दुर्गा पूजा को लेकर नहीं आया कोई दिशा-निर्देश

Updated Date: Wed, 16 Sep 2020 12:48 PM (IST)

JAMSHEDPUR: कोरोना महामारी के बीच दुर्गा पूजा को लेकर लौहनगरी में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। सरकार और प्रशासन की ओर से स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं आने के कारण पूजा आयोजन समितियों के साथ श्रद्धालु भी पूजा की तैयारी को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। पूजा में अभी एक माह का समय है, जो तैयारी के लिए नाकाफी है। वैसे सभी पूजा कमेटी पूजा को लेकर तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन कहीं भी बड़े स्तर पर पूजा पंडाल का निर्माण नहीं किया जा रहा है। कोलकाता के बाद जमशेदपुर में ही दुर्गोत्सव का आयोजन व्यापक पैमाने पर किया जाता है। प्रतिवर्ष धूमधाम के साथ मनाए जाने वाले दुर्गोत्सव इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण फीका रहेगा। श्रद्धालुओं का कहना है कि उत्साह फीका रहे तो रहे लेकिन परंपरा का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। सरकार की ओर से दिशा-निर्देश नहीं आने के कारण स्थानी प्रशासन भी पूजा समितियों को किसी प्रकार का आश्वासन देने में असमर्थ है। प्रशासन भी सरकार के दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

एसडीओ से मिले बंग बंधु

बंग बंधु संस्था का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पांच सूत्री मांगों को लेकर अनुमंडल पदाधिाकरी से मिला और दुर्गा पूजा के दौरान परंपरा का निर्वाह करने की स्वीकृति देने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कोरोना संक्रमण के इस दौर में दुर्गा पूजा के दौरान सरकार और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रतिनिधमंडल ने कहा कि इसके साथ ही सरकार और प्रशासन को परंपरा के अनुपालन के लिए कुछ रस्मों को मनाने की छूट देने की आवश्यकता है। दुर्गा पूजा प्रमुख्य त्योहारों में एक है। बंग बंधु के उपाध्यक्ष अपर्णा गुहा के नेतृत्व में एसडीओ से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देवी महामाया की पूजन में ढाकी व ढोल का विशेष महत्व है। ऐसे में पूजा के दौरान ढाकी या ढोल बजाने की अनुमति दी जाए। महाष्टमी के दिन मां को पुष्पांजलि देने की परंपरा रही है। शारीरिक दूरी और लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए पुष्पांजलि देने, भोग वितरण करने, विजया दशमी के दिन मां को ¨सदूर दान करने और पूजा के दौरान लाउडस्पीकर का प्रयोग करने की अनुमति देने की मांग की गई है, ताकि श्रद्धालु घर बैठे पूजा के साथ चंडी पाठ व आरती सुन सके। प्रतिनिधिमंडल में अपर्णा गुहा के साथ नीता सरकार, अनीत भट्टाचार्य, स्वरूप बनर्जी, विनोद डे, अभिजीत, संजीत दास, बपपा पाल आदि शामिल थे।

बांग्ला में महिषासुरमर्दिनी के प्रसारण की मांग

महालया के दिन भोर में रेडियो प्रसारक बीरेंद्र कृष्ण भद्र द्वारा पाठ किया गया महालया (महिषासुर मर्दिनी) का प्रसारण करने के लिए लौहनगरी के बंग भाषियों ने आकाशवाणी से गुहार लगाई है। इसको लेकर बंग भाषियों का प्रतिनिधमंडल जमशेदपुर आकाशवाणी के अधिकारों मिला और 17 सितंबर को बांग्ला भाषा में महिषासुर मर्दिनी का प्रसारण करने की मांग की। प्रतिनिधमंडल ने कहा कि दुर्गा पूजा के प्रारंभ में महालया का एक बिशेष स्थान है। महालया दिन महिषासुरमर्दिनी का प्रसारण रेडियो में पहले होता था, लेकिन समय के साथ जमशेदपुरवासी इससे वंचित हो गए। मौके पर झारखंड बंग भाषी समन्वय समिति के महासचिव संदीप सिन्हा चौधरी ने कहा कि झारखंड में बंग भाषियों की संख्या 42 प्रतिशत है। जमशेदपुर आकाशवाणी में दो चैनल है। केंद्र चाहे तो एक में ¨हदी व एक में बांग्ला में महिषासुरमर्दिनी का प्रसारण कर सकती है। प्रतिनिधिमंडल में बंगाल क्लब, मिलनी, सबुज कल्याण संघ, झारखंड बंग भाषी समन्वय समिति, अमल संघ, बंग बंधु, सिंहभूम बंगियो एसोसिएशन, कदमा न्यू फार्म एरिया दुर्गा पूजा कमेटी आदि के सदस्य शामिल थे।

Posted By: Inextlive
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