'गले में एक बोर्ड टांग लूं जिसपर लिखा हो मैं कुछ दिन में मरने वाला हूं' इरफान खान

2018-08-04T11:46:00Z

हिंदी फिल्मों के बेहतरीन एक्टर इरफान खान इस समय न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर नाम के कैंसर से जूझ रहे हैं और इन दिनों वे इसके इलाज के लिए लंदन में हैं। जाहिर सी बात है कि वो खुद भी सदमें में हैं। रीसेंटली उन्होनें एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक इंटरव्यू में दिल की बातें खुलकर बताईं। इंटरव्युअर ने जब उन्हें कॉल किया तो उन्होंने बहुत ही विनम्रता से जवाब दिया कि उन्हें एक दिन पहले ही हॉस्पिटलाइज किया गया है। अनजान सी राहों पर चलती जिंदगी को लेकर इस वक्त कैसे हाल में हैं इरफान आइए जानते हैं

जल्द ही आपकी हॉलीवुड फिल्म पजल रिलीज होने वाली है..
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KANPUR : मैंं (इरफान खान) लंबे वक्त से अमेरिकन सिनेमा में ऐसा ही कंटेंट ढूंढ रहा था। मैं ऐसा ही प्रोजेक्ट ढूंढ रहा था जिसमें मैं पर्सनली खुद को इनवेस्ट कर सकूं। जो मेरे दिल के करीब हो और जो मैंने पहले कभी न किया हो। इस फिल्म में मैं जो कैरेक्टर प्ले कर रहा हूं उसमें कई कॉम्प्लेक्सिटी हैं और एक अजीब सी अनप्रिडिक्टिबिलिटी है जहां उसे खुद ही पता नहीं कि चीजें कहां जा रही हैं। मैं ऐसी ही स्टोरी की तलाश में था जिससे मेरी आत्मा जुड़ सके।
इन जेनरल, आप क्या कर रहे हैं?
मैंने लाइफ को बहुत ही डिफरेंट एंगल से देखा है। ये वो वक्त है जब आप बैठते हैं और जिंदगी के दूसरे हिस्से को देखते हैं और ये भी बड़ा फैसिनेटिंग लगता है। मैं भी एक जर्नी में बिजी हूं।
मीडिया में आपकी कंडीशन के बारे में काफी कुछ कहा गया। लेकिन आप लोगों को खुद क्या बताना चाहते हैं?
लाइफ आपको कई तरह के चैलेंजेस देती है। लेकिन जिस तरह से इस कंडीशन ने मुझे इमोशनली, फिजिकली और स्पिरिचुअली टेस्ट किया है, मैं अब इसी पर विश्वास कर ने लगा हूं। इसने मुझे एक खुशी की स्टेज में लाकर खड़ा कर दिया है। इनीशियली मैं बहुत टूट चुका था लेकिन अब शांत हूं। धीरे-धीरे एहसास हुआ कि चीजों को अगल नजरिए से देखना चाहिए। उन चीजों को देखना चाहिए जो ज्यादा पॉवरफुल हैं, ज्यादा प्रोडक्टिव और हेल्दी हैं। मैं बस ये चाहता हूं कि लोग से भरोसा करें कि प्रकृति ज्यादा भरोसेमंद है। मैं इसलिए परेशान था क्योंकि लोग जानना चाहते थे कि मेरी बीमारी ठीक होगी या नहीं पर ये तो मैं भी नहीं जानता, ये मेरे हाथ में ही नहीं। लेकिन आज मैं जिंदगी के उस पड़ाव पर हूं जहां मैं 30 सालों तक मेडिटेशन करने के बाद भी न पहुंच पाता। लेकिन आज मेरी सोच बिल्कुल अलग है।

अब आपका दिन कैसा रहता है? क्या आप स्क्रिप्ट्स पढ़ते हैं?

नहीं, बिल्कुल नहीं। मैं कोई स्क्रिप्ट नहीं पढ़ रहा। मेरी लाइफ बिल्कुल अप्रिडिक्टिबल है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी लाइफ ऐसी होगी। मैं कुछ प्लान नहीं करता अब। मैं नाश्ता करता हूं लेकिन उसके आगे कुछ नहीं सोचता। इन दिनों कई बार ऐसा जी करता है कि अपने गले में एक बोर्ड टांग लूं और उस पर लिखा होगा, मुझे बीमारी है और मैं कुछ दिन में मरनेवाला हूं। मेरे दिमाग में हमेशा चलता रहता है कि मैं कुछ दिन, महीने या फिर साल में मरनेवाला हूं। कभी सोचता हूं इन सभी बातों को भुला कर फिर से जीने लगूं। जिंदगी मुझे फिर से जीने का मौका दे रही है।

आपका लंदन में ट्रीटमेंट चल रहा है, इस बारे में कुछ इंफॉर्मेशन देना चाहेंगे?

मेरे ट्रीटमेंट में कीमोथेरेपी के 6 सेशन होत हैं जिसमें से चार हो चुके हैं और दो बाकी हैं। तीसरे सेशन के बाद जो स्कैन हुआ था, वो पॉजिटिव था। किसी की भी जिंदगी की गारंटी नहीं होती। जब ये सभी 6 सेशन पूरे हो जाएंगे इसके बाद एक बार फिर से कैंसर स्कैन होगा। इसके बाद मालूम चलेगा कि आगे क्या होता है।
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