Ind Vs Pak ICC World Cup 2019 ये गेम नहीं साइकोलाॅजिकल वाॅर है

2019-06-16T10:16:18Z

रविवार को विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान फिर आमने सामने हैं। भारत और पाक की क्रिकेट टीमों के बीच हर मुकाबला खास होता है लेकिन विश्व कप में जब दोनों टीमें भिड़ती हैं तो बात कुछ और ही होती है।

दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के एसोसिएट एडिटर उमंग मिश्र की समीक्षा
पाकिस्तान के चीफ सलेक्टर इंजमाम उल हक इस मैच को फाइनल से पहले फाइनल बता रहे हैं।  हालांकि पाकिस्तान की वर्तमान टीम फाइनल में पहुंचने के लायक नहीं दिखती और टीम इंडिया उसकी तुलना में ज्यादा मजबूत है लेकिन भारत पाकिस्तान मैच में इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी टीम बेहतर है। क्योंकि भारत-पाक क्रिकेट मुकाबला विश्व कप में सिर्फ गेंद और बल्ले के खेल से ज्यादा होता है। आज तक विश्व कप में भारत कभी भी पाकिस्तान से नहीं हारा है, उस विश्व कप में भी नहीं जब पाकिस्तान चैम्पियन बना था। इसका कारण खेल से ज्यादा मनोवैज्ञानिक  रहा है।

पहली बार भारत-पाकिस्तान विश्व कप में 1992 में भिड़े थे
आखिर विश्व कप में भारत-पाक मुकाबला क्यों इतना सनसनीखेज बन जाता है। इसे समझने के लिए विश्व कप में खेले गए भारत-पाक मैचों को याद करना होगा। एक दिवसीय मैचों का विश्व कप तो 1975 से खेला जा रहा है लेकिन पहली बार भारत-पाकिस्तान विश्व कप में 1992 में भिड़े थे। ये वही विश्व कप था जो 2019 के विश्व कप के फॉर्मैट पर खेला गया था जिसमें हर टीम को एक दूसरे से एक मैच खेलना था और टॉप 4 टीमों को सेमीफाइनल में पहुंचना था। ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैैंड में खेले गए 1992 विश्व कप के पहले से ही भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में थी।। विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज और ट्राएंगुलर वन डे सीरीज दोनों में भारत का प्रदर्शन खराब रहा था।

एक घटना ने भारत-पाक के विश्व कप मुकाबलों का मुस्तकबिल लिखा

1992 के विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच से पहले भारत ने एक भी मैच नहीं जीता था। उस मैच में सचिन तेंदुलकर के अर्धशतक और अजय जडेजा के 46 रन की मदद से भारत सिर्फ 217 रन का टार्गेट दे पाया था। टार्गेट कम था लेकिन भारत की उम्मीद इस बात पर टिकी थी कि पाकिस्तान को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में अंडर लाइट लक्ष्य का पीछा करना था और वहां डे नाइट मैच में दूसरी पारी में बॉल को अतिरिक्त स्विंग मिलती थी। पाकिस्तान ने शुरू में दो विकेट गंवाने के बाद पारी संभाल ली थी और आमिर सोहेल और जावेद मियांदाद धीरे धीरे लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे। उसी समय एक ऐसी घटना हुई जिसने भारत-पाक के विश्व कप मुकाबलों का मुस्तकबिल लिख दिया।
जावेद मियांदाद स्क्वायर लेग की तरफ जाकर बंदर जैसे उछलने लगे
भारत के विकेटकीपर किरण मोरे की अपील से चिढ़ कर जावेद मियांदाद स्क्वायर लेग की तरफ जाकर बंदर की तरह उछलने लगे। वो बंदर की तरह उछल कर मोरे की नकल करके उन्हें चिढ़ा रहे थे। भारतीय कप्तान अजहरूद्दीन ने इस अशोभनीय व्यवहार की अम्पायर से शिकायत की और माहौल बहुत गर्म हो गया। उस मोमेंट से भारतीय टीम की आंख में जो खून सवार हुआ उसने वो मैच तो दूर आज तक पाकिस्तान को विश्व कप में भारत के सामने जीतने नहीं दिया। उस मैच में जब जवागल श्रीनाथ ने मियांदाद को यार्कर पर बोल्ड किया था वो मैच में ही नहीं एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का जयघोष था। बाद में पाकिस्तान वो विश्व कप भले ही जीत गया लेकिन भारत ने अपना कप जीत लिया था जिसकी अहमियत भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए ट्रॉफी कम नहीं थी।

1996 के विश्व कप क्वार्टर फाइनल में भारत-पाक आमने सामने हुए

1992 के विश्व कप से शुरू हुई ये जंग 1996 के विश्व कप में और परवान चढ़ी जब क्वार्टर फाइनल में भारत-पाकिस्तान आमने सामने हुए। भारत-पाक  मैच का दबाव दोनो टीमों पर था और भारत संभल कर पहले बैटिंग करते हुए सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ रहा था, जीत सुनिश्चित करने वाले स्कोर तक नहीं। लेकिन भारतीय पारी के अंतिम के पलों में अजय जडेजा ने पाकिस्तान से सबसे तूफानी गेेंदबाज वकार यूनुस के एक ओर में 22 रन कूट दिए जिसमें टाइमिंग के बल पर कवर बाउंड्री के ऊपर लगाया गया गगनचुंबी छक्का शामिल था। अंत के छोटे से तूफान की बदौलत जो पारी 260 के आसपास पहुंच रही थी वो 287 तक पहुंच गई और अंत के ओवरों में बनाए गए अतिरिक्त रन ही थे जिनका दबाव ऑस्किंग रेट पर पड़ा। लेकिन पाकिस्तानी पारी के शुरआती 10 ओवरों में ही रन रेट का दबाव सईद अनवर और आमिर सोहेल की आक्रामक बल्लेबाजी के कारण खत्म सा हो गया।
भारत ने एक बार फिर से पाकिस्तान को विश्व कप में हरा दिया था
अनवर के आउट होने के बाद फिर 1992 जैसी घटना हुई जिसने मैच का रुख बदल दिया। वेेंंकटेश प्रसाद की एक गेंद को एक्स्ट्रा कवर बाउंड्री के बाहर पहुंचा कर आमिर सोहेल ने अभद्र तरीके से वेंकटेश प्रसाद को इशारा किया कि फील्डर वहां लगाओ। तिलमिलाए वेंकटेश प्रसाद ने जो अगली गेंद फेंकी वो उनकी सामान्य रफ्तार से बहुत ज्यादा तेज थी और गेंद उस पाटा विकेट पर भी लेफ्ट हैैंडर के मिडिल स्टम्प पर पड़ कर ऑफ स्टम्प की ओर स्विंग हुई। गेंद इतनी तेज और सटीक थी कि सोहेल का ऑफ स्टम्प हवा में उड़ गया। अब बारी प्रसाद की थी। प्रसाद ने आमिर सोहेल को उन्हीं के अंदाज में पवेलियन की ओर जाने का इशारा किया। दो गेंदों के भीतर का वो सनसनीखेज घटनाक्रम उस मैच का डिफाइनिंग मोमेंट बन गया और पाकिस्तान टीम आत्मविश्वास खो बैठी। उसके विकेट गिरते गए वो भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को विश्व कप में हरा दिया।
पाकिस्तान में टीवी सेट तोड़े गए और खिलाड़ियों की आलोचना हुई
पाकिस्तान में टीवी सेट तोड़े गए और अपने देश में उनकी बहुत आलोचना हुई। ऐसे बैकग्राउंड के साथ 1999 में फिर भारत पाकिस्तान विश्व कप में आमने सामने हुए। हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो चुके थे क्योंकि उस समय कारगिल युद्ध चल रहा था। भारत ने उस मैच में पहले बैटिंग करके मात्र 227 रन बनाने के बावजूद 47 रन से हरा दिया था। वेकटेश प्रसाद फिर पाकिस्तान के दुश्मन बने और पांच विकेट लेकर मैन ऑफ द मैच रहे। 2003 के अगले विश्व कप में जब पाकिस्तान और भारत आमने सामने हुए तो दक्षिण अफ्रीका के विकेट पर पाकिस्तान ने भारत के सामने 274 रकन का अच्छा खासा लक्ष्य रखा था। लेकिन मैच का डिफाइनिंग मोमेंट भारतीय पारी का पहला ओवर ही बन गया जब सचिन तेंदुलकर ने रावलपिंडी एक्सप्रेस शोएब अख्तर के पहले ओवर में 17 रन धुन दिए जिसमें प्वाइंट बाउंड्री के ऊपर से लगाया गया वो छक्का भी शामिल था जिसे बाद में टूर्नामेंट का बेस्ट स्ट्रोक घोषित किया गया।
दोनों टीमें 2011 के विश्व कप के सेमीफाइनल में आमने सामने हुईं
अपने सबसे तूफानी गेंदबाज को एक ओवर बाद ही हटाना पड़ा पाक को क्योंकि ये समझ में आ गया था कि प्रचंड फॉर्म में चल रहे सचिन जान बूझ कर शोएब को टार्गेट करके मैदान में उतरे थे। भारतीय ओपनर्स सचिन और सहवाग ने शुरू के चार ओवर में ही ऐसा तूफान बरपाया कि पाक टीम के हौसले पस्त हो गए और भारत वो मैच 26 गेंद रहते 6 विकेट से जीत गया।  वेस्टइंडीज में हुए अगले विश्व कप में भारत और पाकिस्तान का सामना ही नहीं हुआ क्योंकि दोनों अपने अपने ग्रुप से पहले दौर के बाद ही बाद ही आगे नहीं बढ़ सके।  दोनों टीमें 2011 के विश्व कप के सेमीफाइनल में आमने सामने हुईं। पाकिस्तान पर पिछले विश्व कप टूर्नामेंट्स की हार का इतना दबाव बन चुका था कि उसके खिलाडिय़ों ने सचिन तेंदुलकर के चार कैच टपकाए। भारत ने वो मैच 29 रन से जीता था। 2015 के विश्व कप में भी पाकिस्तान की तकदीर नहीं बदली और वो 76 रन से बुरी तरह हारा।
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दोनों देशों के लोगों के लिए मैच किसी जंग से कम नहीं होता

वन डे विश्व कप में भाारत के खिलाफ पाकिस्तान के दयनीय रिकॉर्ड के साथ 2007 में हुए टी-ट्वेंटी विश्व कप के फाइनल की हार और जुड़ी हुई है जिसमें जीतते जीतते मिस्बाह उल हक ने पैडल स्वीप करके आखिरी ओवर में आत्मघाती कार्य किया था। पाकिस्तान पर विश्व कप में भारत से मिली शिकस्तों का ऐसा दबाव है कि मैनचेस्टर में होने वाले मैच से पहले ही उनके पैर कांप रहे होंगे। उन्हें पता है कि और और हार का क्या मतलब होगा। विश्व कप में भारत पाकिस्तान मैच एक मनोवैज्ञानिक जंग है जिसमें हमेशा भारत जीता है। दो विश्व कप के बाद कभी पाक खिलाडिय़ों ने अभद्रता करके टीम इंडिया को नहीं भड़काया लेकिन अब जब भी दोनों टीमें आमने सामने होती हैैं सब कुछ फिर से ताजा हो जाता है। दोनों देशों के लोगों के लिए मैच किसी जंग से कम नहीं होता भले ही विद्वान याद दिलाते रहें कि क्रिकेट सिर्फ एक खेल है।



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