JAMSHEDPUR: महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शुक्रवार की रात करीब 12.30 बजे एक गर्भवती एंबुलेंस के लिए भटकती रही। वह सरायकेला-खरसावां जिले के जीवनपुर गांव से आई थी, लेकिन, महिला एवं प्रसूति विभाग में भीड़ इतनी अधिक थी कि उसने दूसरे अस्पतालों में ही जाना बेहतर समझा।

आर्शी परवीन नामक इस महिला ने बताया कि यहां न तो बेड है और न ही संसाधन। ऐसे में वह वापस घर जाना चाहती है। घर के पास ही नर्सिग होम में वह प्रसव कराएगी। दरअसल, लॉकडाउन की वजह से कई मरीज ठीक होकर अस्पताल में ही फंसे हुए हैं। जिसके कारण बेड की कमी और पौष्टिक आहार का संकट गहराने लगा है। मेडिकल वार्ड में भर्ती सुखराई हेम्ब्रम कहती हैं कि घाटशिला में दूसरे प्रदेशों से लोग आ रहे हैं, लेकिन मैं यहां रह कर भी अपने घर नहीं जा पा रहीं हूं। इसी तरह, एक दर्जन से अधिक मरीज फंसे हुए हैं। वहीं, खासमहल स्थित सदर अस्पताल सहित कई निजी अस्पतालों में भी मरीज फंसे हुए हैं।

ठीक हुए लोगों को भेजा जाएगा घर

जमशेदपुर से लोकसभा सदस्य विद्युत वरण महतो शनिवार को एमजीएम अस्पताल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अधीक्षक डॉ संजय कुमार, उपाधीक्षक डॉ। नकुल प्रसाद चौधरी सहित अन्य लोगों के साथ बैठक की। इसमें सबसे बड़ी समस्या स्वस्थ्य हुए लोगों के फंसने की सामने आई। सांसद ने कहा कि 108 एंबुलेंस लाकर छोड़ जाती, लेकिन ठीक होने के बाद लोगों को घर तक भेजने का कोई साधन नहीं है। इसकी व्यवस्था की जाएगी। साथ ही उन्होंने कोरोना मरीजों के लिए बने आइसोलेशन वार्ड की क्षमता बढ़ाकर दो हजार बेड करने की इच्छा जाहिर की।

एक-दूसरे से सटा है बेड

एमजीएम के इमरजेंसी विभाग में न तो कोरोना वायरस का ख्याल रखा जा रहा है और न ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) के गाइडलाइंस का। कोरोना से बचने के लिए भी तीन फीट की दूरी तय की गई है और एमसीआइ का निर्देश भी है कि दो बेड के बीच कम से कम तीन फीट की दूरी अनिवार्य है, लेकिन यहां नियम को ताक पर रखकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सभी बेड एक दूसरे से सटे हुए हैं। 10 बेड के इमरजेंसी विभाग में 38 बेड लगाए गए हैं और कम से कम 60 मरीज भर्ती है। अधिकांश लोगों के मुंह पर मास्क भी नहीं है।

Posted By: Inextlive