इंदु मल्‍होत्रा रह चुकी हैं कार्यस्‍थल पर यौन उत्‍पीड़न वाले चर्चित विशाखा कमेटी की मेंबर

2018-04-27T13:16:45Z

वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बनने वाली इंदु मल्‍होत्रा के नाम भारत के इतिहास में पहली ऐसी महिला होने का गौरव दर्ज हो गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सीजेआई दीपक मिश्रा शुक्रवार को उन्‍हें शपथ दिलाई। सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में ऐसा तीसरी बार होगा जब सर्वोच्‍च न्‍यायालय में दो महिला जस्टिस एक साथ नजर आएंगी। आइए जानते हैं 61 वर्षीय इंदु मल्‍होत्रा की वो बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट
नई दिल्ली (प्रेट्र)।
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद सरकार ने एक दिन पहले ही उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर करने की घोषणा कर दी। सीजेआई दीपक मिश्रा ने शुक्रवार को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर शपथ दिला दी। इससे पहले वे सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर काम कर रही थीं। 2007 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में वरीष्ठ वकील के तौर पर मनोनित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में वे दूसरी महिला थीं, जिन्होंने 30 सालों के अंतर पर वरीष्ठ वकील बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

सुप्रीम कोर्ट में 7वीं महिला जस्टिस
स्वतंत्र भारत के इतिहास में मल्होत्रा देश के सर्वोच्च न्यायालय में 7वीं महिला हैं जो जस्टिस बनी हैं। उनसे पहले 6 महिलाएं जस्टिस के पद पर रह चुकी हैं। वे पहली हैं जो वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बनी हैं जबकि बाकी 6 महिलाएं देश के विभिन्न हाईकोर्ट से पदोन्नत होकर यहां पहुंची थीं। वर्तमान समय में उनके अलावा सुप्रीम कोर्ट एक अन्य महिला जस्टिस आर भानुमति ही हैं।
इंदु 1983 से कर रही हैं वकालत
जस्टिस इंदु मल्होत्रा 1983 से विधि व्यवसाय से जुड़ी हैं। उन्होंने तब दिल्ली बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया था। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड में वे 1988 में आईं। वे संवैधानिक महत्व के कई मामलों से जुड़ी रही हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों से जुड़े शिक्षा मामलों को लेकर नियमित पैरवी करने वाले प्रमुख वरीष्ठ वकीलों में से वे एक थीं।
चर्चित विशाखा कमेटी में सदस्य
जस्टिस मल्होत्रा कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़ी विशाखा कमेटी के 10 सदस्यों में से एक थीं। यह कमेटी सर्वोच्च न्यायालय ने कोर्ट में यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को लेकर गठित की गई थी।
हरियाणा के लिए सुप्रीम कोर्ट में वकील
सर्वोच्च न्यायालय में 1991 से लेकर 1996 तक वे हरियाणा सरकार के लिए बतौर स्टैंडिंग काउंसिल काम कर चुकी हैं।
सरकारी निगमों के मामले भी देखे
उन्होंने तमाम सार्वजनिक क्षेत्र के निगमों के लिए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की है। इनमें सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए), कौंसिल फॉर साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल (सीएसआईआर) और इंडियन कौंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) जैसे संस्थान शामिल हैं।
    
बेंगलुरू में जन्म, डीयू से लॉ
जस्टिस मल्होत्रा का जन्म बेंगलुरू में हुआ था। नई दिल्ली के कारमेल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई के बाद उन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में बीए ऑनर्स किया। दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की।
तीसरा मौका जब दो महिला जस्टिस एक साथ
जस्टिस इंदु मल्होत्रा के शपथ लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में यह तीसरा मौका है जब एक साथ दो महिला जस्टिस नजर आएंगी। वर्तमान में एक अन्य महिला जस्टिस आर भानुमति हैं। जस्टिस आर भानुमति की नियुक्ति के साथ सुप्रीम कोर्ट में ऐसा दूसरा मौका आया। उस समय जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट में दूसरी अन्य महिला जस्टिस थीं। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की नियुक्ति के साथ सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहला मौका आया था जब देश के सर्वोच्च न्यायालय में दो महिलाएं एकसाथ बतौर जस्टिस काम करने जा रही थीं, उस समय सुप्रीम कोर्ट में दूसरी अन्य महिला जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा थीं।



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