मानव होना भाग्य है कवि होना सौभाग्य

2018-07-20T06:00:03Z

आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य

मानव होना भाग्य है कवि होना सौभाग्य

Meerut। यकीनन, कवि गोपाल दास नीरज की ये पंक्तियां ही उनके व्यक्तित्व का जीवन चरित्र है। कवि के रूप में गोपालदास नीरज ने देश-दुनिया में ख्याति बटोरी तो बॉलीवुड में उनके लिखे गीतों की धमक आज भी हर लबों पर मुस्कराहट की बानगी देती है। क्रांतिधरा मेरठ से भी नीरज का पुराना नाता रहा है। कई किस्से और कहानियां हैं, जो उनकी जिंदादिली की तस्दीक करती हैं।

जिंदगी की राह तलाशते पहुंचे मेरठ

करीब 75 वर्ष पूर्व उनका नाता मेरठ से 1943 में जुड़ा। या यूं कहें कि क्रांतिधरा महाकवि के लिए कर्तव्यधरा साबित हुई। तब कोई मंच नहीं था और नीरज जिंदगी की राह तलाश रहे थे।

मेरठ कॉलेज में रहे लेक्चरर

दिल्ली में महाकवि की मुलाकात मेरठ के इंद्रिय दमन रस्तोगी से हुई। आग्रह पर महाकवि प्रथम बार एक कवि सम्मेलन में मेरठ आए। वे मेरठ कॉलेज के हॉस्टल में रुके थे। फिर 1955 में मेरठ कॉलेज में हिंदी के लेक्चरर नियुक्त किए गए। अध्यापन के दौरान प्रबंध समिति के साथ लंबे विवाद और आरोप-प्रत्यारोप से क्षुब्ध होकर उन्होंने लेक्चरर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन पर लगे आरोपों की जांच मेरठ कॉलेज ने कराई, तो सभी आरोप झूठे साबित हुए। कॉलेज ने उन्हें दोबारा पद पर जॉइन करने को लेटर लिखा, लेकिन नीरज ने स्वाभिमान को बड़ा मानते हुए इनकार कर दिया।

सुख-दुख के साथी

तत्कालीन नामी व्यक्तित्व राजाराम मित्तल, कमला चौधरी, देवीशरण रस्तोगी आदि नीरज के सुख-दुख में साथ रहे थे। इसके बाद महाकवि का लगातार मेरठ आना-जाना लगा रहा। ओज के कवि और विश्वप्रसिद्ध डॉ। हरिओम पंवार ने महाकवि की मृत्यु को अपूर्णनीय क्षति बनाते हुए कहा कि हमारे मंच के सबसे बड़े संरक्षक नहीं रहे।

दिल जीतना जानते थे नीरज

शहर में इप्टा के प्रमुख शांति वर्मा ने कवि गोपाल दास नीरज के संस्मरणों को याद करते हुए बताया कि एक प्रोग्राम के दौरान नीरज से भेंट हुई थी, इसके बाद तो दोनों दोस्त बन गए, वे कहते हैं कि दरअसल, नीरज को हर किसी का दिल जीतना आता था।

इप्टा से भी जुड़े

नीरज के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण दिन मेरठ में भी गुजरे। शांति वर्मा बताते हैं कि मेरठ कॉलेज में नीरज प्रवक्ता के पद पर तैनात रहे थे, लेकिन कुछ कारणों से त्याग पत्र देकर चले गए। मेरठ में कई इप्टा की ओर से आयोजित नुक्कड़ नाटकों में भी उन्होंने शिरकत की थी।

कुछ प्रमुख आयोजन

29 मार्च 2008

ऐतिहासिक नौचंदी मेले के दौरान मुशायरे में शिरकत की।

27 नवंबर 2009

जिला प्रशासन द्वारा पं। प्यारेलाल स्मारक हॉल में आयोजित मुशायरे में शिकरत की।

16 नवंबर 2011

भैंसाली ग्राउंड में आयोजित मुशायरे में शिरकत की।


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