सनवारू का टूटा सपना बीच रास्ते छोड़ी मैराथन

2017-11-20T07:00:40Z

-पिछले वर्ष के विजेता सनवारू की तबियत हुई खराब, शुआट्स के पास मायूस होकर लौटे

ALLAHABAD: इंदिरा मैराथन के गत विजेता सनवारू का सपना चकनाचूर हो गया। इस बार भी सभी की निगाहें उन्हीं के ऊपर लगी हुई थी। उन्होंने चेस्ट नम्बर 306 के साथ 18 अक्टूबर को मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में प्रैक्टिस की और रविवार को मैराथन में हिस्सा लिया। लेकिन डिहाइड्रेशन की वजह से मायूस हो गए और मैराथन बीच में ही छोड़ दिया। आनंद भवन से जब मैराथन का शुभारंभ हुआ तो हर कोई यही चर्चा करता रहा कि सनवारू कहीं नहीं दिख रहे हैं। उनके मैराथन को छोड़ने की पुष्टि उप क्रीड़ाधिकारी जौनपुर रुस्तम खां ने की। जो लम्बे समय तक इंदिरा मैराथन से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि शुआट्स के सामने डिहाइड्रेशन की वजह से सनवारू को मैदान से हटना पड़ा।

अति बेली में एडमिट

डिहाइड्रेशन की वजह से इलाहाबाद की अति का भी सपना तोड़ दिया। उनको और सेना के सुनील को मैराथन से हटना पड़ा। इसकी जानकारी तब हुई जब मैराथन समाप्त होने के बाद स्टेडियम में एलाउंस किया गया कि इति के परिजन जहां कही भी हो बेली हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में एडमिट है।

पुष्प वर्षा से हुआ स्वागत

इंदिरा मैराथन के दौरान अरैल स्थित टर्निग प्वाइंट से पहले सच्चा बाबा आश्रम के वेदपाठी विद्यार्थियों ने धावकों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। साथ ही प्रवेश ब्रह्माचारी की अगुवाई में विद्यार्थियों ने शंखनाद कर मैराथन के सकुशल सम्पन्न होने की कामना की गई।

आयोजकों ने विजेता का लिखा गलत नाम

इस वर्ष इंदिरा मैराथन में पुरुष वर्ग के विजेता रशपाल सिंह रहे लेकिन आयोजकों को उनका सही नाम नहीं पता था। इसकी बड़ी वजह यही थी कि स्टेडियम में लगाए गए बोर्ड में वर्ष 2013 के विजेता के रूप में यशपाल सिंह का नाम दर्ज किया गया था। जबकि उनका नाम रशपाल सिंह है।

पहली बार हुआ कैटिल वाहन का इस्तेमाल

इंदिरा मैराथन के दौरान धावकों को प्रस्तावित रुट पर किसी भी प्रकार के जानवरों से असहज स्थिति से बचाने के लिए नगर निगम का कैटिल वाहन इस्तेमाल किया गया। जो पूरे रास्ते सबसे आगे-आगे चलता रहा।

राणा प्रताप चौराहे पर हंगामा-फोटो

राणा प्रताप चौराहे के सामने धावकों ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। आयोजकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फोर्स मौजूद रही लेकिन कई धावकों से पुलिस से नोकझोक हुई। धावकों का कहना था कि आयोजकों ने कई धावकों को बीच रास्ते बाइक पर बैठाकर ले जा रहे हैं। करीब आधा घंटे तक हंगामा चलता रहा। पुलिस के आला अधिकारियों ने धावकों को समझाकर शांत कराया।


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