कश्मीर हो या कन्याकुमारी सेना निभाती है अपना फर्ज

2019-03-12T08:51:16Z

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारतीय सेना हर आपदा में नागरिकों को बचाती है यह बात राजधानी में आयोजित 18 आसियान देशों की ज्वाइंट फील्ड ट्रेनिंग मेडेक्स 2019 में सेना के अफसरों ने कही

ताकत वतन की हमसे है..

- 18 देशों की ज्वाइंट एक्सरसाइज मेडेक्स 2019 का आगाज

- सेना के जाबांजों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब, किया मंत्रमुग्ध

- आपदा के वक्त जमीन से लेकर हवा तक रेस्क्यू को तैयार

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW : कश्मीर में बाढ़ आने पर हमने जो मदद की, वह हमारा फर्ज था. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारतीय सेना हर आपदा में नागरिकों को बचाती है. कश्मीर में पत्थरबाजों की हरकतें सेना का हौसला नहीं डिगा सकती है. यही वजह है कि सरकार और लोग आपदा के वक्त सेना पर ही भरोसा करते है. विपरीत परिस्थितियों में सेना ही है जो रेस्क्यू आपरेशन को अंजाम दे पाती है. राजधानी में आयोजित 18 आसियान देशों की ज्वाइंट फील्ड ट्रेनिंग मेडेक्स 2019 में सेना के अफसरों ने यह बात कही. मध्य कमान के कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्ण ने सोमवार को इसका शुभारंभ किया. इस अवसर पर सेना की सिख और गोरखा रेजिमेंट के जवानों ने अपने हैरतअंगेज करतबों से साबित कर दिया कि भारतीय सेना दुनिया के किसी भी देश की सेना से कमतर नहीं है. सेना के मेडिकल कोर कॉलेज और सेंटर स्टेडियम में मेडेक्स 2019 की ओपनिंग सेरेमनी में आसियान और आसियान प्लस में शुमार सभी 18 देशों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देश के झंडे के साथ मार्शल बैंड की धुनों पर मार्च किया.

सिख रेजिमेंट
पारंपरिक युद्ध कौशल (गतका) के प्रदर्शन की जिसमें जवानों ने अपनी जान को हथेली पर रखकर कई हैरतअंगेज करतब दिखाए. तलवारबाजी के साथ खुद को चट्टान की तरह मजबूत दिखाने वाले इस प्रदर्शन ने सबको हैरत में डाल दिया. अपने प्रदर्शन के अंत में पिरामिड बनाकर जवानों ने पाकिस्तान को ललकार कर स्टेडियम में मौजूद बाकी सैन्यकर्मियों में जोश भर दिया

गोरखा रेजिमेंट
असम के गोरखा रेजिमेंट की, जिसके खुखरी डांस ने साबित कर दिया कि दुश्मन की सेनाओं में गोरखा रेजिमेंट का खौफ इतना ज्यादा क्यों है. याद रहे राजधानी निवासी कैप्टन मनोज पांडेय भी गोरखा रेजिमेंट का हिस्सा थे जो कारगिल युद्ध में बहादुरी के साथ लड़ते हुए शहीद हो गये थे.

ज्वाइंट फील्ड ट्रेनिंग मेडेक्स 2019

- सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में आपसी समन्वय और समझ का मंच

- आपदा के वक्त मास कैजुअलिटी को बचाने की ठोस रणनीति

- आपदा के वक्त एयरो मेडिकल एवैकुएशन लोगों को बचाने का एक कारगर तरीका है

- सर्विलांस के जरिए जुटाए गये डाटा की मदद से आपदा के बाद होने वाली महामारी पर भी काबू पाया जा सकता है

इन 18 देशों के 250 प्रतिनिधि आए
मेडेक्स 2019 में शामिल होने 18 देश इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, फिलिपिन्स, म्यांमार, वियतनाम, कंबोडिया, ब्रूनेई एवं लाओस. आसियान प्लस देशों के अमेरिका, रूस, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड एवं दक्षिण कोरिया के 250 प्रतिनिधि आए हैं. इनमें सेना के डॉक्टर्स, नर्सेज और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल है जो 11 से 16 मार्च के बीच फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज के जरिए आपसी समन्वय को मजबूत करेंगे.


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