झारखंड में टेस्ट स्लो, इसलिए कम हैं मरीज

Updated Date: Mon, 06 Jul 2020 09:36 AM (IST)

रांची: कोरोना की वैक्सीन आने के बाद भी लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिलने वाली है। चूंकि वायरस का एक पीक पीरियड होता है। ऐसे में कोरोना के केस तेजी से बढ़ेंगे। दिसंबर के बाद ही कोरोना का ग्राफ नीचे आएगा। ये बातें रिम्स के पूर्व डायरेक्टर सह राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ बीएल शेरवाल ने कहीं। इस दौरान उन्होंने कोरोना से लड़ने और बचाव के उपाय भी बताए। माइक्रोबायोलॉजिस्ट होने के नाते वह दिल्ली में कोरोना से लड़ाई में इंपॉर्टेंट रोल प्ले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना से बचना है तो टेस्ट, ट्रेस एंड ट्रीटमेंट पर फोकस करना होगा। ऐसे में टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ानी होगी। तभी कांटैक्ट की ट्रेसिंग होगी और मरीजों का पता लगाकर उनका इलाज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड में कम केस हैं इसलिए, चूंकि यहां टेस्ट कम हो रहे हैं। झारखंड में हर दिन 3000 टेस्ट किए जा रहे हैं, जबकि बिहार में 18 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं।

मशीन व एक्सपर्ट डॉक्टर्स जरूरी

डॉ शेरवाल ने कहा कि मौत के आंकड़े कम करने के लिए जरूरी है कि कोविड हॉस्पिटल में लाइफ सेविंग मशीन ज्यादा हो। वहीं हर डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट डॉक्टर्स भी इसके लिए जरूरी हैं। इतना ही नहीं, क्रिटिकल कंडिशन वाले पेशेंट्स को लाइफ सपोर्ट मशीन पर शिफ्ट करने की जरूरत है, जिससे कि उसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग की जा सके। वहीं जूनियर डॉक्टर्स के भरोसे कोविड पेशेंट्स को छोड़ने पर उन्होंने चिंता जताई।

बुजुर्गो की स्पेशल केयर हो

डॉ शेरवाल ने कहा कि कोरोना से निपटने के लिए तमाम उपाय किए जा रहे हैं। लेकिन दवा नहीं आने की स्थिति में गंभीर मरीज और बुजुर्गो को स्पेशल केयर की जरूरत है। चूंकि अब कोरोना के लक्षण बदलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि घर में आक्सीजन सैचुरेशन टेस्ट के लिए अब मशीन घर में रखें। 90 से कम सैचुरेशन होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें। इसके अलावा सर्दी, खांसी, बुखार जैसी स्थिति में बिना देर किए कोविड टेस्ट करा लेना ही बेहतर है।

Posted By: Inextlive
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