अलर्ट! ताजनगरी में लिफाफा गैंग बस स्टैंड पर बनाते हैं लोगों को शिकार

2019-05-20T09:12:15Z

लिफाफा गैंग ने शहर में वारदात करनी शुरू कर दी है लेकिन पुलिस के पास इस गैंग को पकड़ने की कोई प्लानिंग नहीं है

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AGRA : लिफाफा गैंग ने शहर में वारदात करनी शुरू कर दी है, लेकिन पुलिस के पास इस गैंग को पकड़ने की कोई प्लानिंग नहीं है. गैंग के सदस्य कार लेकर बस स्टैंड पर घूमते रहते हैं और बड़ी आसानी से लोगों को अपना शिकार बनाते हैं. एक केस के बाद पुलिस अलर्ट नहीं हुई. अब फिर से इस गैंग ने दूसरे को शिकार बना दिया.

क्राइम ब्रांच कर्मी बन कर लगाया 45 हजार का चूना
जयपुर पट्टी, मुरादाबाद निवासी मोहम्मद इरफान झारखंड में नौकरी करते हैं. रविवार की सुबह साढ़े पांच बजे वह अपने भाई मोहम्मद अनत व चाचा लतीफ के साथ आईएसबीटी पर बस से उतरे थे. यहां से उन्हें मुरादाबाद की बस पकड़नी थी. कुछ देर में वहां पर एक ऑल्टो कार आई. उसमें पहले से तीन युवक बैठे थे. युवकों ने उनसे बोला कि कहां जाना है. इस पर मोहम्मद इरफान ने मुरादाबाद जाने की बात बोली. कार सवार शातिर उन्हें ले जाने को राजी हो गए. रास्ते में शातिरों ने खुद को क्राइम ब्रांच से बताया. एक शातिर ने खुद को बीएसएफ कर्मी बताया. शातिरों ने तीनों को डराया कि वह एक डकैती कांड की जांच कर रहे हैं. तीनों की इन्क्वॉयरी भी उनके हाथ में है. इस पर तीनों चौंक गए. उनके मन में भी डर भर गया. शातिरों ने उन्हें एक लिफाफा दिया और कहा कि घबराओ नहीं, सारा रुपया इसमें रख दो, बाद में लिफाफा थाने से वापस मिल जायेगा.

रास्ते में उतार कर भाग निकले
शातिरों ने तीनों को कुबेरपुर पर उतार दिया और बोला कि एक जगह और इन्क्वारी के लिए जाना है. यहां से जाना नहीं है. अगर यहां से गए तो हवालात की हवा खानी होगी. भागने पर कार्रवाई हो सकती है. तीनों वहां पर उतर गए. शातिरों ने लिफाफा भी उन्हें थमा दिया. इसके बाद वह 7 बजे तक वहीं पर खड़े रहे. सात बजे तक उनके वापस न लौटने पर मोहम्मद आरिफ को कुछ शक हुआ. उसने लिफाफा खोल कर देखा तो उसमें कागज की रद्दी मिली. रद्दी देख कर सभी चौंक गए. वह शिकायत लेकर थाना एत्मादपुर पहुंचे. यहां से उन्हें थाना हरीपर्वत भेजा. पीडि़त की तहरीर पर पुलिस शातिरों की तलाश कर रही है. तीनों ने लिफाफे में 45 हजार रुपया रखा था.

फैले होते हैं ग्रुप के लोग
लिफाफा गैंग वारदात करने से पहले पूरी प्लानिंग करता है. गैंग के सदस्य योजना के तहत अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं. इनके पास एक कार होती है. दो से तीन शातिर कार में सवार रहते हैं, बाकि दो युवक सवारी की तरह बाहर घूमते रहते हैं. जब नया शिकार गैंग से टकराता है तो बाहर सवारी बन कर घूम रहे गैंग के सदस्य भी पास में आकर खुद भी सवारी बन जाते हैं.

चेकिंग का नाम लेकर देते हैं झांसा
शातिर आधे रास्ते में गाड़ी को किसी न किसी विभाग की बता कर आगे चेकिंग होने का झांसा देते हैं और सारी नगदी और जेवर लिफाफे में रखवा देते हैं. अब आधे रास्ते पहुंच लोगों को उन पर विश्वास करना पड़ता है. वह लिफाफे में सामान रख देते हैं. गैंग उन्हें आधे रास्ते उतार कर भाग निकलता है. गैंग के सदस्य खुद को क्राइम ब्रांच कर्मी भी बता देते हैं.

दो दिन में दो मामले आए प्रकाश में
शनिवार को शातिरों ने चर्च रोड निवासी कौशल शर्मा को उनके परिवार समेत निशाना बनाया था. उनके पिता की दस हजार नगदी, मां की सोने की चेन, बहन की अंगूठी को लिफाफे में रखवा दिया. इसी तरह रविवार को मोहम्मद इरफान को भाई और चाचा समेत निशाना बना कर 45 हजार रुपये का चूना लगा दिया गया.

आगरा से एत्मादपुर तक बिछा जाल
शातिरों ने लोगों को शिकार बनाने के लिए एक रास्ता चुन रखा है जो आईएसबीटी से हाईवे होते हुए एत्मादपुर तक है. इसी बीच में वह वारदात को अंजाम देते हैं. हैरानी की बात ये है कि एक के बाद दूसरी वारदात हो जाती है और पुलिस पहली वारदात पर अलर्ट नहीं होती. अगर पुलिस पहले से आईएसबीटी पर अपना मुखतंत्र सक्रिय करती तो शायद गैंग हाथ लग जाता पर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले से ध्यान हटा दिया.


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