अवैध खनन घोटाला जल्द खुलेंगे चंद्रकला के लॉकर आठ साल की आईपीआर की होगी पड़ताल

2019-01-08T12:30:11Z

अवैध खनन के आरोपितों के ठिकानों पर पड़े छापे की मुख्यालय को दी रिपोर्ट। सीबीआई ने पूर्व खनन सचिव से पूछा था सरकार ने अचानक क्यों हटाया था।

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LUCKNOW : लखनऊ और दिल्ली समेत सात शहरों के 14 ठिकानों पर छापेमारी करने वाली सीबीआई की टीम ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। सीबीआई जल्द ही चंद्रकला के बैंक लॉकर्स भी खोलने की तैयारी में है जिसकी जानकारी लखनऊ और नोएडा के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मिली थी। सीबीआई को इन लॉकर्स में तमाम अहम सबूत मिलने की उम्मीद है। सीबीआई चंद्रकला के आठ साल के बैंक खातों की पड़ताल के साथ केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय में दाखिल होने वाले चल-अचल संपत्तियों को जुटाकर उसकी पड़ताल करने जा रही है ताकि उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के पुख्ता प्रमाण हासिल किए जा सके।
सरकार ने अचानक क्यों हटाया
सरकार में तीन साल तक प्रमुख सचिव खनन रहे डॉ। गुरदीप सिंह के अलावा सपा सरकार के शुरुआती दौर में खनन विभाग के सचिव रहे आईएएस जीवेश नंदन से भी सीबीआई पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने उनसे यह पता लगाने की कोशिश की थी कि आखिर राज्य सरकार ने उन्हें अचानक इस पद से क्यों हटा दिया था। क्या अवैध खनन को लेकर उन पर किसी मंत्री का दबाव तो नहीं था। ध्यान रहे कि जीवेश नंदन 21 नवंबर 2011 से 13 मई 2012 तक खनन विभाग में तैनात थे। खास बात यह है कि बी। चंद्रकला को 13 अप्रैल 2012 को हमीरपुर का डीएम बनाया गया था। इसके एक महीने बाद ही जीवेश नंदन की विभाग से विदाई कर दी गयी थी। दरअसल जीवेश नंदन के हटने के करीब बीस दिन बाद ही हमीरपुर में बिना ई-टेंडरिंग के खनन के कारोबार से जुड़े आदिल खान, रमेश मिश्र, दिनेश मिश्र, अंबिका तिवारी, संजय दीक्षित, रामअवतार सिंह, करन सिंह व अन्य को नई लीज देने, पुरानी लीज का रिनीवल करने का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं इनके साथ तमाम अन्य लोगों को अवैध खनन की इजाजत दी जाती रही। इससे वहां बड़े पैमाने पर वसूली का सिलसिला भी शुरू हो गया। जो गाडिय़ां खनिज लेकर जाती थी, उनसे भी वसूली की जाने लगी। शायद यही वजह है कि सीबीआई जीवेश नंदन से पूछताछ के दौरान अवैध खनन को लेकर ब्यूरोक्रेट्स पर पडऩे वाले राजनैतिक दबाव से जुड़े राज जानने का प्रयास कर रही थी। बाद में सीबीआई की जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती चली गयी।

कई अफसरों पर कसा था शिकंजा
सीबीआई ने इस मामले में सात प्रारंभिक जांच दर्ज करने के बाद 25 मई 2017 को पूर्व प्रमुख सचिव खनन गुरदीप सिंह से तीन घंटे तक गहन पूछताछ की थी। सीबीआई ने उनसे पूछा था कि किसके इशारे पर हमीरपुर में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की इजाजत दी जाती रही। खनन माफिया के खिलाफ उन्होंने तमाम शिकायतें मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की। सीबीआई ने पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के साथ उनके रिश्तों को लेकर भी तमाम सवाल किए थे। इसके अलावा हमीरपुर में तैनात रहे तीन पूर्व डीएम से भी पूछताछ की गयी थी जो अभी तक सीबीआई जांच की जद में बताए जा रहे हैं।
बीजेपी के हथकंडों से डरना नहीं : अखिलेश
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अवैध खनन के मामले में सीबीआई छापेमारी और उसकी आड़ में सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछताछ की धमकी को राजनीतिक विद्वेष की भावना और चुनावी स्वार्थ करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी की इस प्रकार की घिनौनी राजनीति व चुनावी षडय़ंत्र कोई नई बात नहीं है। मायावती ने अखिलेश से फोन पर बात करके कहा कि बीजेपी सरकार के इस प्रकार के साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकंडों से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जनता बीजेपी को इसका करारा जवाब आने वाले समय में जरूर देगी।

सीधी मुलाकात से बौखला गयी बीजेपी

मायावती ने सोमवार को जारी अपने बयान में कहा कि जिस दिन सपा-बीएसपी के शीर्ष नेतृत्व की सीधी मुलाकात की खबर मीडिया में आम हुई, उसी दिन बौखलाहट में बीजेपी सरकार द्वारा सीबीआई को लंबित पड़े खनन मामले में एक साथ अनेकों स्थानों पर छापेमारी करवाई गई। साथ ही अखिलेश यादव से भी पूछताछ करने संबंधी खबर जानबूझकर फैलाई गई। यह सपा-बीएसपी गठबंधन को बदनाम व प्रताडि़त करने की कार्रवाई नहीं तो और क्या है? वहीं बीजेपी के नेताओं को इस संबंध में अनावश्यक व अनर्गल बयानबाजी करने की क्या जरूरत थी? इस मामले में बीजेपी के मंत्री व नेता सीबीआई के प्रवक्ता कबसे बन गये हैं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके अपने विरोधियों को फर्जी मामले में फंसाने में माहिर रही है। बीएसपी मूवमेंट भी इसका भुक्तभोगी रहा है। यूपी में लोकसभा की 80 में से 60 सीटे बीएसपी ने बीजेपी को देना स्वीकार नहीं किया तो तब उन्होंने ताज मामले में फर्जी तौर पर मुझे फंसा दिया और जिसके बाद 26 अगस्त 2003 में मुख्यमंत्री के पद से मैंने इस्तीफा दे दिया था।
सीबीआई ने नाम नहीं लिया, फिर भी डर रहे अखिलेश
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सोमवार को राजधानी स्थित अपने सरकारी आवास पर सपा शासनकाल में हुए खनन घोटाले पर सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव तथा बसपा प्रमुख मायावती के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे 'चोर की दाढ़ी में तिनका करार दे डाला। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने अभी तक अखिलेश यादव का नाम नहीं लिया है, फिर भी उन्हें क्यों डर लग रहा है। यदि सपा शासनकाल में कोई अवैध खनन नहीं हुआ है तो उन्हें सीबीआई जांच से डरने की कोई जरूरत नहीं है।
नहीं आया सीबीआई का नोटिस या समन : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार सीबीआई को कठपुतली बनाकर झूठे और अनर्गल आरोपों से बदनाम करने की साजिश कर रही है। वह अपनी समस्त मर्यादाएं भूलकर खुद सीबीआई की जगह बैठ गई है। अभी तक सीबीआई की तरफ  से कोई नोटिस अथवा समन तक नहीं आया तब भाजपा सरकार के मंत्री किस संवैधानिक अधिकार से कथित आरोप लगाने का दुस्साहस कर रहे हैं। इसका करारा जवाब दिया जाएगा। भाजपा की मंशा पूरी व्यवस्था पर कब्जा करने की है। सोमवार को पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं से अखिलेश ने कहा कि अपनी पराजय और सत्ता जाने के डर से भाजपा नेतृत्व अब यूपी में सपा और बसपा के गठबंधन की खबर से बौखला गया है। बोले कि भाजपा सरकार के घोटालों की लंबी सूची अब उजागर हो चली है। भाजपा सरकार जाते-जाते सब कुछ खा कर जायेगी। उन्होंने 50 हजार करोड़ रूपये का अडानी पावर घोटाला, बाल्को घोटाला, दाल घोटाला, चीनी घोटाला, बुलेट ट्रेन घोटाला, कालाधन घोटाला, गड्ढा मुक्त सड़क घोटाला, व्यापमं घोटाला, ललित मोदी, नीरव मोदी, विजय माल्या घोटाला, फसल बीमा घोटाला, ईवीएम घोटाला आदि गिनाए।

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