संयम बरतें, इलाज करने का दें मौका

Updated Date: Fri, 07 May 2021 03:52 PM (IST)

रांची: हॉस्पिटल में इन दिनों पेशेंट्स के अटेंडेंट और डॉक्टर्स समेत दूसरे मेडिकल स्टाफ्स के बीच नोकझोंक की खबरें लगातार आ रही हैं। सरकारी हो या प्राइवेट सभी हॉस्पिटल में ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। कोविड- 19 के सेकेंड वेव के बढ़ते प्रकोप में ऐसे मामले ज्यादा बढे़ हैं। गुरुवार को भी इटकी रोड स्थित जसलोक हॉस्पिटल में ऐसी ही एक घटना हुई, जिसमें हॉस्पिटल के बिल को लेकर मरीज के परिजन और हॉस्पिटल के स्टाफ्स आपस में भिड़ गए। वहीं एक दिन पहले इरबा स्थित एसीएमएस हॉस्पिटल में भर्ती मरीज के परिजनों ने भी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। सदर और रिम्स हॉस्पिटल में हर दिन पेशेंट्स और डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ के बीच कहासुनी हो रही है। एक ओर जहां डॉक्टर्स का कहना है कि पेशेंट्स के परिजन इलाज में परेशान करते हैं तो वहीं परिजनों ने भी डॉक्टर्स पर इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाया है। इन सब का सॉल्यूशन है संयम। मरीज के परिजन संयमित रहकर अपने पेशेंट्स का इलाज करवाएं और डॉक्टर्स की हर बात मानें तो ऐसी नौबत नहीं आएगी। बहरहाल सिटी के हॉस्पिटल्स में इस तरह के विवाद से हर डॉक्टर की परेशानी बढ़ती जा रही है, जिसे देखते हुए डॉक्टर्स ने आइएमए से मदद की गुहार लगाई है।

जबरन दवा देने का दबाव

सदर हॉस्पिटल के डॉक्टर विमलेश झा ने बताया कि मरीज के परिजन अपने मन से कुछ भी दवा देने का दबाव बनाते हैं। ज्यादातर रेमडेसिवीर इंजेक्शन देने के लिए बोला जाता है। जबकि मरीज को उस इंजेक्शन की न तो रिक्वायरमेंट होती है और न ही डॉक्टर द्वारा उसे प्रेस्क्राइब किया होता है। फिर जबरन मरीज के परिजन रेमडेसिवीर और दूसरे इंजेक्शन लगाने की बात करते हैं। डॉ विमलेश ने बताया कि डॉक्टर जब मना करते हैं तो वही परिजन तरह-तरह के आरोप डॉक्टर पर लगाते हैं। जिस वजह से हॉस्पिटल का माहौल खराब होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के माहौल में डॉक्टर्स के लिए मरीज का इलाज कर पाना भी मुश्किल हो रहा है। सदर हॉस्पिटल में लगातार कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें डॉक्टर पर दवा देने का प्रेशर बनाना, बार-बार डाक्टर से आकर मरीज देखने की बात करना, नर्स के साथ गलत व्यवहार, नोकझोंक जैसी बातें सामने आ चुकी हैं। डॉ विमलेश ने बताया कि सभी मामलों की जानकारी आईएमए को दे दी गई है, और इस पूरे मामले पर संज्ञान लेने की अपील की गई है।

इलाज में कोताही के भी आरोप

मरीज के परिजन ने भी डॉक्टर और नर्स पर आरोप लगाते हुए कहा कि हॉस्पिटल में सही से ट्रीटमेंट नहीं होता है। डॉॅक्टर कभी राउंड पर आते ही नहीं। सभी मरीजों को जूनियर डॉक्टर के भरोसे छोड़ दिया गया है। सदर अस्पताल में इलाज करा रहे मो। शाहिद ने बताया कि उनके भाई का ऑक्सीजन लेवल लगातार नीचे जा रहा था वे बार-बार डॉक्टर से अनुरोध करते रह गए कि चलकर देख लें। लेकिन किसी ने उनके भाई को नहीं देखा। अंत में उन्होंने अपने भाई को डिस्चार्ज कराकर दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट किया। वहीं डोंरडा की बसंती जिनके पति का इलाज एसीएमएस हॉस्पिटल में हो रहा है ने बताया कि डॉक्टर से कुछ कहने या पूछने पर सीधा जवाब नहीं मिलता। ये लोग बार-बार डिस्चार्ज कराकर दूसरे हॉस्पिटल ले जाने की धमकी देते हैं। इसके अलावा कई हॉस्पिटल्स में ज्यादा बिल लेने का मामला भी तूल पकड़ चुका है। इन सब के बीच डॉक्टर और मरीज का संबंध बिगड़ रहा है। संयमित होकर इलाज कराना अपने डॉक्टर पर भरोसा करना ही, इसका एकमात्र रास्ता है।

केस 1

दवा नहीं देने का आरोप

सदर हॉस्पिटल में भर्ती मरीज के परिजन ने दवा नहीं देने का अरोप लगाया, जिसके बाद नर्स और परिजन के बीच तू-तू मैं-मैं शुरू हो गया। सीनियर डॉक्टर्स के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। जितनी देर हंगामा हुआ उतनी देर तक मरीज को दवा नहीं मिल सकी। माहौल शांत होने के बाद ही मरीज को दवा दी गई।

केस 2

पैसे मांगने का आरोप

सदर हॉस्पिटल में ही रेमडेसिविर और दूसरी जरूरी दवाओं के लिए परिजनों ने डॉक्टर पर पैसे मांगने का आरोप लगाया, जिसके बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। परिजन और डॉक्टर आपस में ही भिड़ गए। मरीज के परिजन ने डॉक्टर पर दवा के बदले 30 हजार रुपए मांगने की बात कहीं। जबकि प्रभारी सीविल सर्जन ने आरोप को खारिज कर दिया।

केस 3

इलाज नहीं करने का आरोप

बीते दिनों सीसीएल हॉस्पिटल में डॉक्टर और नर्स पर समय से इलाज नहीं करने का आरोप लग चुका है। समय पर इलाज शुरू नहीं होने की वजह से मरीज की मौत हो गई। इसके बाद परिवार वालों ने हॉस्पिटल में काफी हंगामा कर दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद माहौल शांत हुआ।

केस 4

बेड नहीं मिलने पर हंगामा

मेदांता हॉस्पिटल में स्टाफ ही बेड नहीं देने और इलाज नहीं करने का आरोप लगा चुके हैं। बेड नहीं मिलने के कारण हॉस्पिटल के स्टाफ के मरीज की मौत हो गई थी, जिसके बाद काफी देर तक सभी स्टाफ्स ने कार्य बहिष्कार भी कर दिया। इस कारण दूसरे मरीजों को भारी परेशानी हुई।

Posted By: Inextlive
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