दूसरे विश्व युद्घ में 20 दिसंबर को हावड़ा ब्रिज गिराने को जापान ने किया था कलकत्ता पर हवार्इ हमला

2018-12-20T12:03:09Z

जापानी एयरफोर्स ने आज ही के दिन यानी कि 20 दिसंबर को 1943 में कलकत्ता पर बम गिराया था। उसका मकसद हावड़ा पूल को गिराना था।

कानपुर। इतिहास में भारत के लिए आज का दिन सबसे खराब साबित हुआ था। भारतीय एयरफोर्स की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, जापानी एयरफोर्स ने 20 दिसंबर, 1943 को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान कलकत्ता पर हमला कर दिया था। कहा जाता है कि इस हमले का मेन मकसद हावड़ा पूल को गिराना था। बता दें कि द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत पहले तो ब्रिटेन का सपोर्ट नहीं कर रहा था लेकिन बाद करने लगा। ब्रिटिश राज से छुटकारा पाने के लिए युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस जापान और जर्मनी से बात कर रहे थे और ऐसा लग भी रहा था कि भारत को ब्रिटिशर्स से छुटकारा मिल जाएगा लेकिन जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ता गया लोगों को ये पता चल गया था कि जापान इसमें कोई मदद नहीं करने वाला है।
ब्रिज की खासियत
दुनिया के सबसे लंबे ब्रिजों में एक हावड़ा ब्रिज का निर्माण कार्य साल 1936 में शुरू हुआ था और यह 1942 में पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 फरवरी, 1943 को इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया था। यह ब्रिज कोलकाता में हुगली नदी के ऊपर स्थित है और इसे कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने के लिए बनाया गया था। इस ब्रिज को बनाने में 26 हजार 500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया था। जब यह बनकर तैयार हुआ था, तब यह दुनिया का तीसरा सबसे लंबा ब्रिज था। बता दें कि यह ब्रिज सिर्फ नदी के दोनों किनारों पर बने 280 फीट ऊंचे दो पायों पर टिका है और उन दोनों पायों के बीच की दूरी डेढ़ हजार फीट है। नदी के बीच में कहीं कोई पाया नहीं है।
मारे गए कई लोग
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार की ताकत को कमजोर करने के लिए जापान ने कलकत्ता पर हमला करने का फैसला किया और 20 दिसंबर, 1943 को जापानी एयरफोर्स ने कलकत्ता पर बम गिराना शुरू कर दिया। उनका मकसद दमदम एयरपोर्ट, हावड़ा ब्रिज और डॉकयार्ड को पूरी तरह से नष्ट करना था ताकि आवागमन की चीजों को ठप किया जा सके। जब 7 दिसंबर, 1941 को जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर पर हमला किया, तभी से अनुमान लगाया जा रहा था कि वो कलकत्ता पर भी हमला कर सकता है। जब जापान ने हमला शुरू किया, तब कलकत्ता में विक्टोरिया मेमोरियल सहित शहर के सभी बड़ी और खास इमारतों को काले रंग से रंग दिया गया था ताकि उन्हें उनके बारे में पता न चल सके। दरअसल, जापानी एयरफोर्स वाले सिर्फ रात को हमला करते थे क्योंकि कलकत्ता में दिन के समय एयर-डिफेंस बढ़िया था और रात में वहां कोई भी सुविधा नहीं थी। इस हमले में 500 से अधिक लोग मारे गए थे।

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