों तरफ पार्टी जैसा माहौल हो जाता है।

स्वयं में रहने का आनन्द

यदि आप अपने में रहने का आनन्द लेते हैं तो आप का व्यक्तित्व उबाऊ नहीं होगा। पर यदि आप में अकेलापन है तो आप दूसरों के लिए उबाऊ हो सकते हैं। और ये बात आपको और भी अकेलेपन में ला देगी! यदि आपको स्वयं का साथ उबाऊ लगता है तो जरा सोचिये कि आप दूसरे लोगों के लिए कितने उबाऊ होंगे? जिन लोगों के पास हमेशा किसी न किसी का साथ होता है वह अकेले रहने का सुख उठाना चाहते हैं और जो लोग एकाकी रहते हैं वे अकेलापन महसूस करते हैं और किसी का साथ ढूंढ़ते हैं। हर एक व्यक्ति पूर्ण संतुलन की तलाश में है। यह पूर्ण संतुलन एक उस्तरे की धार के संतुलन जैसा है और उसे सिर्फ आत्मा में ही पाया जा सकता है।

अपने आप के लिए समय निकालें


यदि हम वर्ष में एक सप्ताह ही अपने स्वयं के साथ रहने के लिए बाहर निकलें और अपने विचारों एवं भावनाओं को देखें तो समझ पाएंगे कि वास्तव में शांति का मतलब क्या होता है। कुछ समय केवल हमें अपने आप के लिए निकालना चाहिए और समय-समय पर जो हमारे करीब हैं उन लोगों से हमें कुछ दूरी बना कर रखनी चाहिए। सुबह से रात तक हम लोगों से घिरे रहते हैं और मन में सांसारिक विचार चलते रहते हैं। इसलिए हम रोज कुछ समय एकांत में बैठें और अपने हृदय की गहराइयों में प्रवेश करें। इससे हमें एकाकी रहने पर भी अकेलेपन का एहसास नहीं होगा। अपना जीवन अच्छे से जीएं।

दूसरों के लिए उपयोगी बनें

यदि हम अपने पूरे जीवनकाल में लोगों के लिए उपयोगी होते हैं तो हमारी देखभाल करने के लिए हजारों और लाखों लोग होंगे। मदर टेरेसा और आचार्य विनोबा भावे काफी समय बीमार रहे। क्या आपको लगता है कि उनका साथ देने के लिए कोई नहीं था? उनकी देखभाल करने के लिए सैकड़ों लोग खड़े थे, क्योंकि वे अपने आसपास के लोगों के लिए उपयोगी रहे। जब हम सेवा को जीवन का एकमात्र उद्देश्य बनाते हैं तो हमारे अंदर का भय दूर हो जाता है और हमें लम्बे समय तक आनंद मिलता है।

जब नाखुश होते हैं तो अपनी सीमाओं से परिचित होते हैं


हर बार जब हम नाखुश, दुखी या अकेले होते हैं तो हम अपनी सीमाओं से परिचित होते हैं। ये हमारी सीमाएंं और हदें ही हैं, जिनके कारण हम वास्तव में परेशान रहते हैं। जब तक हम अपनी सीमाओं के संपर्क में नहीं आ जाते तब तक हम शांत और सुखी होते हैं। जैसे ही हम इनके संपर्क में आते हैं हमारा मन चलना शुरू हो जाता है और हम अपने केन्द्र से बाहर निकल जाते हैं। उस क्षण हम क्या कर सकते हैं? हम तुरंत कृतज्ञ हो जाएं और शांति के लिए प्रार्थना करें। इससे हम तत्क्षण मुस्कुराने लगेंगे और स्थिति चाहे कितनी भी निराशाजनक हो उससे हम बाहर निकल आएंगे।

श्री श्री रविशंकर जी

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