आज के दिन ही दिया गया था पहला आस्कर अवार्ड

2018-05-16T13:16:24Z

1929 में आज के दिन सबसे पहला आस्कर अवार्डदिया गया था। आइए जानते हैं इस अकादमी सम्मान के बारे में कुछ बातें।

पहला ऑस्कर अवॉर्ड वितरण
कानपुर। 16 मई, 1929 में पहला आस्कर अवॉर्ड सेरेमनी का आयोजन किया गया था। 1929 में रूजवेल्ट होटल ब्लास्म रूम के बैंक्वेट में आयोजित इस समारोह में 270 लोग शामिल हुए थे। आस्कर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पहली बार विनर्स के नाम तीन महीने पहले ही घोषित कर दिए गए थे। अगले साल से अकादमी अवार्ड के विनर्स की लिस्ट गोपनीय रखी जाने लगी। हालांकि विनर्स की लिस्ट अखबारों को एडवांस में दे दी जाती थी ताकि वे रात 11 बजे उस लिस्ट का प्रकाशन के लिए इस्तेमाल कर सकें। यह सिलसिला 1940 तक चला। दरअसल 1940 में 'लॉस एंजेलिस टाइम्स' ने अपने शाम के संस्करण में विनर्स की लिस्ट छाप दी थी, जबकि उसे अगले दिन के संस्करण में प्रकाशित होना था। अखबार की इस हरकत से समारोह की भद पिट गर्इ क्योंकि विनर का नाम तभी घोषित किया जाता है जब गेस्ट मंच पर आकर सील बंद लिफाफा खोलता था। इससे हिस्सा लेने वालों की संख्या पर असर पडा़। एक साल बाद इस सम्मान समारोह का लार्इव प्रसारण लॉस एंजेलिस रेडियो स्टेशन करने लगा था।

1927 में हुआ आॅस्कर का जन्म

एमजीएम स्टूडियो के प्रमुख लुइस बी मेयर कुछ मेहमानों के साथ अपने घर पर डिनर कर रहे थे। वहीं बातचीत के दौरान आॅस्कर का आइडिया आया। दरअसल वे एक ऐसा संगठन बनाना चाहते थे जो फिल्म इंड्स्ट्री के भले के लिए हो। इस विचार पर बात करने के लिए एक हफ्ते बाद लॉस एंजेलिस एंबेसडर होटल में फिल्म इंडस्ट्री से संबंधित सभी क्रिएटिव ब्रांच से 36 लोग पहुंचे। वहां जब उन्होंने इंटरनेशनल एकेडमी आफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के गठन की बात सुनी तो खूब हो-हल्ला मचाया। जल्दी ही इस पर चर्चा हुर्इ और अधिकारियों का चुनाव कर लिया गया। डगलस फेयरबैंक को प्रेसिडेंट चुने गए।

'अवाॅर्ड आॅफ मेरिट' का गठन

1928 में अकादमी ने सात सदस्यों वाली एक कमेटी 'अवार्ड आफ मेरिट' का गठन किया। कमेटी ने सुझाव दिया कि 12 कैटेगरी में अवार्ड दिया जाना चाहिए। अकाडमी ने अपनी पहली किताब 1928 में छापी। इस किताब में अकाडमी द्वारा प्रायोजित सेमीनार की सीरिज से संबंधित एक रिपोर्ट थी, जिसमें 150 सिनेमाटोग्राफरों ने शिरकत की थी। अकादमी की दूसरी किताब 'रिकार्डेड साउंड फार मोशन पिक्चर्स' 1931 में छपी थी। यह किताब साउंड टेक्निक पर आधारित व्याख्यान पर आधारित थी।

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