सुप्रीम कोर्ट ने करीब 18 महीने पुराने आईपीएल स्पॉट फ़िक्सिंग मामले में फ़ैसला सुनाते हुए गुरुनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा को सट्टेबाज़ी का दोषी माना है.


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बीसीसीआई के क्रियाकलाप सार्वजनिक कार्य हैं और अनुच्छेद 226 के तहत उनकी समीक्षा की जा सकती है.अदालत ने बीसीसीआई को छह हफ़्ते में नए चुनाव करवाने का आदेश दिया है.साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन को तब तक चुनाव लड़ने से रोक दिया है जब तक कि उनके आईपीएल में व्यावसायिक हित हैं.एक नज़र आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले पर30 जुलाई 2013: बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष आदित्य वर्मा ने बीसीसीआई के ख़िलाफ़ बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की.5 अगस्त 2013: बीसीसीआई ने दो जजों की कमेटी की जांच रिपोर्ट को ख़ारिज़ करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की.13 सितंबर 2013: बीसीसीआई ने श्रीसंत और चव्हाण पर आजीवन प्रतिबंध लगाया.


7 अक्टूबर 2013: सुप्रीम कोर्ट ने फ़िक्सिंग मामले की जांच के लिए जस्टिस मुदगल कमेटी बनाई.10 फ़रवरी 2014: मुद्गल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी.अदालत ने बीसीसीआई को छह हफ़्ते में नए चुनाव करवाने का आदेश दिया और श्रीनिवासन पर तब तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा दिया जब तक उनका आईपीएल में व्यावसायिक हित है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआई के क्रियाकलाप सार्वजनिक कार्यों की श्रेणी में आते हैं और उनके कामों की समीक्षा की जा सकती है.

Posted By: Satyendra Kumar Singh