झारखंड से मैट्रिक और इंटर करने वाले सावधान! राज्य में चल रहा फर्जी बोर्ड का खेल

2019-05-29T10:25:56Z

रांची में अजब गजब खेल हो रहा है चंद पैसों की लालच में स्टूडेंट्स के सीधे लाइफ से ही खेला जा रहा है फर्जी संस्थाओं के इस कारनामे से स्टूडेंट्स का कॅरियर बर्बाद हो रहा है

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RANCHI : रांची में अजब गजब खेल हो रहा है. चंद पैसों की लालच में स्टूडेंट्स के सीधे लाइफ से ही खेला जा रहा है. फर्जी संस्थाओं के इस कारनामे से स्टूडेंट्स का कॅरियर बर्बाद हो रहा है. ताजा वाकया झारखंड स्टेट ओपेन स्कूल से जुड़ा है. यह स्कूल खुद को मान्यता प्राप्त बोर्ड बताता है और इसने हजारों स्टूडेंट्स को अपने संस्थान से मैट्रिक और इंटरमीडिएट बोर्ड का सर्टिफिकेट दे दिया है. अब यह सर्टिफिकेट उनके लिए बड़ा धोखा साबित हो रहा है. सर्टिफि केट को लेकर जब वे बाहर के संस्थानों में एडमिशन कराने के लिए पहुंच रहे हैं तो उनका सर्टिफिकेट फर्जी बता कर एडमिशन नहीं लिया जा रहा है. रांची जिला प्रशासन की जांच में भी यह स्पष्ट किया गया है कि इन संस्थाओं को किसी भी जगह से मान्यता ही नहीं मिली है. बुरे फंसे ये स्टूडेंट्स अब अपनी इस परेशानी को लेकर दर दर भटक रहे हैं.

क्या है मामला?
झारखंड में दो संस्थान (झारखंड एकेडमिक ओपेन बोर्ड बोकारो) और (झारखंड स्टेट ओपेन स्कूल रांची ) खुद को ओपेन स्कूल बोर्ड बताकर स्टूडेंट्स को मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा लेकर सर्टिफिकेट दे रहे हैं. लेकिन इस सर्टिफिकेट से स्टूडेंट्स का ना एडमिशन हो पा रहा है, ना ही नौकरी लग रही है. इन संस्थानों से सर्टिफिकेट पाये कुछ स्टूडेंट्स ने इसकी शिकायत बोर्ड से की. इस शिकायत के बाद जांच की गयी तो भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्कूली एवं साक्षरता विभाग द्वारा भी इन संस्थाओं को मान्यता नहीं दिये जाने की बात सामने आई है. इसके बाद मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार ने 18 जुलाई को दोनों संस्थाओं को शो कॉज नोटिस देकर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया. इस पर राज्य माध्यमिक निदेशालय ने बोकारो डीसी और रांची डीसी को पत्र लिखकर दोनों संस्थानों का फिजिकल जांच का आदेश दिया. जिसके बाद दोनों जिलों के डीएसी ने संस्थानों में जाकर जांच की तो यह पाया कि इन संस्थानों को किसी भी जगह से मान्यता नहीं मिली है, दोनों संस्थान फर्जी तरीके से चल रहे हैं.

सिर्फ जैक देता है सर्टिफिकेट
झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से सभी को सूचना दी गयी है कि राज्य में इकलौता झारखंड एकेडमिक काउंसिल जैक बोर्ड ही मैट्रिक और इंटरमीडिएट के स्टूडेंट्स का परीक्षा लेता है और सर्टिफिकेट भी देता है. दूसर कोई भी संस्थान नहीं है, जो भी संस्थान डिग्री देने की बात कह रहा है वह फर्जी डिग्री बांट रहा हैं.

छात्रों को काउंसेलिंग से रोका
एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक यूनिवर्सिटी एकेटीयू उप्र राज्य प्रवेश परीक्षा यूपीएसईई की काउंसेलिंग में झारखंड स्टेट ओपन स्कूल के अभ्यर्थियों को शामिल होने से रोक दिया गया है. इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में फर्जी मार्कशीट के मामले का खुलासा होने के बाद एकेटीयू प्रशासन की चार सदस्यीय कमेटी ने जांच शुरू कर दी है. यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट में अमान्य मार्कशीट मिलने पर काउंसेलिंग में कैंडिडेट्स को बैठने नहीं दिया जाएगा. एकेटीयू ने भी बीते 9 मई को फर्जी मार्कशीट के सहारे इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिले का मामला पकड़ा था. विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक 316 स्टूडेंट्स ने झारखंड स्टेट ओपन स्कूल से जारी इंटर की मार्कशीट से सत्र 2016 से 2019 तक कॉलेजों में दाखिले ले लिए, जबकि इस शैक्षिक प्रमाण पत्र की वैधानिकता वहां की सरकार ने मान्य नहीं किया है. वहीं, इस साल 2019 में भी दाखिले के लिए कई अभ्यर्थियों ने आवेदन में इन्हीं स्कूल की मार्कशीट लगाया गया है. अब जांच रिपोर्ट आने के बाद दाखिले निरस्त किए जाएंगे.

सिर्फ साइट पर हैं डिटेल्स
यूनिवर्सिटी प्रशासन के संज्ञान में आया कि झारखंड स्टेट ओपन स्कूल की वेबसाइट पर जारी प्रमाण पत्र की सूचना उपलब्ध है, जबकि झारखंड की सरकार ने सत्र 2016-17, 2017-18 और 2018-19 के शैक्षिक प्रमाण पत्रों को मान्य नहीं किया है. इसके बाद भी झारखंड स्टेट ओपन स्कूल से 12वीं पास सत्र 2016-17 में लगभग 42, सत्र 2017-18 में लगभग 131 और सत्र 2018-19 में 143 अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय से सम्बद्ध संस्थानों में दाखिला ले लिया है. इतना ही नहीं अधिकतर स्टूडेंट्स फ‌र्स्ट ईयर पास करके बीटेक सेकेंड और थर्ड ईयर में पढ़ाई भी कर रहे हैं, अब इनकी मार्कशीट सही न होने की वजह से इनका फ्यूचर अधर में अटक गया है.

Posted By: Prabhat Gopal Jha

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