आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा सूबा है उत्‍तर प्रदेश। कहते हैं देश की राजनीति का रुख यहां बहने वाली हवा से तय होता है। inextlive.com की स्‍पेशल सीरिज में जानिए उनकी कहानी जिन्‍हें मिली इस सूबे के 'मुख्‍यमंत्री' की कुर्सी। इस कड़ी में सबसे पहला नाम आता है उत्‍तर प्रदेश के पहले मुख्‍यमंत्री गोविंद बल्‍लभ पंत का जिन्‍होंने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले लिए जो इतिहास के पन्‍नों में दर्ज हो गए

Story by : Abhishek Kumar Tiwari
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महत्वपूर्ण फैसले :
पंत जी का राजनीतिक जीवन साल 1937 में शुरु हुआ। पंत जी स्वतंत्र भारत के उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे।  उन्होंने 1946 से लेकर 1954 तक मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पंत जी ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे। जमींदारी उन्मूलन कानून को प्रभावी बनाने में गोविंद वल्लभ पंत का अहम योगदान रहा। इसके अलावा पंत जी ने हिंदू विवाह कानून बदलने की पैरवी की। हिंदू व्यक्ित कानूनन सिर्फ एक ही स्त्री से शादी कर सकता है, पंत जी इसके पक्षधर थे। साथ ही हिंदू महिला के तलाक देने के अधिकार को लेकर पंत जी का समर्थन हमेशा रहा।

व्यक्ितगत जीवन :
गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितम्बर, 1887 ई. वर्तमान उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले के खूंट नामक गांव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम गोविंदी था जबकि पिता मनोरथ पंत थे। इस परिवार का संबंध कुमाऊं की एक अत्यन्त प्राचीन और सम्मानित परम्परा से है। गोविंद बल्लभ पंत ने 1905 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया और 1909 में उन्होंने कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की और वकालत करने लगे। काकोरी मुकद्दमे ने एक वकील के तौर पर उन्हें पहचान और प्रतिष्ठा दिलाई। पंत ने साल 1916 में कलावती से शादी की। जिनसे उन्हें एक बेटा (कृष्ण चंद्र पंत) हुआ जो बाद में राजनेता बना। इसके अलावा उनकी दो बेटियां भी थीं लक्ष्मी और पुष्पा।

4. पंत जी को वकील के तौर पर पहली फीस 5 रुपये मिली थी।
5. 1914 में काशीपुर में ‘प्रेमसभा’ की स्थापना पंत जी के प्रयत्नों से ही हुई। ब्रिटिश शासकों ने समझा कि समाज सुधार के नाम पर यहाँ आतंकवादी कार्यो को प्रोत्साहन दिया जाता है। फलस्वरूप इस सभा को हटाने के अनेक प्रयत्न किये गये पर पंत जी के प्रयत्नों से वह सफल नहीं हो पाये। 1914 में पंत जी के प्रयत्नों से ही ‘उदयराज हिन्दू हाईस्कूल’ की स्थापना हुई। राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेने के आरोप में ब्रिटिश सरकार ने इस स्कूल के विरुद्ध मुकदमा दायर कर नीलामी के आदेश पारित कर दिये। जब पंत जी को पता चला तो उन्होंनें चन्दा मांगकर इसको पूरा किया।
6. भारत रत्न सम्मान उनके ही काल में आरम्भ किया गया। सन् 1957 में गणतन्त्र दिवस पर महान देशभक्त, कुशल प्रशासक, सफल वक्ता, तर्क का धनी एवं उदारमना पन्त जी को भारत की सर्वोच्च उपाधि 'भारत रत्न' से विभूषित किया गया।
7. 7 मार्च 1961 को गोविंद बल्लभ पंत का निधन हो गया।

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Posted By: Abhishek Kumar Tiwari