साहित्य और कला में यह पुलिस कर्मी सिंघम

2019-01-04T06:00:55Z

- साहित्य, एक्टिंग, गीत-संगीत में भी कायम है पुलिसकर्मियों का जलवा

- पुलिस विभाग में जिम्मेदार पद में होने के बाद भी अंदर का कलाकार नहीं किया खत्म

Mayank.Srivastava@inext.co.in

LUCKNOW: पुलिस का नाम जहन में आते ही रौबदार चेहरा, हाथ में डंडा और तमतमया बदन दिखने लगता है। पुलिस विभाग और कला व साहित्य दोनों विपरीत नाम माने जाते हैं। इसके बाद भी पुलिस डिपार्टमेंट में कुछ ऐसे हुनरमंद मौजूद हैं, जो अपनी ड्यूटी तो बखूबी निभा ही रहे हैं, साथ ही कला और साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं। ऐसे पुलिसवालों को डिपार्टमेंट भी सलाम करता है। लखनऊ में कई ऐसे पुलिसकर्मी हैं, जिनके टैलेंट को मातहत और अफसरों ने भी सराहा है। हम आपको कुछ ऐसे ही पुलिसवालों के बारे में बता रहे हैं जो इस मामले में विभाग के लिए नजीर बन गए हैं।

केस नंबर एक

संतोष कुमार तिवारी

सब इंस्पेक्टर एटीएस

साहित्यकार

मेरा कंप्यूटर, मेरे पात्र और मैं जागता हूं

एटीएस में तैनात संतोष तिवारी के पास डिपार्टमेंट की अहम जिम्मेदारी है। इसके बाद भी उनके भीतर छिपा राइटर कभी सोया नहीं। स्टूडेंट लाइफ से लिखने का शौक रखने वाले संतोष की किताब मैम साहब को अमृतलाल नारंग पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। उनकी कविताएं दृष्टि बोध कविताओं का बड़ा संग्रह है। जिम्मेदार पद पर होने के बाद भी उन्होंने अपने लिखने के शौक को खत्म नहीं होने दिया। संतोष बताते हैं कि ड्यूटी खत्म होने के बाद जब वे घर जाते हैं और परिवार जब परिवार के सभी लोग सो जाते हैं तो उनका कंप्यूटर, कहानी के पात्र जाग जाते हैं और नई कहानी शुरू हो जाती है।

केस नंबर दो

शिवजी दुबे

सब इंस्पेक्टर, माउंटेन पुलिस

भक्ति गीत और भजन मेरी आत्मा

महानगर में तैनात 2011 बैच के सब इंस्पेक्टर शिवजी दुबे माउंटेन पुलिस विभाग में तैनात हैं। शिवजी दुबे कहते हैं कि आत्मा में भक्ति गीत और भजन बसा है। वह हर रविवार सुबह 10.30 बजे हनुमान सेतु स्थित हनुमान मंदिर में भजन का कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। उनके भजन और गीत की प्रसिद्धि इस कदर है कि लोग अखंड रामायण या किसी मंदिर में भजन संध्या का आयोजित करते हैं तो उन्हें बुलाना नहीं भूलते। कुंभ में ड्यूटी कर रहे शिवजी दुबे ने बताया कि वे अपनी नौकरी और शौक को एक साथ पूरा करते हैं लेकिन कभी ड्यूटी के टाइम अपने शौक को याद नहीं करते।

केस नंबर तीन

आनंद ओझा

इंस्पेक्टर पीएसी 35 बटालियन, महानगर

भोजपुरी इंडस्ट्री के सिंघम

2001 बैच के इंस्पेक्टर आनंद ओझा भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सिंघम के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक आधा दर्जन से ज्यादा भोजपुरी फिल्म में एक्टिंग की है और करीब चार से ज्याद उनके एलबम भी रिलीज हुए हैं। वर्तमान में कुंभ सब्जेक्ट पर एक फिल्म करने के साथ जल्द ही वे एक हिंदी मूवी में भी डेव्यू कर रहे हैं। आनंद ने बताते हैं कि वे सब इंस्पेक्टर की ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाते हैं। जब भी उन्हें छुट्टी मिलती है, तो वे किसी फैमली फंक्शन में न जाकर अपनी एक्टिंग के शौक को पूरा करते हैं। उन्होंने बताया कि वे कई साल थियेटर से भी जुड़े रहे हैं।

केस नंबर चार

नारायण शर्मा

कांस्टेबल, हजरतगंज, खोया पाया सेल

ड्यूटी के बाद करता हूं रियाज

2015 बैच के कांस्टेबल नारायण शर्मा पांच साल की उम्र से हरमोनियम बजा रहे हैं। वे हजरतगंज में खोया पाया सेल में तैनात हैं। उन्होंने अलीगंज में होने वाली रामलीला में सात साल तक श्रीराम का किरदार निभाया है। एयरफोर्स में तैनात उनके भाई लक्ष्मण का किरदार निभाते थे। नारायण बताते हैं कि ड्यूटी के चलते अब राम का किरदार निभाने का मौका नहीं मिलता है लेकिन अपने अभिनय और गायन के शौक को उन्होंने खत्म नहीं किया। मोबाइल पर एप डाउनलोड कर वे म्यूजिक के साथ गाने बनाते और गाते हैं। उनके कई गाने यूट्यूब पर मौजूद हैं।

केस नंबर पांच

दिनेश सिंह

सब इंस्पेक्टर, गुंडबा

भजन गाकर मिटाते लोगों की थकान

2001 बैच के सब इंस्पेक्टर बस्ती निवासी दिनेश सिंह की गायकी का पुलिस डिपार्टमेंट कायल है। दिनेश सिंह बताते हैं कि चाचा रामबली सिंह कानपुर की विक्टोरिया मिल में काम करते थे और मंच गायक थे। उनकी प्रेरणा से वे भजन गायक बने। ट्रेनिंग के दौरान बैरक में गीत सुनाकर साथी लोगों की थकान मिटाते थे। अभी भी जब भी समय मिलता है तो वे अपना यह शौक पूरा करते हैं। भजन और गीत गायन उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है।


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