बिना टीचर बिना क्लास लाखों स्टूडेंट्स हो गए पास

2019-09-14T17:14:38Z

एनवॉयरमेंटल स्टडीज का पेपर कंपलसरी होने के बावजूद सीएसजेएमयू के किसी भी कॉलेज में इस सब्जेक्ट की फैकल्टी नहीं है। तीन साल में एक बार पेपर देना होता है। एक भी क्लास नहीं होने के बाद भी 12 साल से स्टूडेंट्स को पास की डिग्री दी जा रही है।

कानपुर (ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही हर यूनिवर्सिटी के लिए एनवायरमेंटल स्टडीज का पेपर कंपलसरी कर दिया है, लेकिन सीएसजेएम यूनिवर्सिटी ने इसमें 'खेल' कर दिया है. चौंकाने वाली बात जान लीजिए कि यूनिवर्सिटी से संबद्ध किसी भी कॉलेज में एनवायरमेंटल स्टडीज का एक भी टीचर नहीं अप्वाइंट किया गया और न ही कोई क्लास लग रही है. इस 'खेल' का एक पहलू यह भी है कि खानापूरी करने के लिए जियोग्राफी व हिस्ट्री के टीचर एनवायरमेंटल स्टडीज की क्लास ले रहे है. और तो और अभी तक लाखों स्टूडेंट्स को इस सब्जेक्ट में पास दिखा कर सीएसजेएमयू से डिग्री दी जा चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट के अादेश पर..

सुप्रीम कोर्ट ने एनवॉयरमेंट को लेकर साल 1991 में गंभीर चिंता जताई थी. इसके साथ ही यूनिवर्सिटी लेवल पर एनवायमेंटल स्टडीज की पढ़ाई कंपलसरी करने का आदेश दिया था. आदेश के करीब 13 साल बाद इयर 2004 में सीएसजेएमयू ने इस पर अमल करना शुरू किया. साल 2006-07 में सीएसजेएमयू के तत्कालीन वीसी प्रो. हर्ष कुमार सहगल ने एनवायरमेंटल स्टडीज का पेपर सभी स्टूडेंट्स के लिए कंपलसरी कर दिया था.

- 28 साल का सफर:

- 1991 में सुप्रीम कोर्ट ने एनवायरमेंटल स्टडीज को लेकर जारी किए थे आदेश

- 2004 में सीएसजेएमयू ने इस आदेश पर अमल करने की शुरुआत की

- 2006 में एनवायरमेंटल स्टडीज का पेपर यूनिवर्सिटी में कंपलसरी किया गया

- 3 साल में कभी भी एक बार स्टूडेंट को क्लियर करना होता है यह पेपर

- 90 परसेंट कॉलेजों में इतने सालों में एक भी क्लास नहीं कराई गई

- 12 साल बीतने के बाद एक बार भी सिलेबस का रिव्यू नहीं किया गया

 

 

फैकल्टी नहीं की अप्वाइंट

सीएसजेएमयू में इन्वायरमेंटल स्टडीज का सिलेबस लागू हुए करीब 12 साल से ज्यादा वक्त हो गया है. इसके बावजूद आज तक इसके सिलेबस में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सीएसजेएमयू से करीब 1078 कॉलेज संबद्ध हैं. यूनिवर्सिटी कैंपस हो या फिर ऐडेड कॉलेज हों या फिर सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हों किसी भी कॉलेज में इन्वायरमेंटल स्टडीज की फैकल्टी नहीं नियुक्त की गई है. कुछ कॉलेजों में तो अदर सब्जेक्ट टीचर कभी कभी इन्वायरमेंटल स्टडीज की क्लास ले रहे हैं. 90 परसेंट कॉलेजों में इतने सालों में एक भी क्लास नहीं हुई है.

अहम बात यह है कि..

- इन्वायरमेंट स्टडीज का पेपर साइंस स्ट््रीम में अलग आता है.

- आर्ट स्ट््रीम के स्टूडेंट्स के लिए अलग पेपर आता है.

- कॉमर्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए पेपर अलग सेट होता है.

- तीन साल में स्टूडेंट्स को एक बार यह पेपर देना होता है.

- एक ही पेपर एग्जाम में दिया जाता है. पेपर 50 मा‌र्क्स का होता है.

'अभी किसी कॉलेज में एनवायरमेंटल स्टडीज के लिए एक्सपर्ट टीचर नही है. स्टूडेंट्स को तीन साल में कभी भी एक बार इस पेपर को क्लियर करना होता है. इस मैटर पर शासन लेवल पर कोई पॉलिसी बनाई जाए तो बेहतर रहेगा.'

- डॉ. विनोद कुमार सिंह, रजिस्ट्रार सीएसजेएमयू

'एनवायरमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूजीसी ने सिर्फ खानापूर्ति की है. उसे स्पष्ट डायरेक्शन देने चाहिए कि कॉलेज व यूनिवर्सिटी लेवल पर फैकल्टी रिक्रूटमेंट किया जाए. 12 साल में एक बार भी यूनिवर्सिटी लेवल पर इसके सिलेबस को लेकर चर्चा तक नहीं की गई.'

- डॉ. बीडी पांडेय, प्रेसीडेंट कूटा
kanpur@inext.co.in


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