डोपिंग के साए में पूरे साल छटपटाया Indian Athletics

2011-12-28T17:30:00Z

बीता साल Indian athletics के लिए अच्‍छा नहीं रहा डोपिंग के काले साए ने कई सितारा players को ग्रहण लगाया

वर्ष 2010 में प्रभावी प्रदर्शन के बाद इस साल भारतीय एथलेटिक्स को बुरा दौर देखना पड़ा जब राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के तीन स्वर्ण पदक विजेताओं सहित सात शीर्ष एथलीट डोपिंग के दोषी पाए गए.
 एशियाई खेलों की दोहरी स्वर्ण पदक विजेता अश्विनी अकुंजी और चार गुणा चार सौ मीटर रिले टीम की उनकी साथी सिनी जोस और मनदीप कौर डोपिंग के दोषियों में शामिल रहे. मई और जून में हुए परीक्षण में इन्हें प्रतिबंधित स्टेरायड के सेवन का दोषी पाया गया.

 राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने इन्हें एक-एक साल के लिए प्रतिबंधित किया जिससे अगले साल होने वाले लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने की इनकी संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई. इतना ही नहीं पिछले साल नायक बनी एथलीट इस साल खलनायक बनकर उभरीं.
 इन दागी एथलीटों के लिए हालांकि यह राहत की खबर रही कि पैनल ने कहा कि प्रतिबंधित पदार्थ लेने में इनकी कोई बड़ी गलती नहीं रही क्योंकि प्रतिबंधित पदार्थ उनके शरीर में उस संदूषित फूड सप्लीमेंट के जरिए पहुंचे जिसे यूक्रेन के उनके कोच यूरी ओगोरोदनिक ने मुहैया कराया था. उन्हें इस स्कैंडल के बाद बर्खास्त किया गया.
 इन तीनों के अलावा प्रियंका पंवार, जौना मुर्मू और टियाना मैरी थामस पर एक साल का कम प्रतिबंध लगाया गया जबकि लंबी कूद के खिलाड़ी हरि कृष्णन को दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया. भारतीय खेलों में इस साल डोप प्रकरण छाया रहा और खेल मंत्रालय को इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए न्यायामूर्ति मुकुल मुदगल के नेतृत्व में एक सदस्ईय जांच समिति का गठन करना पड़ा.
 हालांकि पता चला है कि समिति ने एथलीटों को क्लीन चिट देते हुए माना है कि उन्होंने स्वीकार्य सप्लीमेंट जिनसेंग लिया जो प्रतिबंधित पदार्थों से संदूषित था.
 पता चला है कि न्यायमूर्ति मुदगल की खेल मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंधित पदार्थ एथलीटों के शरीर में संदूषित फूड सप्लीमेंट के जरिए ‘दुर्घटनावश’ पहुंचे.  नाडा की प्रयोगशाला में फूड सप्लीमेंट के टेस्ट में पता चला कि यह प्रतिबंधित पदार्थों से संदूषित थे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली.
देश के एथलीट दक्षिण कोरिया में हुई विश्व चैम्पियनशिप में एक भी पदक जीतने में नाकाम रहे जबकि जापान में एशियाई चैम्पियनशिप में उन्होंने ठीक ठाक प्रदर्शन किया.
 चक्का फेंक के एथलीट विकास गौड़ा और लंबी कूद की एथलीट मयूखा जानी फाइनल में पहुंची लेकिन अंत में क्रमश: सातवें और नौवें स्थान पर रहे.
 मयूखा एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की एकमात्र एथलीट रही. भारत ने इस प्रतियोगिता में एक स्वर्ण, दो रजत और आठ कांस्य पदक जीते। मयूखा ने 14 . 11 मीटर के त्रिकूद के नए राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ कांस्य पदक भी जीता.
 इस बीच लंदन ओलंपिक के लिए भारत के पांच एथलीटों ने क्वालीफाई कर लिया है. कृष्णा पूनिया-महिला चक्का फेंक, टिंटू लूका, मखूखा जानी, गुरमीत सिंह पुरुष 20 किमी पैदल चाल और ओम प्रकाश करहाना ने लंदन खेलों में अपनी जगह पक्की कर ली है.



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