प्रयागराज में गंगा खतरे के निशान के पार हर तरफ सैलाब

2019-09-18T13:53:48Z

खतरे का निशान पार करते ही प्रयागराज के कई इलाकों में हड़कंप मच गया है। जनजीवन बेहाल हो गया है। आखिरी बार 2013 में डेंजर लेवल तक गंगा का पानी पहुंच गया था। बाढ़ राहत केन्द्रों पर 24 घंटे बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं।

प्रयागराज (ब्यूरो)। आखिर गंगा का पानी मंगलवार को डेंजर लेवल पार कर गया। गंगा नदी के खतरे का निशान पार करने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी ने राहत व बचाव कार्यों के लिए विभाग द्वारा की गई तैयारियों की आपात समीक्षा बैठक की। इस दौरान क्षमता के अनुसार राहत केन्द्रों पर मोबाइल टॉयलेट एवं साफ-सफाई। दवाओं के छिड़काव आदि की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश नगर निगम को दिए।
प्रभावी ढंग से हो राहत कार्य

डीएम बीसी गोस्वामी की ओर से बुलाई गई बैठक में राहत केन्द्रों को प्रभावी ढंग से चलाने का निर्देश दिया गया। साथ ही बुधवार तक सभी जरूरी तैयारियों को पूरा करने का भी डीएम ने निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी बाढ़ राहत केन्द्रों पर सभी इंतजाम पूरी तरह से दुरुस्त होने चाहिए। मीटिंग में डीएम ने विद्युत विभाग अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां बाढ़ का पानी आने की संभावना नहीं है, वहां बिजली सप्लाई तत्काल चालू करें। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी है और वहां फाल्ट हो जाता है, उससे निपटने की पूरी तैयारी कर लें।

शाम चार बजे

डेंजर लेवल गंगा और यमुना    84.73 मीटर
फाफामऊ    84.74 मीटर
छतनाग    83.98
नैनी    84.55
उपलब्ध कराएं मोबाइल टायलेट
डीएम ने कहा कि हर राहत केन्द्र पर डस्टबिन का इंतजाम हो। इसके साथ ही मोबाइल टॉयलेट भी सही मात्रा में होने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को अभी से ही इसकी व्यवस्था करने के निर्देश दिए। संबन्धित उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि आज शाम तक इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें।

बाढ़ में फंसे पशुओं को निकालें

इस दौरान पशुचिकित्साधिकारी को निर्देश दिया गया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जहां कहीं भी पशु फंसे हैं, उन्हें वहां से निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखा जाय। उनके चारे-पानी तथा रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। नगर निगम से कहा कि कितने पम्पिंग स्टेशन अभी तक चल रहे हैं। कितने अस्थायी अभी संचालित करने हैं। सभी का ट्रायल कर सम्बन्धित क्षेत्र के पार्षदों को भी दिखा लें। साथ ही नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश किया कि वह सीवरेज और ड्रेनेज की व्यवस्था ध्वस्त होने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें।
राहत केन्द्रों पर न हो लापरवाही
जिलाधिकारी ने जिला आपूर्ति अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी को खासतौर पर निर्देश दिए गए।
-राहत केन्द्रों पर खान-पान में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।
-प्रत्येक राहत शिविरों में आपूर्ति निरीक्षकों की ड्यूटी लगायी जाएगी।
-बिजली की कटौती किसी भी कीमत पर नहीं की जाएगी।
-प्रत्येक राहत केन्द्रों पर पुरुष और महिला होमगाड्र्स की तैनाती की जाए।
-उप जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि बोट का सही इंतजाम किया जाए।
-बाढ़ राहत केन्द्रों पर साफ-सफाई, पेयजल की व्यवस्था की जाए।
-मच्छरों की दवाइयों का छिड़काव निरन्तर किया जाए।
-हर राहत केंद्र पर एक डॉक्टर के साथ-साथ एक एएनएम की तैनाती हो।
-सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सुचारू रूप से चलाया जाए।
मीटिंग से गायब रहने पर गंगा प्रदूषण इकाई व जल निगम के जीएम पर FIR का निर्देश
डीएम की ओर से बुलाई गई मीटिंग में गंगा प्रदूषण इकाई और जल निगम के जीएम पर एफआईआर की संस्तुति की गई। डीएम ने कहा कि इस समय जिला विषम परिस्थितियों से घिरा हुआ है। इस समय काम में लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। हमें राहत व बचाव कार्य में बहुत तेजी दिखानी चाहिए। राहत बचाव संस्थाओं द्वारा बाढ़ राहत शिविरों में गंदगी होने व बदबू आने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने अपर नगर आयुक्त से स्पष्टीकरण तलब करते हुए नाराजगी जतायी। उन्होंने पीडब्लूडी को आदेशित किया कि आप हर चार घण्टे में हमें व साथ ही बनाये गये कंट्रोल रूम नंबर - 0532-2641577, 0532-2641578 को सूचित करेंगे की कौन-कौन सी रोड पानी से डूब गई। साथ ही जल निगम को रूरल एरिया में बाढ़ चौकियों पर साफ पानी का इंतजाम करने की ताकीद की।
prayagraj@inext.co.in



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