यात्री अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें

2019-07-20T06:00:35Z

यात्रीगण ध्यान दें। ट्रेन में सफर करते समय अपने सामान की रक्षा स्वयं करें। क्योंकि ट्रेनों में जीआरपी और आरपीएफ पर चोर भारी पड़ रहे हैं। ट्रेनों में चोर पलभर में सामान लेकर चंपत हो जा रहे हैं। इस साल जनवरी से मई तक जीआरपी थाना पटना में चोरी के कुल 569 मामले दर्ज हुए हैं। अगर औसतन देखा जाए तो हर रोज ट्रेन में चोरी की 4 घटनाएं हो रही हैं। ट्रेन में चोरी की घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी आरपीएफ और जीआरपी दोनों की है लेकिन इसके बाद भी चोरी की घटनाएं रूक नहीं रही हैं। लगातार चोरी की घटना के बाद जीआरपी और आरपीएफ पर सवाल खड़ा होने लगा है।

मार्च-अप्रैल में ज्यादा चोरी

अगर पुलिस की वेबसाइट के अनुसार जनवरी महीने में 47 चोरी की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं, मार्च और अप्रैल में अचानक बढ़ गईं। इन दोनों महीने में 195-195 चोरी की घटनाएं दर्ज की गईं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ट्रेनों में चोरी की घटनाओं पर को रोकने में पुलिस असफल क्यों हो रही है। ट्रेन के अंदर अपराध कंट्रोल करने के लिए जीआरपी के पास ठोस फॉर्मूला नहीं है। जीआरपी अधिकारी कहते हैं कि ट्रेन में चलने वाले अपराधी की पहचान करना आसान नहीं है।

सीसीटीवी भी खराब

हमसफर एक्सप्रेस में लगे सीसीटीवी भी खराब हैं। हाल ही में हमसफर एक्सप्रेस के बी-1 कोच की 17 नंबर सीट पर सफर कर रहे बैंक अधिकारी प्रवीण ठाकुर कानपुर में खाना खाने के बाद सो गए और चोरों ने उनका सारा सामान गायब कर दिया। चोर जाते-जाते और भी कुछ यात्रियों के सामान पर हाथ साफ कर दिए। उनके बैग में सोने की चेन के साथ ही कान के टॉप्स व अन्य ज्वेलरी के साथ 10-12 हजार नकदी व महंगे कपड़े थे। प्रवीण ठाकुर ने बताया कि ट्रेन में लगे सीसीटीवी के कारण ही उनलोगों ने हमसफर से टिकट बुक कराया था लेकिन ये भी सुरक्षित नहीं है।

नहीं मिल सका फुटेज

ट्रेन जब पटना जंक्शन पर रुकी तो प्रवीण ठाकुर ने कोच अटेंडेंट से सीसीटीवी का फुटेज देखने को कहा तो बताया गया कि यह खराब है। उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराते समय सीसीटीवी कैमरे के फुटेज की जांच करने का भी अनुरोध किया तो पुलिस अधिकारियों ने इससे इनकार कर दिया।

अधिकांश मामले का खुलासा नहीं

ट्रेन में सामान चोरी हो जाने के बाद लोग जब शिकायत करने जाते हैं तब अधिकांश मामले में पुलिस सिर्फ सनहा दर्ज कर लेती है लेकिन इसके बाद पुलिस उसे ठंडे बस्ते में डाल देती है। लोग एक दो दिन तक चक्कर लगाते हैं लेकिन बाद में वो शांत होकर बैठ जाते हैं।


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