सफाई को ले भड़के पार्षद डस्टबीन घोटाले पर बवाल

2018-08-14T06:00:38Z

RANCHI : रांची नगर निगम की सोमवार को हुई बोर्ड मीटिंग फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। सफाई के मुद्दे पर पार्षद जमकर बरसे। इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि मीटिंग के लिए तय एजेंडे की कॉपी को भी उन्होंने फाड़ डाला। हो-हल्ला के बीच पार्षदों ने आरोप लगाया कि जब उनकी बातें ही अनसुनी कर दी जाती है तो फिर एजेंडा तय करने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि फील्ड में लोगों के सवालों का जवाब उन्हें देता होता है। ऐसे में साफ-सफाई में बरती जा रही लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। पार्षदों ने तत्काल सफाई व्यवस्था को दुरूस्त करने की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिटी में चिकनगुनिया-डेंगू- फाइलेरिया के फैलने के पीछे कहीं न कहीं सफाई में बरती गई कोताही है। बैठक में मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय, डीएमसी संजय कुमार के अलावा कई और अफसर मौजूद थे।

पुराने प्रस्तावों पर भी हो चर्चा

बोर्ड मीटिंग में पार्षदों ने कहा कि वार्ड में काम कराने के लिए कई प्रस्ताव निगम के पास रखे गए थे। लेकिन उन प्रस्तावों पर कोई चर्चा ही नहीं की जा रही है। इस पर मेयर ने कहा कि पार्षद एक-एक कमिटी बनाकर बैठक करेंगे। इसके बाद पुराने प्रस्तावों को तत्काल पास कराकर काम शुरू कराया जाएगा।

पार्षदों ने उठाए ये सवाल

1-घटिया सामान की सप्लाई

पार्षदों ने वार्ड ऑफिसों में घटिया फर्नीचर की सप्लाई को लेकर भी बवाल काटा। उन्होंने कहा कि ऐसे सामानों को तत्काल वापस करने के साथ सप्लाई करने वाले पर एक्शन हो।

2-13 हजार में खरीदी 6 हजार की डस्टबीन

वार्डो में जो डस्टबिन लगाए गए हैं, उसकी मार्केट में कीमत छह हजार रुपए है। लेकिन, रांची नगर निगम ने उसी डस्टबिन को 13 हजार रुपए में खरीदारी की है। इस मामले की जांच कराने की मांग पार्षदों ने की।

3-गढ्डे खोदकर छोड़ दिए, पार्षद भी घायल

वार्डो में काम के नाम पर कई जगहों पर गढ्डा खोदकर छोड़ दिया गया है। वार्ड 10 के पार्षद अर्जुन यादव ने कहा कि गढ्डों को भरवाने का आदेश दिया गया था। इसके बाद भी कोई अधिकारी देखने तक नहीं आए। वहीं, पार्षद सुजाता कच्छप ने बताया कि गढ्डे में गिरने से वह जख्मी हो चुकी हैं।

4-डीजल चोरी का मामला आया तो फॉगिंग पर रोक

पार्षद ओमप्रकाश ने फॉगिंग नहीं किए जाने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि डीजल चोरी की कंप्लेन करने के बाद से उनके वार्ड में फॉगिंग नहीं कराई जा रही है। छह महीने में उनके वार्ड में केवल छह बार ही फॉगिंग कराई गई है। ऐसे में किसके इशारे पर फॉगिंग रोक दी गई है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई करने की मांग की गई।

5-फॉगिंग की भी हो आउटसोर्सिग

फॉगिंग को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं। हर माह फॉगिंग पर लाखों रुपए फूंके जा रहे हैं, लेकिन मच्छरों का आतंक खत्म नहीं हो रहा है.ऐसे में पार्षदों ने पारदर्शिता लाने के लिए आउटसोर्स कंपनी से फॉगिंग कराने की मांग की।


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