दो साल से लेजर मशीन खराब प्राइवेट हॉस्पिटल जाना मजबूरी

2019-02-28T06:01:02Z

- वर्ष 2017 से जिला अस्पताल में खराब पड़ी है यान डी आर मशीन

- रोजाना सैकड़ों मरीजों को ऑपरेशन के लिए जाना पड़ रहा प्राइवेट अस्पताल

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-2 साल से खराब है यान डी आर मशीन

300 मरीज आंखों के डेली आते हैं

150 मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत

30-50 हजार रुपए प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन का खर्च

20 लाख रुपए है मशीन की कीमत

बरेली : जिला अस्पताल में करीब दो साल से यान डी आर मशीन खराब है, जिस कारण रोजाना सैकड़ों मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में आंख के ऑपरेशन के लिए जाना पड़ रहा है। हैरत की बात तो यह है कि नेत्र रोग विभाग की ओर से सैकड़ों पत्र विभाग के उच्चाधिकारियों को दूसरी मशीन मंगाने के लिए दिए गए, लेकिन सिवाए आश्वासन के अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा। इसके चलते मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटल में मोटी रकम देकर इलाज कराना पड़ रहा है।

इसलिए है मशीन की जरूरत

जिला अस्प्ताल के नेत्र रोग विभाग में आने वाले मरीजों में ज्यादा संख्या मोतियाबिंद के मरीजों की होती है, जिनके ऑपरेशन के लिए यान डी आर मशीन की जरूरत होती है। इससे बिना चीरा या घाव के आसानी से कार्निया ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। वहीं आंखों से संबंधित अन्य ऑपरेशन भी इस मशीन से ही होते हैं।

प्राइवेट हॉस्पिटल में 30-50 हजार खर्च

जिस मशीन की डिमांड जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डॉक्टर कर रहे हैं, उससे फेको विधि द्वारा ऑपरेशन किया जाता है। डॉक्टरों की मानें तो सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज ऑपरेशन के लिए पहुंच रहे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करा सकें। एक ओर जहां जिला अस्पताल में फेको विधि से ऑपरेशन फ्री किए जाते हैं वहीं दूसरी ओर प्राइवेट अस्पतालों में इस ऑपरेशन की फीस 30 से 50 हजार रुपये तक है।

मशीन के लिए बजट नहीं

वर्ष 2017 की शुरुआत यानि जनवरी में ही मशीन में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। तब इसे रिपेयर करा लिया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह फिर से खराब हो गई। मशीन खराब होने के एक महीने बाद ही नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ। एके गौतम ने विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजकर मशीन खराब होने की सूचना देने के साथ नई मशीन दिलाने की मांग की। इसके बाद वह लगातार मुख्यालय को भी पत्र भेजते रहे। तब से अब तक जिला अस्पताल में निर्माण कार्यो में करोड़ों का बजट खपा दिया गया, लेकिन 20 लाख की मशीन खरीदने की जरूरत अफसरों ने नहीं समझी।

मरीजों से बात :::

मैनें करीब दो महीने पहले यहां दिखाया था तो डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। डॉक्टर ने बोला था कि दो महीने में मशीन आ जाएगी, लेकिन अभी तक नहीं आई, अब प्राइवेट अस्पताल में ही ऑपरेशन कराना होगा।

प्रियंका।

एक आंख में लगातार दर्द होता रहता था। अब धुंधला दिखाई देने लगा है। डॉक्टर ने बोला है ऑपरेशन करना पड़ेगा। जिला अस्पताल में यह ऑपरेशन फ्री में होता है बाहर मोटी रकम लगती है। यहां मशीन नहीं हैं ऐसे में बहुत परेशानी हो रही है।

जशोदा देवी।

क्या बोले डॉक्टर

मशीन वर्ष 2017 जनवरी में खराब हो गई थी। उस दौरान ही विभागीय अधिकारियों को मशीन मंगाने का प्रस्ताव भेज दिया था। कई बार मुख्यालय को भी पत्र भेजा, लेकिन दो साल के बाद भी मशीन नहीं मंगाई गई। अधिकतर मरीज कार्निया ट्रांसप्लांट के ही आते हैं जिनके ऑपरेशन बिना मशीन के संभव नहीं है। ऐसे में मजबूरन मरीजों को किसी दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन कराने की सलाह देते हैं।

वर्जन

यान डी आर मशीन मंगाने के लिए मुख्यालय प्रस्ताव भेजा है। अब दोबारा से रिमांइड लेटर भेजा जाएगा। अगर वहां से कोई संतोषजनक जबाव नहीं मिलता है तो अन्य कार्य जो इतने जरूरी नहीं है उन्हें रोककर मशीन मंगाई जाएगी। एक महीने में मशीन जिला अस्पताल में मौजूद होगी।

डॉ। केएस गुप्ता, एडीएसआईसी।


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