ICC Cricket World Cup 2019 हेलिकॉप्टर शॉट के लिए माही ने मंगवाए मेरठ के बैट जानें कैसे बनता है धोनी का बल्ला

2019-05-30T14:59:05Z

आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 के लिए टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने मेरठ से दो बैट मंगवाए है। बता दें मेरठ के बल्ले पूरी दुनिया में फेमस हैं।

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MEERUT: 30 मई से 14 जुलाई तक इंग्लैंड और वेल्स की क्रिकेट पिच पर होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप में एक बार फिर राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मेरठ के बल्लों से रन बरसाने के लिए तैयार हैं। इस सूची में इस बार सबसे प्रमुख नाम है,  इंडिया की टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का है, जो मेरठ की एसएफ कंपनी के बल्लों से विश्व कप में रन बनाएंगे।
पांच साल बाद याद
एसएफ स्पोट्र्स के डायरेक्टर अनिल सरीन ने बताया कि महेंद्र सिंह धोनी की डिमांड पर उनकी कंपनी ने दो बैट तैयार कर धोनी को भेज दिए हैं। उनके अलावा, मोहम्मद शमी भी उन्हीं की कंपनी के बनाए बैट से खेलते हैैं, क्योंकि वह एसएफ द्वारा स्पॉन्सर्ड प्लेयर हैैं।
आईपीएल में आ चुके
धोनी इससे पहले 2014 में आईपीएल से पहले मेरठ की एसएस कंपनी में बैट लेने खुद पहुंचे थे। एसएस के मालिक जतिन सरीन ने बताया कि तब धोनी 1260 ग्राम के छह बल्ले मेरठ से ले गए थे। 2009 के वर्ल्ड कप में भी धोनी मेरठ के बल्लों से रन बना चुके हैं। सरीन के मुताबिक, करीब 38 खिलाड़ी मेरठ की एसएस स्पोट्र्स कंपनी के बैट से परफॉर्म करेंगे।
लोकल मार्केट  भी तैयार
वर्ल्ड कप के आगाज के साथ ही मेरठ के स्पोट्र्स कारोबारी पिछले छह महीने से स्पोट्र्स गुडस बनाने में जुटे हुए हैं। वर्ल्ड कप के इस मौसम में लोकल मार्केट में भी बूम आ जाता है। लोकल मार्केट में डिमांड 15 से 20 प्रतिशत तक बढऩे की उम्मीद है। ऐसे में लोकल मैन्यूफैक्चर्स भी इस क्रिकेट के सीजन में माल बनाने में जुटे हुए हैं। सूरजकुंड रोड स्पोट्र्स मार्केट में मुख्य सप्लायर्स में शामिल दीपक महाजन (मिसा स्पोट्र्स) ने बताया कि आमतौर पर हर गर्मियों में लोकल मार्केट में बिक्री 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, लेकिन इस बार वर्ल्ड कप के चलते हमें 20-25 प्रतिशत तक ज्यादा सेल होने की उम्मीद है।

 

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1983 से बढ़ी पहचान
मेरठ से बने बल्लों को 1983 के वर्ल्ड कप से पहचान मिलनी शुरू हुई थी। इस वर्ल्ड कप में मेरठ के बल्लों से रनों की बौछार होने के बाद 1987 में तेजी से मेरठ का स्पोट्र्स मार्केट ग्रोथ करने लगा। इसके बाद एक के बाद एक स्पोट्र्स इंडस्ट्रीज मेरठ में बढऩी शुरू हो गईं। आज मेरठ में बैट-बॉल बनाने का कारोबार बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों के अलावा कुटीर उद्योग का भी रूप ले चुका है। कई देशों में इनकी सप्लाई की जाती है। यहां बने लेग गार्ड, ग्लव्स, हेलमेट भी मार्केट को तेजी से कवर करते जा रहे हैं।

मौसम देता है साथ

मेरठ में तेजी से बढ़ते क्रिकेट बैट के कारोबार में मेरठ का खुशगवार मौसम का बहुत बड़ा हाथ है। इंग्लैंड व अन्य देशों में बनने वाले बैट नमी के कारण सही नही बन पाते हैं, उनका साइज नमी के कारण प्रभावित होता है जबकि मेरठ में मौसम बैट की क्वॉलिटी के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा, विदेशों में बनने वाले बैट की कीमत एक लाख से ऊपर होती है जबकि मेरठ में बनने वाला बैट 40 से 50 हजार रुपए में उपलब्ध है।  
बारीकियों में माहिर मेरठ
वर्ल्ड कप हो या आईपीएल या कोई भी बड़ा मैच उसमें क्रिकेट बैट दो प्रकार की लकडिय़ों से तैयार किया जाता है। इनमें एक इंग्लिश वुड और दूसरी कश्मीरी वुड। इंग्लिश लकड़ी (विलो) इंग्लैंड से मंगाई जाती है। इंग्लिश विलो का पेड़ 15 से 30 साल में तैयार होता है इसलिए इसकी लकड़ी बहुत कम मात्रा में प्राप्त होती है। दुनिया में इस वुड के पांच लाख पीस प्रति वर्ष आते हैं, इसलिए इससे बना बैट महंगा होता है और यही प्लेयर्स की पहली पसंद हैं। वर्ल्ड कप में केवल इंग्लिश वुड से बना बैट पसंद किया जाता है जबकि कश्मीरी वुड का प्रयोग लोकल स्तर पर बैट बनाने में किया जाता है। मेरठ के स्पोट्र्स कारोबारी इंग्लिश वुड की बारीकियों से इस कदर रुबरु हैं कि उसका सही प्रयोग कर खिलाडिय़ों की पसंद का बल्ला तैयार किया जाता है।

प्रैक्टिस बैट भी जा रहे

वर्ल्ड कप के दौरान प्रैक्टिस मैचों का भी बहुत महत्व होता है, इसलिए कई कंपनियों ने उसके लिए अलग बैट्स के ऑर्डर दिए हैैं। विभिन्न विदेशी कंपनियों के लिए प्रैक्टिस बैट तैयार कर विदेशों में माल भेजा जा रहा है। इनमें कश्मीरी लकड़ी के बैट जहां 500 से दो हजार रुपए तक में मिल जाते हैं, वहीं इंग्लिश वुड का बैट 5 हजार रुपए की रेंज से शुरू होकर 50 हजार रुपए तक उपलब्ध है। मेरठ में बीडीएम, एसजी, नेल्को, एसबी और एसएस, एसएफ स्पोट्र्स कंपनी इंटरनेशनल खिलाडिय़ों के लिए बैट तैयार करती है। इनके बने बैट की डिमांड क्रिकेट खेलने वाले सभी देशों में हैं।
कम हो रहा बैट का वजन
इंटरनेशनल क्रिकेट में बैट का औसत वजन 1120 ग्राम से 1180 ग्राम तक होता है। एक समय, सचिन तेंदुलकर 1200 ग्राम के बैट से रन बनाते थे, तो तब 1250 ग्राम के बैट लोकप्रिय हो गए थे, लेकिन अब खिलाड़ी 1100 ग्राम तक के बैट्स तक सिमट गए हैैं। नेल्को कंपनी के डायरेक्टर अंबर आनंद ने बताया कि खिलाड़ी अपने कद और वजन के अनुसार भी बैट तैयार कराते हैं। पहले भारी बैट पसंद किए जाते थे अब सब खिलाडिय़ों की अपनी अलग पसंद है।
विदेशी खिलाडिय़ों की पसंद
मेरठ के बने बैट टीम इंडिया के खिलाडिय़ों की पहली पसंद के साथ विदेशी खिलाडिय़ों की भी पसंद हैं। यही कारण है कि विदेशी खिलाड़ी इंडिया आकर मेरठ में बने बल्लों को ही पसंद करते हैं। नेल्को प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अंबर आनंद  के अनुसार, साउथ अफ्रीका, आस्टे्रलिया, श्रीलंका, केन्या, कनाडा, बांग्लादेश, पाकिस्तान, आस्ट्रेलिया आदि के खिलाड़ी भी यहां के बने बैट पसंद करते हैं। रिकी पोटिंग, राहुल द्रविड, महेंद्र सिंह धोनी, सुनील गावस्कर, कपिल देव, विजय मांजरेकर, संजय मांजरेकर, बिशनलाल, विश्वनाथ, अजहरुद्दीन और मोहम्मद कैफ आदि मेरठ आकर बैट ले जा चुके हैैं।
पुर्तगाल से संबंध
वर्ल्ड कप हो या लोकल टूर्नामेंट सभी प्रकार के मैच में पुर्तगाल में पाए जाने वाले पेड़ की छाल से बनी कार्क को ही प्रयोग किया जाता है। इस कार्क को गेंद के बेस को बनाने में प्रयोग किया जाता है। सनबांड स्पोट्र्स कंपनी के डायरेक्टर विकास मलिक ने बताया कि वर्ल्ड कप के दौरान बॉल का कारोबार बढ़ जाता है। हालांकि वर्ल्ड कप में अधिकृत कंपनी कोकोबुरा की बॉल ही प्रयोग की जाती है लेकिन प्रैक्टिस मैच और लोकल स्पोट्र्स में मेरठ से बनी बॉल का प्रयोग किया जाता है। कार्क को रबड़ के दूध के साथ लकड़ी के बारुद को मिक्स करके बॉल का बेस बनाने में प्रयोग किया जाता है। इस बेस से बॉल का वजन और उछाल का निर्धारण किया जाता है।

 


ऐसे बनता है बेहतरीन बैट
- सबसे पहले लकड़ी का वजन करके ग्रेडिंग और हैैंडल के लिए कटिंग
- लकड़ी को मशीन से प्रेस करके उसमें सिंगापुर की लकड़ी से बना हैैंडिल फिट किया जाता है।
- फिर ग्राइंड कर फिनिशिंग और पॉलिश की जाती है।
- अब उस पर स्टीकर और हैंडिल पर रबड़ फिट की जाती है।
- अंत में बैट तैयार होने के बाद क्वॉलिटी चेक और वजन किया जाता है।
- 300 करोड़ से अधिक का कारोबार है मेरठ से क्रिकेट का
- 850 के लगभग स्पोट्र्स इंडस्ट्रीज रजिस्टर्ड हैैं जिले में
- 500 से लेकर 50 हजार रुपये तक उपलब्ध हैैं क्रिकेट बैट

ऐसे हैैं धोनी के बैट

1240 ग्राम वजन
फुल प्रोफाइल
34।5 इंच का लॉन्ग ब्लेड
ओवल हैैंडल
संख्या - दो
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हमारी कंपनी द्वारा बने बैट को वर्ल्ड कप टीम के 38 प्लेयर यूज कर रहे हैं। हर बार वर्ल्ड कप और आईपीएल में मेरठ के बल्लों का सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। इस बार भी बैट वर्ल्ड में भेजे जा चुके हैं।
जतिन सरीन, एसएस स्पोटर्स
हमारी कंपनी वर्ल्ड कप के लिए बेस्ट क्वालिटी का ऑन डिमांड मॉल सप्लाई करती है। मात्र 5 हजार बैट की सप्लाई आस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में की गई है यह बैट केवल खिलाडिय़ों के लिए मेन मैच के लिए तैयार किए जाते हैं।
अंबर आनंद, नेल्को डायरेक्टर
सचिन से लेकर धोनी तक सभी खिलाड़ी एसएफ का बल्ला पसंद करते हैं। बैट के साथ साथ बेहतरीन स्ट्रोक उसकी प्रमुखता होती है यह हर कोई नही बना सकता। मेरठ के कारीगर स्ट्रोक बनाने में माहिर हैं।
अनिल सरीन, एसएफ डायरेक्टर
वर्ल्डकप का बूम मार्केट में आ चुका है। क्रिकेट बॉल के व्यापार में 15 से 20 प्रतिशत का ग्रोथ इस समय मार्केट में है। जिसके चलते लोकल स्तर पर माल तैयार किया जा रहा है।
विकास मलिक, सनबॉड स्पोट्र्स

 

 

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari

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