रांची: राजधानी के करीब ढाई लाख लोगों के लिए राहत की खबर है। हटिया डैम में पानी के लिए निर्भर रहने वाले लाखों की आबादी को अगले 3 महीने तक पानी की सप्लाई होती रहेगी, क्योंकि डैम का जलस्तर 5 से 6 फीट बढ़ गया है। 15 दिन पहले डैम पूरी तरह सूखने के कगार पर था और तीन से चार फीट तक ही पानी बचा हुआ था। इससे लाखों की आबादी को पानी सप्लाई करने को लेकर अधिकारी भी परेशान थे। अगर डैम सूखने की नौबत आ जाएगी तो इतनी बड़ी आबादी को पानी की आपूर्ति करना बड़ा सवाल हो जाएगा। लेकिन कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश के कारण पानी का लेवल धीरे-धीरे ऊपर आता जा रहा है। फिलहाल हटिया डैम में पानी का लेवल 16 फीट तक पहुंच गया है।

1962 में बना हटिया डैम

वर्ष 1962 में हटिया डैम का निर्माण किया गया था। उस समय रांची की आबादी महज 1.5 लाख थी। आज झारखंड अलग राज्य बनने के बाद राजधानी बनी और रांची की आबादी 15 लाख से अधिक है। केवल एचइसी प्लांट और आसपास की आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बनाये गये हटिया डैम पर अब शहर के करीब ढाई लाख लोग आश्रित हैं। स्थापना के बाद से अब तक डैम के स्वरूप में परिवर्तन करने, उसकी जलशोधन क्षमता बढ़ाने, जलस्तर में वृद्धि करने की कोई योजना नहीं बनी। 2016 में हटिया डैम से गाद हटा, उसकी गहराई बढ़ाने का प्रयास जरूर किया गया था। लेकिन, वह पर्याप्त नहीं था।

इस साल सबसे कम जलस्तर

हटिया डैम से रोज 8.50 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन, डैम में पानी की कमी के कारण इस वर्ष 15 अप्रैल से सप्ताह में दो दिन राशनिंग कर आपूर्ति की जा रही है। अभी सप्ताह में पांच दिन डैम से आठ एमजीडी पानी की आपूर्ति की जाती है। हटिया डैम से पहली बार वर्ष 2011 में पानी की राशनिंग की गयी थी। उसके बाद फिर से वर्ष 2015 और 2016 में राशनिंग की जरूरत पड़ी। वर्ष 2018 में अच्छी बारिश की वजह से डैम का जलस्तर अधिकतम रिकार्ड किया गया। लेकिन, इस वर्ष फिर से डैम में पानी कम हो गया है। हटिया डैम का पानी में कोई नाला नहीं गिरता है। इस वजह से राजधानी के अन्य डैमों की अपेक्षा हटिया डैम का पानी ज्यादा शुद्ध है।

डैम में नहीं पहुंच पा रहा पानी

रिंग रोड का निर्माण मौजूदा जमीन को ऊंचा करके किया गया है। ऐसे में रोड के दूसरी ओर से बारिश का पानी आकर वहां पर रुकता है। पानी बहाव डैम की ओर न होकर दूसरी ओर हो रहा है। कई जगहों पर पानी बहाव का रास्ता तो छूटा हुआ है, लेकिन वह बहाव के लिए पर्याप्त नही है। लोगों का कहना है कि बारिश का बहुत कम पानी डैम में जा रहा है। हटिया डैम के गहरीकरण की कोई योजना राज्य सरकार की नहीं है। वर्ष 2016 में डैम के कुछ हिस्से में गहरीकरण का काम करवाया गया था। लेकिन, बाद में उसे बंद कर दिया गया। जानकार बताते हैं कि नये विधानसभा भवन के निर्माण के दौरान जमीन के समतलीकरण के लिए मिट्टी की जरूरत थी। उसी वजह से हटिया डैम से गाद हटाने के नाम पर मिट्टी निकाली गयी।

काम भी बंद कर दिया गया

जरूरत पूरा होने पर डैम के गहरीकरण का काम बंद कर दिया गया। हटिया डैम से धुर्वा, हिनू और डोरंडा क्षेत्र के अलावा अशोक नगर में भी पानी की सप्लाई की जाती है। डैम में पानी की कमी के कारण करीब दो लाख लोग पानी की किल्लत झेलते हैं। पूरी आबादी नगर निगम के टैंकरों पर ही आश्रित हो जाती है। इलाके में चापानलों और सार्वजनिक कूपों की संख्या कम रहने के कारण परेशानी बढ़ जाती है।

Posted By: Inextlive