मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राजस्व भूमि सुधार एवं निबंधन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की


रांची(ब्यूरो)। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राजस्व, भूमि सुधार एवं निबंधन विभाग की समीक्षा के क्रम में दाखिल खारिज के हज़ारों मामले के लंबित होने एवं निरस्त किए जाने को गंभीरता से लिया । उन्होंने कहा कि जब ऑनलाइन म्यूटेशन की व्यवस्था शुरू की गई है तो फिर दाखिल खारिज के मामलों के निष्पादन में विलंब होना काफी चिंताजनक है। मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया कि वे ऑनलाइन म्युटेशन सिस्टम की निगरानी करने के साथ उसकी नियमित समीक्षा करें। इस सिलसिले में अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों के साथ बैठक कर दाखिल खारिज के मामलों के लंबित और निरस्त किए जाने की वजह की जानकारी लें। अगर इसमें जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। तय समय सीमा में दाखिल खारिज के मामले निपटाए जाएं, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।अफसरों को हिदायत


झारखंड एजुकेशन रिफॉर्म की ओर आगे बढ़ रहा है। पहले चरण में 80 स्कूलों को स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में तब्दील किया गया है। सभी वर्ग-समुदाय के लोगों ने शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इस नई पहल को सराहा है। बच्चों ने स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में तब्दील इन विद्यालयों में नामांकन को लेकर रुचि दिखायी है। अभिभावकों में बच्चों के क्वालिटी एजुकेशन को लेकर राज्य सरकार के प्रति विश्वास जगा है। आने वाले समय में सरकार का यह नवीन पहल राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इन स्कूलों पर सभी जिलों के उपायुक्त विशेष नजर रखें।मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश-अक्सर देखा जाता है कि सरकारी व्यवस्था की शुरुआत बहुत अच्छी होती है लेकिन अंत उतनी अ'छी तरह से नहीं होता है। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं हो यह सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी तरह स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की व्यवस्था ध्वस्त न हो यह सुनिश्चित करें। -राज्य के प्रत्येक जिलों में अलग-अलग व्यवस्थाएं एवं क्षमताएं हैं। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में कई और चीजें जोडऩे की अवश्यकता है। उपायुक्त निरंतर इन स्कूलों का मॉनिटरिंग करें।-कभी-कभी विभाग या कार्यपालिका के अंदर कार्यशैली में विसंगतियां पाई जाती हैं जो उलझने पैदा करती हैं। कई बार व्यवस्थाओं में चीजें पीछे जाने लगती है ऐसा बिल्कुल न हो इसका ख्याल रखें।

-सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पठन-पाठन के अलावा और कोई कार्य में न लगाएं इस निमित्त विभाग एक नियमावली तैयार करे। विभाग यह भी सुनिश्चित करें कि जिला के उपायुक्त जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ बैठक कर गुणवत्ता शिक्षा के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करे।

Posted By: Inextlive