राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित हो चुके अभिनेता अनु कपूर का जीवन बचपन से ही संघर्षमय रहा है। उनकी जिंदगी के शुरुआती दिन बेहद कठिनाई में गुजरे। अनु ने दसवीं के बाद पढा़ई छोड़ कर चाय और चूरन के स्टॉल भी लगाये। आइए जानते हैं अनु के 61वें जन्मदिन पर किन परिस्थितियों में बने बॉलीवुड के इतने बडे़ एक्टर।


चाय और चूरन के ठेले लगाएबॉलीवुड में शानदार अभिनय से अपना सिक्का जमाने वाले एक्टर अनु कपूर का मनना है कि एक कलाकार को आसानी से अपना लक्ष्य नहीं मिलता है। अनु कपूर ने बचपन में बहुत गरीबी का सामना किया है। इसलिए अनु ने 10वीं कक्षा के बाद पढा़ई छोड़ दी थी। इसके बाद वो चाय का ठेला लगाने लगे। इतना ही नहीं चूरन के नोट और लॉटरी की टिकटें भी बेचते थे। 10वीं की पढा़ई छेड़ने के बाद भी अनु ने 14 से ज्यादा बार वेद, कुरान और उपनिषद पढे़ हैं। बॉलीवुड में नहीं था कोई गॉडफादर
अनु कपूर के मुताबिक उनके फिल्मीं करियर के शुरुआत दिनों में किसी ने इंडस्ट्री में उनकी मदद नहीं की थी। अनु ने बताया की बॉलीवुड में उनका कोई गॉड फादर नहीं है। इस इंडस्ट्री में अनु ने अपनी जगह खुद के दम पर ही बनाई है। अनु ने कहा वो आज तक इंडस्ट्री में किसी के पास भी काम मांगने नहीं गए। यही वजह है कि फिल्में साइन करते वक्त वो कभी भी बैनर या डायरेक्टर नहीं देखते।

Posted By: Vandana Sharma