जिम माॅरिसन कम उम्र में बड़ी शोहरत एक राॅकस्टार जो 27 साल में ही कह गया अलविदा

2018-12-08T08:30:15Z

आज यानी कि 8 दिसंबर को चर्चित अमेरिकी गायक और संगीतकार जिम मॉरिसन का जन्मदिन है। इस मौके पर हम उनसे जुड़ी कुछ खास बातें जानेंगे।

कानपुर। दुनिया के चर्चित अमेरिकी गायक व गीतकार जिम मॉरिसन आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन जब भी जबरदस्त गीत और संगीत की होती है तो उन्हें एक बार जरूर याद किया जाता है। ब्रिटेनिका के मुताबिक, फेमस अमेरिकी गायक व गीतकार जिम मॉरिसन का जन्म 8 दिसंबर, 1943 को फ्लोरिडा के मेलबॉर्न में हुआ था। मॉरिसन के पिता नेवी में एक बड़े अधिकारी थे और उनका अक्सर ट्रांसफर हो जाया करता था।  मॉरिसन ने अपने बचपन का ज्यादातर पर वाशिंगटन, वेटिकन सिटी जैसे प्रमुख इलाकों में बिताया और उन्हीं जगहों से उनकी स्कूलिंग हुई। उन्होंने 1961 में फ्लोरिडा के सेंट पीटर्सबर्ग जूनियर कॉलेज (अब सेंट पीटर्सबर्ग कॉलेज) से अपनी कॉलेज की पढाई शुरू की और स्थानीय बेक्स आर्ट्स कॉफ़ीहाउस में कविता पढ़कर एक कलाकार के रूप में उभरे। बाद में वह फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी और फिर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स में स्थानांतरित हुए, जहां उन्होंने फिल्म की भी पढाई की।
द डोर बैंड का किया निर्माण
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में पढाई के दौरान मॉरिसन की मुलाकात रे मांजारेक नाम के एक व्यक्ति से हुई। मॉरिसन और मांजारेक ने 1965 में मिलकर गिटारवादक रोबी क्रिएगर और ड्रमर जॉन डेंसमोर के साथ रॉक बैंड की ओपेनिंग की और उस बैंड का नाम 'द डोर' दिया। यह नाम एक किताब से प्रेरित होकर ली गई थी। 'द डोर' बैंड उस वक्त बहुत मशहूर हुआ और बैंड ने कई बड़े से बड़े लाइव कॉन्सर्ट किये। बता दें कि मॉरिसन की गायकी और कवि वाले अंदाज ने बैंड को बहुत आगे तक ले जाने में काफी मदद की। कहा जाता है कि उस दौरान मॉरिसन की इतनी फैन फॉलोविंग थी, लोग इनके गानों को सुनने के लिए धक्के-मुक्की भी खाते थे।
तीर्थस्थल बना कब्रिस्तान
मॉरिसन ड्रग्स का सेवन करने और मंच पर अपने दुर्व्यवहार के लिए जाने जाते थे। 1969 में मियामी में एक संगीत कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने कथित तौर पर खुद को मंच पर एक्सपोज किया, मंच पर उन्होंने अश्लील और घटिया हरकत की, जिसके लिए उन्हें छह महीने जेल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, इस मामले में उन्हें बाद में जमानत भी मिल गई। 1971 में मॉरिसन ने कविता लिखने के लिए 'डोर' को छोड़ दिया और पेरिस चले गए, जहां 3 जुलाई, 1971 को हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। पेरिस के पेरे-लचाइज कब्रिस्तान में उनके शरीर को दफनाया गया था। मॉरिसन के फैन फॉलोविंग का अंदाजा इस बात ने लगाया जा सकता है कि पेरिस के जिस कब्रिस्तान में उन्हें दफनाया गया, वह जगह एक तीर्थस्थल बन गया और भारी संख्या में लोग उस जगह पर रोज आते थे।

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