दून हॉस्पिटल में शुरू हुआ आईसीडी कोडिंग सिस्टम

2019-10-21T05:45:52Z

दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती हर मरीज को इंटरनेशनल कोड ऑफ डिजीज आईसीडी कोडिंग सिस्टम जनरेट करना अनिवार्य

एक क्लिक पर स्टेट में बीमारियों और मरीजों का डेटा होगा उपलब्ध

देहरादून,

दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती हर मरीज को इंटरनेशनल कोड ऑफ डिजीज आईसीडी कोडिंग सिस्टम जनरेट करना अनिवार्य हो गया है। इसके लिए हॉस्पिटल मेनेजमेंट की ओर से सभी एचओडी को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। भर्ती मरीज के डिस्चार्ज पेपर पर आईसीडी कोड डाला जाएगा, जो रिकॉर्ड रूम को उपलब्ध कराना होगा। आईसीडी कोडिंग सिस्टम में हर बीमारी का अलग कोड होता है। इससे डेटा कलेक्ट होने के बाद स्टेट में हर बीमारियों से पीडि़त मरीजों की संख्या और डेटा केन्द्र सरकार को उपलब्ध कराया जाएगा। जिसके बाद हेल्थ डिपार्टमेंट इस पर वर्कआउट करेगा।

हॉस्पिटल में ही लगेगा सिस्टम

मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल में अब इंटरनेशनल कोड ऑफ डिजीज सिस्टम अनिवार्य हो गया है। स्टेट के सभी कॉलेज के हॉस्पिटल में मरीज का एक कोड जनरेट किया जाएगा। जो कि मरीज को हुई बीमारी के हिसाब से डलेगा। ऐसे में बीमारियों और मरीजों के बारे में आवश्यक जानकारी और डेटा हेल्थ डिपार्टमेंट को आसानी से मिल जाएगा। ये सिस्टम सिर्फ कॉलेज हॉस्पिटल के लिए ही है, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में ये लागू नहीं होगा। दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के एमएस डॉ। केके टम्टा ने बताया कि हर एचओडी को इस संबंध में बुकलेट उपलब्ध करा दी गई है। मरीज के डिस्चार्ज पेपर में कोड डालना अनिवार्य होगा। इसके बाद ये पेपर रिकॉर्ड रूम को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। जहां पूरे हॉस्पिटल का डेटा तैयार करेंगे। इसमें हर बीमारी का अलग कोड दिया गया है। रिकॉर्ड में हर मरीज की एंट्री होगी, उसके आगे जो बीमारी मरीज को है उसका कोड डाल दिया जाएगा।

क्या है आईसीडी कोडिंग

केन्द्र सरकार की ओर से सभी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को आईसीडी कोडिंग सिस्टम की बुकलेट उपलब्ध कराई गई है। इस सिस्टम में हर बीमारी का अलग कोड होता है। जो कि सभी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को उपलब्ध कराए गए हैं। ये पूरे देश में लागू है। जैसे-जैसे बीमारियों और मरीजों का डेटा अपडेट होगा। वैसे-वैसे बीमारियों के बारे में जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे ये पता लगाना आसान है कि किस स्टेट में कितनी बीमारियों से कितने लोग पीडि़त हैं। इसके बाद स्टेट के सभी डेटा के आधार पर बीमारियों का आकलन किया जा सकेगा। हेल्थ डिपार्टमेंट इन डेटा के आधार पर आसानी से वर्कआउट कर सकता है।

इमरजेंसी में ईएमओ की इमरजेंसी

दून हॉस्पिटल की इमरजेंसी में ईएमओ की कमी से लगातार परेशानी बनी हुई है। दून हॉस्पिटल के एमएस डॉ। केके टम्टा ने बताया कि कॉलेज और हॉस्पिटल मिलाकर 9 पद स्वीकृत है, लेकिन इस समय तीन ही ईएमओ कार्यरत हैं। ऐसे में एक ईएमओ के अवकाश पर चले जाने से ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है। संडे को भी कुछ ऐसा ही हुआ जब अचानक सुबह की ड्यूटी करने वाले ईएमओ को इमरजेंसी लीव लेनी पड़ी। इसके बाद स्टाफ ने एमएस डॉ। केके टम्टा को पूरी स्थिति बताई गई। डॉ। टम्टा ने हॉस्पिटल आकर एसआर की ड्यूटी निर्धारित कर दी। लम्बे समय से दून हॉस्पिटल की इमरजेंसी कामचलाऊ स्टाफ के भरोसे चल रही है।

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इंटरनेशनल कोड ऑफ डिजीज आईसीडी कोडिंग सिस्टम शुरू करने के सभी एचओडी को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। हर भर्ती मरीज के डिस्चार्ज पेपर पर आईसीडी कोड डाला जाएगा। इसके बाद रिकॉर्ड रूम को उपलब्ध करा दिया जाएगा।

डॉ। केके टम्टा, एमएस, दून हॉस्पिटल

Posted By: Inextlive

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